• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • JDA Had Sold The Land Of TB Hospital For 5 Crores For The New Building Lab...in 25 Years The Tinshed Was Not Even Built.

सांस पर फांस:नई बिल्डिंग/लैब के लिए जेडीए ने टीबी अस्पताल की जमीन 5 करोड़ में बेची थी...25 साल में टिनशेड तक नहीं बना

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी\भरत सिसोदिया
  • कॉपी लिंक

जेडीए की ‘वादाखिलाफी’ के चलते एसएमएस अस्पताल से भी पुराने टीबी अस्पताल (1938 में बना था) पर संकट खड़ा हो गया है। 25 साल पहले (26 जून 1997) जेडीए ने नई बिल्डिंग और आधुनिक लैब बनने के लिए सुभाष नगर स्थित टीबी अस्पताल की जमीन 5 करोड़ रुपए में बेच दी थी। तत्कालीन जेडीए इंजीनियरों ने शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को भेजी गई रिपोर्ट में कहा था कि अस्पताल की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। इसकी मरम्मत हो या फिर नई बिल्डिंग बनाई जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर जेडीए को 1000 वर्गमीटर जमीन बेचने की अनुमति दे दी गई।

अब हालत यह है कि नई बिल्डिंग में मरीजों के बैठने के लिए टिनशेड तक नहीं लगाया गया। अस्पताल प्रशासन ने बिल्डिंग और लैब बनवाने के लिए जेडीए के अधिकारियों को पत्र लिखा तो जवाब मिला... जितना काम होना है, उस पर करीब 50 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इतना पैसा जेडीए कहां से लाए? ऐसे में नई बिल्डिंग का काम कहां से होगा? गौरतलब है कि वर्ष 1938 में टीबी सेनेटोरियम की स्थापना की गई थी। अभी यहां पर 306 बेड हैं। सीओपीडी, अस्थमा, लंग्स कैंसर, लंग्स फाइब्रोसिस, निमोनिया जैसी बीमारियों के लिए अलग से 50 बेड बनाए गए हैं। यहां 45 फीसदी टीबी और 55 फीसदी अन्य बीमारियों के मरीज आते हैं।

9 साल पूर्व इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज का दर्जा मिला पर हाईटेक लैब व स्टाफ की कमी
अनदेखी के चलते ‘चेस्ट एंड टीबी अस्पताल’ संक्रमण का शिकार है। 9 साल पहले सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर के इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज (आईआरडी) का दर्जा तो दे दिया, लेकिन हाईटेक लैब, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर कमी से डॉक्टर और मरीज दोनों परेशान हैं। श्वसन रोग संस्थान में 37 पद खाली पड़े होने से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।

एसोसिएट प्रोफेसर (माइक्रोबायलोजी), असिस्टेंट प्रोफेसर (पैथोलोजी व रेडियोडायग्नोसिस), सीनियर रेजिडेंट (सर्जरी के 4 पद) बायोकेमिस्ट (जूनियर), सीटी टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर (4), नर्स ग्रेड सैकंड( 8) के पद खाली हैं। पिछले साल सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने भवन पर खामियों के चलते करोड़ों रुपए मेन्टीनेंस होने की बात कही है।

रेस्पिरेटरी पुनर्वास केन्द्र जरूरी
टीबी अस्पताल में क्लीनिकल रेस्पिरेटरी फिजियोलोजी लैब की भी आवश्यकता है। यहां पीएफटी, प्लीथसोमोग्राफी, पोर्टेबल स्पायरोमीटर और नेबुलाइजर भी नहीं है। पुनर्वास केन्द्र के बनने से सांस के रोगियों को उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा दी जा सकती है।

जमीन नीलामी की पत्रावली की जांच अभी की जा रही है

  • टीबी अस्पताल की जमीन की नीलामी का जो प्रकरण है, उसकी पत्रावली की जांच की जा रही है। जल्द ही सक्षम स्तर पर निर्णय लेकर आगे की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। हमारी कोशिश है कि पैसे की कमी के कारण काम नहीं रुके। - सैय्यद मुकरम शाह, उपायुक्त जोन-2, जेडीए
  • हमारा प्रयास है कि संस्थान में आने वाले मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा दी जा सके। अस्पताल के लिए नए भवन, आधुनिक जांच सुविधा, मैनपावर और उपकरण खरीदने के लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। - डॉ. विनोद जोशी, अधीक्षक, श्वसन रोग संस्थान