पहली बार डॉक्टरों में इलेक्शन इंफेक्शन:JMA चुनाव; आईएमए जयपुर, जेएमए, आईएमए स्टेट के डॉक्टर आमने-सामने

जयपुर15 दिन पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

गंभीर मरीज या संक्रमित का इलाज करने वाले डॉक्टर खुद ‘संक्रमित’ हैं। यह संक्रमण है, जेएमए के चुनाव का। इलेक्शन फार्म भरने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर है पर डॉक्टर्स गुटों ने मोर्चे खोल रखे हैं। विवाद ऐसा है कि पहली बार जेएमए, आईएमए स्टेट और आईएमए चुनाव में पूरी ताकत लगा रहे हैं। जेएमए के पूर्व पदाधिकारी और सदस्य इस चुनाव से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है ऐसे इलेक्शन का मतलब नहीं है। विवाद पर भास्कर ने तीनों एसोसिएशन से बात की।

फीस देने वाले डॉक्टरों के नाम वोटर लिस्ट में ही नहीं हैं

खींचतान: जेएमए के 2020 के इलेक्शन नहीं हुए। प्रेसीडेंट डॉ. गिरीश ने इस्तीफा दिया पर चार्ज इलेक्ट प्रेसीडेंट डॉ. तरुण पाटनी को दे दिया। सेक्रेट्री डॉ. नरेश सोनी को जीबीएम ने अगस्त 2020 में हटा दिया। चुनाव तय हुए तो वोटर लिस्ट पर विवाद हुआ। 16 अगस्त 20 को इलेक्शन कमीशन ने दो इलेक्ट प्रेसीडेंट और पदाधिकारी नियुक्त किए। बाद में आरएमए ने कहा ऐसा नहीं हो सकता और फिर चुनाव तिथि 8 अक्टूबर तय की गई।

वोटर लिस्ट: जेएमए के मेंबर बढ़ाने के लिए काफी डॉक्टरों से फीस ली गई लेकिन वोटर लिस्ट में उन डॉक्टरों के नाम ही नहीं। सामने आया कि पदाधिकारियों ने कम फीस में मेंबर का आॅफर दिया था। फिर आईएमए ने कहा पूरी राशि देने के बाद ही मेंबर बन सकते हैं और वोट डाल सकते हैं। डॉक्टर अड़े हैं कि उसी फीस पर मेंबर और वोटर बनाएं, अब और रुपए नहीं देंगे।

व्यक्तिगत विवाद चल रहे हैं
जेएमए चुनाव हो चुके हैं और आईएमए सहित किसी को हस्तक्षेप का हक नहीं। कुछ के व्यक्तिगत मामले हैं, इसलिए ऐसा हो रहा है। - डॉ. सर्वेश जोशी, इलेक्शन कमीशन मेंबर

कभी चुनाव हुए ही नहीं, अब हम करा रहे हैं। जिन्होंने फीस जिसे दिया, उनसे बात करें। हमारे पास जिसके पैसे आए, हमने मेंबर बनाया है- डॉ. पीसी गर्ग, स्टेट सेक्रेट्री, आईएमए राजस्थान

आईएमए तो डॉक्टर्स के हित की बाॅडी है। कुछ निजी तत्व माहौल बिगाड़ रहे हैं। पहले के भी पदाधिकारी चाहते हैं कि एसोसिएशन का वर्चस्व रहे। हठधर्मिता करना गलत है। - डॉ. ईश मुंजाल, सेंट्रल एक्ज्यूकेटिव, आईएमए

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