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सियासी रिश्तों में सुधार:उपचुनावों से ठीक पहले भाजपा-कांग्रेस हर मंच से दे रहे संदेश- अब सबकुछ ठीक है

जयपुर10 दिन पहले
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बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा, प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, सदन के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठाैड़, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत, कैलाश चाैधरी सहित पूरी काेर कमेटी के सदस्य माैजूद थे। - Dainik Bhaskar
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा, प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, सदन के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठाैड़, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत, कैलाश चाैधरी सहित पूरी काेर कमेटी के सदस्य माैजूद थे।
  • काेर कमेटी की बैठक में पहुंचीं वसुंधरा राजे
  • महापंचायत; गहलोत-पायलट साथ आएंगे

राजस्थान में चार विधानसभा सीटों के उपचुनाव से ठीक पहले भाजपा व कांग्रेस के अंदरूनी सियासी रिश्तों में अचानक तेजी से सुधार दिखने लगा है। एक दिन पहले ही जहां मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सचिन पायलट समेत 19 विधायकों के अयोग्यता नोटिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी वापस लेने के लिए पत्र लिखा। वहीं, मंगलवार को भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं।

करीब आठ महीने बाद वे भाजपा की किसी बैठक में आईं। बता दें कि 4 दिन पहले ही राजे समर्थक 20 विधायकों ने जेपी नड्‌डा व सतीश पूनियां को चिट्‌ठी लिखकर विधानसभा में मुद्दे उठाने और बोलने का मौका देने में भेदभाव का आरोप लगाया था। बैठक करीब 3 घंटे चली। प्रभारी अरुण सिंह ने बताया कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 2 मार्च को जयपुर आएंगे। प्रदेश सरकार के कुशासन के खिलाफ 6-14 मार्च तक सभी मंडल और तहसील स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

  • पूनियां की गाड़ी खड़ी थी, इसलिए सीधे पोर्च में नहीं पहुंची वसुंधरा राजे की कार
  • चिट्‌ठी लिखने वाले राजे समर्थक 20 विधायकों से मिले अरुण

महापंचायत; गहलोत-पायलट साथ आएंगे

13 फरवरी को रूपनगढ़ में राहुल के मंच पर साथ दिखे थे गहलोत-पायलट। -फाइल
13 फरवरी को रूपनगढ़ में राहुल के मंच पर साथ दिखे थे गहलोत-पायलट। -फाइल

राजस्थान उपचुनावों से पहले कांग्रेस आलाकमान भी सियासी सर्जरी में जुटा है। संकेतों के जरिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के समर्थकों को यह दिखाने की कोशिश है कि दोनों नेताओं के रिश्तों में जमी बर्फ पिघल रही है। राजस्थान में सियासी संकट के बाद 12 फरवरी को गंगानगर में राहुल गांधी के किसान सम्मेलन में पहली बार गहलोत और पायलट एक साथ दिखे थे।

इसके बाद कोटखावदा में पायलट के किसान सम्मेलन में सीएम अशोक गहलोत की तस्वीर नजर आई। सोमवार को विधानसभा के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने पायलट और उनके 18 समर्थक विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग एसएलपी वापस ले ली। अब 27 को चूरू और मेवाड़ में आयोजित होने वाली किसान महापंचायत में पायलट एक बार फिर से गहलोत के साथ नजर आ सकते हैं। पायलट बीते एक महीने से लगातार प्रदेश में किसान आंदोलन के समर्थन में सभाएं कर रहे हैं।

सियासी मायने

मेवाड़ के जातिगत समीकरण ऐसे हैं कि पायलट की मौजूदगी उपचुनावों में कांग्रेस को लाभ दे सकती है, खास तौर से राजसमंद व सहाड़ा में। ये दोनों सीटें कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं। सहाड़ा कांग्रेस के खाते में थी। राजसमंद पर भाजपा का कब्जा था।

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