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  • Kailash Bohra Became Sub Inspector In 1996, Promoted RPS Two Years Ago, Obscene Chatting And Phone Calls Recorded By Acb

रिश्वत में अस्मत मांगने वाले ACP की कहानी:7 दिन से पीड़िता से कर रहा था अश्लील बातें, निजी कार में सिविल ड्रेस में पहुंचा था; छुट्‌टी के चलते खुद ही ऑफिस का ताला खोला

जयपुर9 महीने पहले
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जयपुर में युवती से रिश्वत में अस्मत मांगने के मामले में रविवार को ACB द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद ACP कैलाश बोहरा। - Dainik Bhaskar
जयपुर में युवती से रिश्वत में अस्मत मांगने के मामले में रविवार को ACB द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद ACP कैलाश बोहरा।
  • रविवार को छुट्‌टी होने से डीसीपी और अन्य स्टाफ नहीं आता, इसलिए सरकारी ऑफिस चुना

जयपुर में रिश्वत के बदले रेप पीड़िता से उसकी अस्मत मांगने वाला ACP कैलाश बोहरा अब ACB की गिरफ्त में है। पुलिस अफसर को रविवार को युवती के साथ आपत्तिजनक हालत में ACB ने पकड़ लिया। आरोपी कैलाश बोहरा 1996 में बतौर सब इंस्पेक्टर राजस्थान पुलिस में भर्ती हुआ था। वह जयपुर के बजाज नगर, सदर, शिवदासपुरा सहित कई अन्य थानों में इंस्पेक्टर रहा है।

दुष्कर्म केस की जांच के बहाने आरोपी अफसर 30 साल की पीड़िता को बार-बार ऑफिस बुलाता था। पहले उसने जांच के लिए रिश्वत मांगी, बाद में पीड़िता से अस्मत मांगना शुरू कर दिया। दरअसल, पीड़िता ने जयपुर में शादी का झांसा देकर देहशोषण करने, धोखे से गर्भपात कराने का एक युवक व अन्य के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसमें आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की एवज में ACP उसकी अस्मत मांग रहा था। परेशान होकर पीड़िता ने ACB से पूरे मामले की शिकायत की थी।

पूरी खबर यहां पढ़िए: रिश्वत में अस्मत मांगने वाला ACP गिरफ्तार, दुष्कर्म केस की जांच के बहाने 30 साल की पीड़िता को बुलाता था, ऑफिस में आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया

2 साल पहले RPS में हुआ प्रमोशन
करीब दो साल पहले ही कैलाश बोहरा पुलिस इंस्पेक्टर से पदोन्नत होकर RPS बना। इसके खिलाफ केस दर्ज था और CBI जांच चल रही थी। ऐसे में अपने प्रमोशन के लिए वह कोर्ट भी गया था। RPS में प्रमोशन के बाद बोहरा की पहली पोस्टिंग पुलिस मुख्यालय की सिविल राइट्स ब्रांच में हुई। कुछ महीने पहले ही बोहरा का जयपुर कमिश्नरेट के पूर्व जिले में महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के तौर पर नियुक्ति हुई।

10 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में चल रही है सीबीआई जांच
जानकारी में सामने आया है कि साल 2010 में जयपुर में सदर थानाप्रभारी रहते हुए बोहरा ने आर्म्स एक्ट के दो मुकदमों में एक ज्वैलर सहित दो युवकों की गिरफ्तारी की थी। इस मामले में पिछले दिनों हाईकोर्ट ने कैलाश बोहरा सहित आधा दर्जन पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने दोनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंपते हुए छह माह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही, कोर्ट ने इस मुकदमे की ट्रॉयल पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी थी। इस संबंध में प्रार्थी जितेंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि मामले के तथ्यों से यह फर्जी लगता है और किसी व्यक्ति के खिलाफ हथियार बरामदगी का झूठा केस बनाना गंभीर है।

छुट्‌टी होने से डीसीपी और स्टाफ नहीं आते, इसलिए अस्मत के लिए सरकारी ऑफिस चुना
ACP बोहरा ने मुकदमा दर्ज करवाने वाली 30 वर्षीय युवती से रिश्वत में अस्मत मांगी। इसके लिए ACP ने रविवार का दिन चुना। आबरू लूटने के लिए सुरक्षित जगह जयपुर कमिश्नरेट के डीसीपी पूर्वी का सरकारी दफ्तर चुना। इसी भवन में ग्राउंड फ्लोर पर महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट का ऑफिस है। इसमें सहायक पुलिस आयुक्त कैलाश बोहरा खुद बैठते हैं। रविवार को छुट्‌टी का दिन था। ACP को पता था कि आज ऑफिस बंद होने से स्टाफ नहीं आता।

ऐसे में वे निजी कार लेकर सिविल ड्रेस में ऑफिस पहुंचे। खुद ही ऑफिस का लॉक खोला। इसके बाद पीड़िता के ऑफिस पहुंचने पर उसे अपने कमरे में ले गए। जहां युवती को अंदर बुलाकर दरवाजा बंद कर लिया। तब पहले से ही तैयारी ACB ने अफसर को रंगे हाथों दबोच लिया।

ACB ने फोन सर्विलांस पर लिया: एक सप्ताह से कर रहे थे अश्लील बातचीत
ACP कैलाश बोहरा को ट्रैप करने वाले ACB के एडिशनल एसपी नरोत्तम वर्मा के मुताबिक, ऑफिस में बुलाने के लिए भी कैलाश व पीड़िता युवती के बीच फोन पर बातचीत हुई। इसमें भी बोहरा ने युवती से रिश्वत में अस्मत चाहने के लिए आपत्तिजनक बात की। यह बात फोन में रिकॉर्ड है। जानकारी के मुताबिक 6 मार्च को युवती ने ACB में शिकायत की थी। इसके बाद ACP ने शिकायत के सत्यापन के लिए ACP बोहरा के मोबाइल को सर्विलांस पर लिया था।

एएसपी नरोत्तम वर्मा ने कहा कि ACP ने पिछले सात-आठ दिनों से बातचीत हो रही थी। वे सारी रिकॉर्डिंग ACB के पास मौजूद है। युवती को ऑफिस बुलाने के लिए जब फोन किया। इसमें भी ACP ने अस्मत मांगने के लिए युवती से आपत्तिजनक बातचीत की। अनुसंधान के दौरान आरोपी अपना वॉइस टेस्ट नहीं करवाता है, तो कोर्ट यह मान लेती है कि आरोपी जानबूझकर वॉइस टेस्ट नहीं दिया। इसका मतलब आवाज उसी की है। इसका फायदा आरोपी को नहीं मिलेगा।

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