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कमलेश प्रजापत एनकाउंटर केस:दो महीने बाद CBI ने मुकदमा दर्ज कर शुरू की तफ्तीश, घटनास्थल पर पहुंची अफसरों की टीम, विवाद खड़े होने पर गहलोत सरकार ने दी थी सीबीआई जांच को मंजूरी

जयपुर3 महीने पहले
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बाड़मेर के कुख्यात बदमाश कमलेश प्रजापत की 23 अप्रेल की रात को पुलिस से कथित मुठभेड़ में गोली लगने से मौत हो गई थी - Dainik Bhaskar
बाड़मेर के कुख्यात बदमाश कमलेश प्रजापत की 23 अप्रेल की रात को पुलिस से कथित मुठभेड़ में गोली लगने से मौत हो गई थी

बाड़मेर के बहुचर्चित कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में सीबीआई ने आज बुधवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब अनुसंधान में यह साफ होगा कि कमलेश प्रजापत का एनकाउंटर सोची समझी साजिश और उनकी हत्या के प्रयास के लिए किया गया स्थानीय पुलिस का षड़यंत्र था या फिर कमलेश की मौत उसे पकड़ने के लिए पुलिस ऑपरेशन के दौरान अचानक उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से हुई। इसके लिए सीबीआई टीम बाड़मेर में मौके पर पहुंच गई है।

गत 23 अप्रैल को कमलेश प्रजापत एनकाउंटर पर लगातार उठ रहे सवालों और भारी विवाद के बाद राजस्थान सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कमलेश एनकाउंटर की जांच सीबीआई को देने की मंजूरी दी थी। इसके बाद गृह विभाग ने सीबीआई जांच की सिफारिशी चिट्ठी और पूरे केस के दस्तावेज केंद्र सरकार को भेज दिए थे।

23 अप्रैल को कमलेश की मौत के बाद CCTV में शव को उठाकर ले जाते नजर आए थे पुलिसकर्मी
23 अप्रैल को कमलेश की मौत के बाद CCTV में शव को उठाकर ले जाते नजर आए थे पुलिसकर्मी

भास्कर ने सबसे पहले उठाया था मुद्दा
कमलेश प्रजापत के एनकाउंटर के मुद्दे में उठ रहे सवालों को सबसे पहले भास्कर ही सामने लाया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाने से लेकर एनकाउंटर के तरीके, एनकाउंटर के चार घंटे तक स्वतंत्र व्यक्ति को कमलेश के घर पर नहीं बुलाने से लेकर घटना के हर पहलू का विवेचन किया था। भास्कर के इस मामले का खुलासा करने के बाद विपक्षी पार्टियों ने इस एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की थी।

एक भी गोली उसके भागते वक्त पैर पर नहीं लगी

तस्कर कमलेश प्रजापत के 22 अप्रैल की रात को हुए पुलिस एनकाउंटर पर विवाद लगातार गहराता जा रहा था। एनकाउंटर से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद एनकाउंटर सवालों के घेरे में आया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक कमलेश को 4 गोली लगी थी। चारों गोली लेफ्ट साइड से लगी थी। एक भी गोली पांव पर नहीं लगी है। चारों गोली कमर और कमर से ऊपर लगी है। पुलिस की बताई कहानी की पोल पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दी।

इन सवालों का जवाब मिलना बाकी है

पुलिस की एफ़आईआर में कमलेश की गाड़ी का विंड शीट टूटा हुआ बताया गया, जबकि वायरल सीसीटीवी में पुलिसकर्मी डंडे से गाड़ी की विंडशीट तोड़ते हुए दिख रहे हैं। सवाल यह है कि पुलिस ने डंडे से विंड शीट क्यों तोड़ी? पुलिस को कमलेश पर 4 राउंड फायर करने की क्या जरूरत पड़ी, जबकि उसकी गाड़ी में कोई हथियार नहीं मिला था।

23 अप्रैल की रात एनकाउंटर के बाद एसपी ने यह बताई थी कहानी

पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने प्रेस काॅफ्रेंस में बताया था कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि शिवकर रोड सेंट पॉल स्कूल के पास कमलेश प्रजापत एक मकान में मौजूद है। इसके बाद कोतवाली, सदर, ग्रामीण थानों की पुलिस, कमांडो और स्पेशल टीम ने मकान को चारों तरफ घेर लिया। मकान के मुख्य द्वार पर पुलिस ने गेट खुलवाने की कोशिश की।

तस्कर कमलेश ने खिड़की से कूदकर पीछे गैराज में खड़ी एसयूवी से 400 किलो के भारी भरकम गेट को तोड़ा तथा गैराज के बाहर खड़े पुलिस हेड कांस्टेबल मेहाराम और अन्य कांस्टेबल को गाडी से कुचलने का प्रयास किया। पुलिस के कमांडो दिनेश ने आत्मरक्षा में तीन फायर किए। इससे तस्कर कमलेश की गोली लगने से उसकी मौत हो गई। इसके बाद एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य एकत्रित कर लिए।

कमलेश के घर से जब्त की गई थी 11 लक्जरी गाड़ियां
कमलेश के घर से जब्त की गई थी 11 लक्जरी गाड़ियां

रातभर चला सर्च ऑपरेशन, 56 लाख से ज्यादा नकद और 11 गाड़ियां मिली थी

एसपी के मुताबिक एनकाउंटर के बाद पुलिस द्वारा रातभर मकान में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सर्च ऑपरेशन में 59 लाख 69 हजार 50 रुपए, लग्जरी वाहनों सहित 11 वाहन (अलग-अलग कम्पनी के), 5 अवैध पिस्टल, 9 मैगजीन, 121 कारतूस, 2 किलो 360 ग्राम अफीम का दूध, 1 किलो 715 ग्राम डोडा-पोस्ट, 13 मोबाइल फोन व 4 डोगल, एक एटीएम पुलिस ने जब्त किए हैं।

कमलेश का आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस के अनुसार, कमलेश प्रजापत आला दर्जे का बदमाश था। मादक पदार्थ व हथियार तस्करी में लिप्त था। थाना नागाणा बाड़मेर का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ बाड़मेर जिले में 7 आपराधिक मामले दर्ज हैं एवं पुलिस थाना साडेंराव जिला पाली में 1 प्रकरण दर्ज है। कुल 8 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। एसपी आनंद शर्मा ने बताया था कि मानव अधिकार आयोग की गाइडलाइन का पालन करते हुए मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम करवाया गया।

कई बार पुलिस पर फायरिंग कर चुका था कमलेश

जानकारी के अनुसार 2 माह पूर्व पाली जिले के सांडेराव थाना अधिकारी पर नाकाबंदी के दौरान हमला किया था। हमले में थानाधिकारी को चोटें आई थीं। उसके बाद पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी। कुछ दिनों पहले भीलवाड़ा में तस्करों द्वारा फायरिंग करने पर 2 पुलिस जवानों की जान चली गई थी। उसको ध्यान रखते हुए पुलिस ने सावधानी रखी और कमांडो और पुलिस ने हथियारों के साथ घेराबंदी की थी। तस्कर कमलेश पुलिस पर कई बार फायरिंग कर चुका था।

ये पुलिसकर्मी थे टीम में शामिल

कमलेश प्रजापत के कथित एनकाउंटर में एससी-एसटी सेल उपाधीक्षक पुष्पेन्द्र आढ़ा के नेतृत्व में ग्रामीण थानाधिकारी परबत सिंह मय जाप्ता, कोतवाली थानाधिकारी प्रेमप्रकाश मय जाप्ता, सदर थानाधिकारी रामनिवास विश्नोई, हेड कांस्टेबल मेहाराम मय जाप्ता, जिला स्पेशल टीम प्रभारी महिपाल सिंह मय जाप्ता, पुलिस नियंत्रण कक्ष बाड़मेर रिजर्व अधीक्षक शामिल रहे।

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