पति की मौत, लेकिन वर्दी आज भी दीवार पर:खुद अनपढ़, पति की इच्छा पूरी करने के लिए बेटी को MBBS की पढ़ाई करा रहीं

जयपुर7 महीने पहलेलेखक: करिश्मा वर्मा

आज सुहागिनों का पर्व करवा चौथ मनाया जा रहा है। कुछ महिलांए ऐसी भी हैं, जिन्होंने कोरोना काल में अपने हमसफर को खो दिया। हम बात कर रहे हैं कोरोना की जंग में शहीद हुए कोरोना वारियर की पत्नियों की, जिन्हें पतियों के बलिदान पर गर्व है। आज भास्कर आपको तीन ऐसी ही महिलाओं के बारे में बताएंगा। इन्होंने भले ही अपने पति को खो दिया हो, लेकिन आज भी उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके पति ने अपने फर्ज से बढ़कर कुछ जरूरी नहीं समझा।

पहली कहानी
कमला देवी कोरोना में अपनी जान गंवा चुके भंवर लाल चौधरी की पत्नी है। जयपुर से कुछ किलोमीटर दूर श्री रामपूरा गांव के निवासी भंवर लाल चौधरी जयपुर में DSP ईस्ट के गनमैन के पद पर कार्यरत थे। 20 साल अपने फर्ज को निभाते हुए हर तरह की परिस्थिति से लड़ कर जीत गए, लेकिन कोरोना की जंग हार गए। कोरोना की दूसरी लहर का शिकार हुए भंवर लाल चौधरी की पत्नी कमला देवी का कहना है कि उनके पति हमेशा घर परिवार में समय देते थे।

उससे कहीं ज्यादा पुलिस डिपार्टमेंट में ड्यूटी करते थे। ऐसा कोई दिन नहीं होगा जब उन्होंने अपने फर्ज से समझौता किया। आज भी पति की वर्दी दीवार पर टांगकर रखती हैं, क्योंकि उन्हें अपने पति पर गर्व है। दीवार पर टंगी उनकी वर्दी पति की कमी का एहसास नहीं होने देती।

कमला देवी कोरोना में अपनी जान गंवा चुके भंवर लाल चौधरी की पत्नी।
कमला देवी कोरोना में अपनी जान गंवा चुके भंवर लाल चौधरी की पत्नी।

कमला देवी ने बताया कि जब वे कोरोना से संक्रमित हुए तब उन्हें शुरुआत में लक्षणों का पता नहीं चल पाया बीमार होते हुए भी वे हमेशा ड्यूटी पर रहते थे। अपना फर्ज निभाते थे। कोई तीज त्योहार हो या फिर करवा चौथ वे हमेशा ऑन ड्यूटी रहते थे। अपना फर्ज निभाते थे। वे हमारे साथ नहीं हँ, लेकिन उनकी यादें और उनकी बातें हमेशा मुझे प्रोत्साहित करती हैं। साथ ही उन्होंने जो त्याग किया है उस पर गर्व महसूस होता है। कमला देवी ने बताया कि उनके पति का सपना ता कि बेटी MBBS बने। अब उनकी अधूरी ख्वाहिश पूरी कर रही है। वे खुद अनपढ़ है, लेकिन बेटी MBBS करा रही हैं। हर जगह बेटी के साथ जाती हैं। परिवार का पूरा ख्याल रखती हैं।

दीवार पर लटकी भंवर लाल चौधरी की वर्दी।
दीवार पर लटकी भंवर लाल चौधरी की वर्दी।

भंवर लाल चौधरी के बेटे अमित का कहना है कि भले ही आज वे पिता की जगह पुलिस डिपार्टमेंट में नौकरी कर रहा हो, लेकिन उनकी कमी हर पल सताती है। जब पिता की वर्दी पहन वे ड्यूटी पर जाते हैं तो लगता है कि मेरे पिता साथ ही है।

अनीता सैनी पति रामकिशन सैनी के साथ।
अनीता सैनी पति रामकिशन सैनी के साथ।

दूसरी कहानी
कांवटियां हॉस्पिटल के नॉर्सिंग स्टाफ में कार्यरत अनीता सैनी के पति ने कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करते हुए अपनी जान गंवा दी। शहर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में मेडिकल सुप्रिडेंट के पद पर काम करने वाले रामकिशन सैनी ने कोरोना की पहली लहर में अपने फर्ज को निभाते हुए कोरोना सक्रमित मरीजों का इलाज किया। रामकिशन जब संक्रमित हुए तब उपचार में बरती लापरवाही के कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। रामकिशन की पत्नी अनीता का कहना है की मैं और मेरे पति दोनों ही मेडिकल डिपार्टमेंट में है।

हमारे लिए परिवार और घर से पहले मरीज की सेवा करना पहला धर्म है। मेरे पति ने ये धर्म पूरी निष्ठा के साथ निभाया। जब भी करवा चौथ आता था एक दूसरे के साथ समय बिताते थे, साथ घूमने जाते थे। वे हमेशा मुझे गिफ्ट देते थे, लेकिन वे अब मेरे साथ नहीं हैं। उन्होंने जो सेवा की है और अपने फर्ज के प्रति जो ईमानदारी निभाई है उसे भी मैं अपनी जिंदगी भर के करवा चौथ का गिफ्ट मानती हूं। प्राउड फील करती हूं।

पति हेरल्ड जोसफ और गीता मैथ्यू।
पति हेरल्ड जोसफ और गीता मैथ्यू।

तीसरी कहानी
तीसरी कहानी जयपुर के SMS हॉस्पिटल गेस्टोसर्जरी इंचार्ज के पद पर काम करने वाली गीता मैथ्यू की है। जिनके पति हेरल्ड जोसफ भी SMS हॉस्पिटल में ऑर्थो ओटी इंचार्ज रहे। गीता का कहना है की कोरोना शुरू हुआ तो SMS हॉस्पिटल के हालात बहुत खराब थे। वहां लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही थी, लेकिन मेरे पति ने ऐसे समय में भी 12 घंटे लगातार काम किया। कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा की करवा चौथ है। ईसाई धर्म में करवा चौथ नहीं मनाया जाता, लेकिन वे इस दिन को भी ख़ास मानते थे। अगर कोई स्टाफ में छुट्टी पर होता तो ज्यादा काम करते थे। वहीं मुझे किचन के कामों में हेल्प करते थे।

मेरी पसंद-नापसंद का ख्याल रखते थे। हेरल्ड के लिए किसी भी फेस्टिवल से ज्यादा जरूरी था, लोगों की मदद करना। वे हमेशा हॉस्पिटल में ड्यूटी पर रहते थे। यही नहीं कोरोना काल में वे कॉलोनी के लोगों और पड़ोसियों का फ्री में इलाज करते थे। लोगों को सेवा करते-करते वे कब खुद संक्रमित हो गए, उन्हें नहीं पता चला। उनके त्याग के आगे कोरोना जीत गया। आज वो साथ नहीं है, लेकिन मैं आज जब भी हॉस्पिटल जाती हूं। गर्व से सर ऊंचा हो जाता है क्योंकि उन्होंने जो किया वो बहुत कम लोग करते हैं। हेरल्ड जैसे पति मेरे हम सफर रहे ये मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।