बंधन में बाघ:तीनों बाघों को कैद में रखकर हर साल खिला रहे 8-9 लाख का ‘फास्ट फूड’

जयपुर20 दिन पहले
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बाघ, फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
बाघ, फाइल फोटो।
  • तीनों टाइगर रिजर्व में बाड़े में कर रखा है बंद
  • सांसद दीया कुमारी ने मुख्यमंत्री-एनटीसीए से कार्रवाई करने को कहा

प्रदेश के तीनों टाइगर रिजर्व के बाड़ों में कैद बाघों की सेहत खराब करने के लिए ‘फास्ट फूड’ पर जिंदा रखना पड़ रहा है। छोटे एनक्लोजर में उनका प्राकृतिक भोजन (प्रेबेस यानी सांभर-चीतल आदि) उपलब्ध नहीं है, ऐसे में उनके लिए कैटल (पाड़े) छोड़े जा रहे हैं। पांच से आठ दिन के भीतर कैटल के एक रिजर्व का सालाना खर्च करीब 3 लाख तक पहुंच रहा है। जबकि इसके लिए न तो वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 इजाजत देता है और न ही नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए)। केवल निर्णय नहीं ले पाने के चक्कर में बाघों की सेहत बिगड़ रही है। वो न मर्जी से अपने एरिया में घूम सकते हैं और न ही पसंद का शिकार और मैटिंग-ब्रिडिंग कर पा रहे हैं।

ये हैं संभावनाएं
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में कैद बाघिन ‘लाइटनिंग’ से पूरे मुकंदरा को आबाद करने में बड़े भूमिका हो सकती है। इसने पहले रणथंभौर और फिर मुकंदरा में शावक जन्मे थे। अभी भी 8 साल की प्रोडक्टिव बाघिन मुकंदरा के लिए वरदान साबित हो सकती है। लेकिन विभाग-सरकार स्तर पर इस ओर फैसला नहीं लिया जा रहा। इसी तरह रणथंभौर में कैद बाघ को भी रिजर्व आदि में छोड़ने का निर्णय लिया जा चुका है, जिस पर कोई अमल नहीं कर रहा। अगर मुकंदरा बाघिन को बाहर रिलीज कर रणथंभौर वाले बाघ को यहां एनक्लोजर में शिफ्ट करें तो मैटिंग-ब्रिडिंग की संभावनाएं हैं।

वनमंत्री व एनटीसीए कार्रवाई करें
सांसद और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की सदस्य दीया कुमारी ने कैद राष्ट्रीय पशु बाघों के हालात प्रशासन की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया है। उन्होंने मामले में मुख्यमंत्री और वनमंत्री को उचित कार्रवाई की मांग की है, साथ ही एनटीसीए को भी इस संबंध में कार्रवाई को कहा है।

मुकंदरा की बाघिन को बाहर रिलीज करना है। इस पर एकाध दिन में एनटीसीए की टीम आकर फैसला लेगी। इसके बाद रणथंभौर वाले बाघ को मुकंदरा के एनक्लोजर में रखेंगे, ताकि दोनों को प्रोडक्टिव के लिहाज से चांस ले सकें। सरिस्का के मसले पर बाघ की उम्र काफी हो गई है। फिर भी बाहर जंगल, बाघ-शावकों और इंसानी सुरक्षा को देख जल्द निर्णय लेंगे। -अरिंदम तोमर, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन

तीनों प्रकरणों में वन्यजीव व बाघ संरक्षण के नियम-सिद्धांत के अनुरूप शीघ्र निर्णय होगा।-डॉ. डीएन पांडेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक

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