आदिवासी पॉलिटिक्स:गुजरात में तीर निशाने पर बैठा तो राजस्थान में बीटीपी के साथ कमान संभालेंगे केजरीवाल

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: मनोज शर्मा
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वागड़ यानी आदिवासी वोटों पर कांग्रेस और भाजपा के साथ अब बीटीपी के सहयोग से आम आदमी पार्टी भी नजरें गड़ा रही है। - Dainik Bhaskar
वागड़ यानी आदिवासी वोटों पर कांग्रेस और भाजपा के साथ अब बीटीपी के सहयोग से आम आदमी पार्टी भी नजरें गड़ा रही है।

वागड़ यानी आदिवासी वोटों पर कांग्रेस और भाजपा के साथ अब बीटीपी के सहयोग से आम आदमी पार्टी भी नजरें गड़ा रही है। कांग्रेस चिंतन शिविर के ठीक बाद वहां बड़ी सभा करने वाली है और भाजपा भी आरएसएस के माध्यम से जमीनी स्तर पर काम कर रही है।

आने वाले चुनाव में यहां अलग ही तरह का घमासान देखने को मिल सकता है। दरअसल, नौ साल पहले यानी 2012 में जन्मी आम आदमी पार्टी 2 राज्यों में सत्तासीन हो चुकी है। अब उसकी नजर हिमाचल, गुजरात और फिर अगले साल राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव पर टिकी है।

पार्टी ने गुजरात में पांच साल पहले राजनीति में उतरने वाली नई पार्टी बीटीपी से गठबंधन की घोषणा कर दी है। तय है कि राजस्थान में भी पार्टी गठबंधन पर आगे बढ़ेगी। अगर बीटीपी और आप का परफॉरमेंस गुजरात में अच्छा रहता है। खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में तो 2023 में राजस्थान में भी दोनों पार्टियां एक साथ मैदान में उतरेगी।

यह दोनों ही प्रमुख पार्टियों के लिए चिंताजनक जरूर रहेगा क्योंकि गत विधानसभा चुनाव में बीटीपी ने 6 जिलों की 11 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। इसमें 2 सीटें पार्टी ने अच्छे मार्जिन से जीती और एक सीट पर वह मामूली अंतर से हारी। हालांकि 8 जगह पर पार्टी प्रत्याशी अपनी जमानत बचा नहीं सके। पार्टी को कुल 2,55,100 वोट मिले, जो कुल मतदान का महज .72 प्रतिशत रहा। यह पार्टी का पहला चुनाव था।

6 जिलों की 11 सीटों पर बीटीपी की स्थिति, 2 जीती, 1 पर नजदीकी हार
डूंगरपुर : 4 में से 2 सीटें जीती। चौरासी में 64119 एवं सागवाड़ा 58406 वोट मिले। आसपुर में 51732 वोट लेकर पार्टी प्रत्याशी पांच हजार वोटों के अंतर से हारे। वहीं डूंगरपुर में पार्टी प्रत्याशी 13004 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे।
बांसवाड़ा : बागीडौरा में 9538, गढ़ी में 23093, घाटोल में 4660 वोट मिले। बांसवाड़ा एवं कुशलगढ़ में पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारे।
उदयपुर : खैरवाड़ा से पार्टी प्रत्याशी ने 20383 वोट हासिल किए। पार्टी तीसरे नंबर पर रही। जमानत नहीं बची।
प्रतापगढ़ : धरियावद में 4406 वोट मिले और जमानत जब्त होने के बावजूद प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे। प्रतापगढ़ से पार्टी ने प्रत्याशी ही नहीं उतारा।
राजसमंद : कुंभलगढ़ सीट से प्रत्याशी को सिर्फ 622 वोट मिले
सिरोही : पिंडवाड़ा आबू सीट से प्रत्याशी ने 5137 वोट हासिल किए।

4 साल पुराना बीटीपी का इतिहास
गुजरात में छोटू भाई बसवा ने 2017 में बीटीपी का गठन किया था। इससे पहले बसवा जेडीयू के नीतीश कुमार से भी जुड़े थे। माना जाता है कि राजस्थान के साथ गुजरात, एमपी एवं महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में बीटीपी का प्रभाव है। प्रमुख मांग या मुद्दा भील प्रदेश की मांग और आदिवासी क्षेत्र में वन अधिकार मान्यता कानून एवं पेसा कानून पूरी तरह से लागू करवाना है। संविधान की 5वीं अनुसूची के अनुसार अधिकारों की मांग भी शामिल है।

यह क्या डर था : जब जिला परिषद के चुनावों में कांग्रेस-भाजपा ने हाथ मिलाया
डूंगरपुर में जिले की 4 में से 2 सीटें बीटीपी ने जीती। दिसंबर, 2020 में जिला परिषद के चुनाव में 27 में से भाजपा को 8, कांग्रेस को 6 और बीटीपी समर्थित निर्दलीयों को 13 सीटें मिली। जीत बीटीपी की तय थी, लेकिन कांग्रेस-भाजपा ने हाथ मिलाया। भाजपा की निर्वाचित पार्षद से निर्दलीय फार्म भरवाया और कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतार कर समर्थन किया। यानी भाजपा समर्थित सूर्या अहारी वहां जिला प्रमुख चुन ली गई।