संतूर के लिए शादी करने से कर दिया था मना:लड़के वालों को कहा था- पति-ससुराल छोड़ सकती हूं, लेकिन संतूर नहीं

जयपुर2 महीने पहले

मशहूर संतूर वादक डॉ. वर्षा अग्रवाल बुधवार को जयपुर पहुंची। यहां उन्होंने राजस्थान फोरम के डेजर्ट स्टॉर्म सीरीज में हिस्सा लिया। मूल रूप से झालावाड़ की रहने वाली वर्षा ने बताया कि वो उज्जैन में रहकर संगीत की साधना कर रही हैं। जयपुर में बातचीत के दौरान डॉक्टर वर्षा अग्रवाल ने अश्विनी.एम. दलवीर के साथ अपनी लाइफ की जर्नी शेयर की। उन्होंने बताया कि जब 17 साल की थीं तो शादी के लिए पहला रिश्ता आया। लड़के वालों ने शर्त रखी कि शादी के बाद संतूर छोड़ना पड़ेगा। वर्षा ने जवाब दिया पति और ससुराल छोड़ सकती हूं, लेकिन संतूर नहीं।

वर्षा ने बताया- दादा कल्याणमल को संगीत से बहुत प्रेम था, पर वो डॉक्टर बने। उन्होंने सोचा की अपने बेटे को संगीत सिखाउंगा, लेकिन वो सपना भी पूरा नहीं हुआ। फिर एक दिन दादाजी ने मुझसे पूछा कि संगीत सीखना चाहोगी तो मैंने हां कर दी। दादाजी रोज संगीत सुनाने ले जाते थे। संतूर सुंनर मुझे भी सीखने की धुन लग गई। फिर समस्या खड़ी हो गई। दरअसल, संतूर कश्मीर के सुफियाना घराने से है, वहां अकेले जाकर सीखना कैसे संभव होगा? उन्होंने जानकारी जुटाई तो इलाही बख्श के बारे में पता चला। जो उनके पहले गुरू रहे।

संतूर को मान लिया अपना पति आज तक नहीं की है शादी
संतूर को मान लिया अपना पति आज तक नहीं की है शादी

वर्षा ने कहा उन्हें संतूर में महारत हासिल करने के लिए उज्जैन के गुरू ललित महंत से सीखना था। उनसे पूछ तो उन्होंने महिला मना कर दिया। उन्होंने कहा- तुम शादी करके संतूर वादन को भुला दोगी। सब छोड़ दोगी। आखिर वर्षा ने महंत को पत्र लिखा संतूर ही मेरे माता-पिता और पति हैं। अगर आपने नहीं सिखाया तो मैं कुछ भी कर लूंगी। खत मिलने के बाद महंत ने वर्षा की लगन को देखते हुए ट्रेनिंग दी। 30 साल गुरुकुल में ही म्यूजिक में पीएचडी किया। डॉ. वर्षा ने पढ़ाई जारी रखते हुए 1988 में उज्जैन में अपने गुरुकुल में ही आकर बस गईं।

म्यूजिक में पीएचडी करने वाली वर्षा 1992 में सहायक प्राध्यापक पद के लिए पीएससी में चुनी गईं। उनकी नियुक्ति उज्जैन में ही हुई। वर्तमान में वह जीडीसी में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में काम कर रही हैं।

हाल ही में भारत सरकार ने उन्हें देश की चुनिंदा 112 फर्स्ट लेडी में शामिल किया। वर्षा अब लंदन, सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और यूएस की 40 शिष्याओं को इंटरनेट और वीडियो कॉलिंग के जरिए निशुल्क संतूर वादन सिखाती हैं।
हाल ही में भारत सरकार ने उन्हें देश की चुनिंदा 112 फर्स्ट लेडी में शामिल किया। वर्षा अब लंदन, सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और यूएस की 40 शिष्याओं को इंटरनेट और वीडियो कॉलिंग के जरिए निशुल्क संतूर वादन सिखाती हैं।

डॉक्टर वर्षा अग्रवाल को सिर्फ संतूर ही नहीं तबला और सिंगिंग की भी अच्छी जानकारी है। संतूर वादन के बारे में जानकारी देते हुए वर्षा ने बताया- ये 100 तार की वीणा है। पहले इसमें 18 ब्रिज हुआ करते थे। परंतु इनके गुरु पंडित भजन सोपोरी ने इसे नया रूप देते हुए 48 ब्रिज का बनाया। तुम्बी भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि तुम्बी बजाते हुए ऐसा महसूस होता है कि जैसे आप योग साधना कर रहे हैं। इनके घराने में तीन कलम का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि हमारे घराने के संतूर वादन में गमक का प्रयोग होता है। जो आम संतूर वादन में नहीं होता।

एक किस्सा शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि इजराइल में प्रोग्राम था। ड्राइवर को नींद आ गई। वह समय से एयरपोर्ट पर लेने नहीं आ पाए। बहुत घबराहट हुई। जब हम प्रोग्राम स्थल पर पहुंचे तो वहां इतनी सारी महिलाएं थीं कि देखकर मैं सारी मुसीबत भूल गई। उस दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और इस प्रोग्राम की तीन बार प्रस्तुति दी गई।

एक शिक्षक के तौर पर उन्होंने कहा- रिटायरमेंट की उम्र कम कर देनी चाहिए। ताकि नए कलाकार के लिए जगह खाली हो। बातचीत के दौरान डॉक्टर वर्षा अग्रवाल और अश्विनी.एम. दलवीर ने बड़े-बड़े कलाकारों की साधना के अनोखे किस्से साझा किए। इन्होंने कोविड-काल में खो चुके कलाकारों को श्रद्धांजलि देते हुए अपना दुख प्रकट किया।

डॉ. वर्षा अग्रवाल का परिचय वर्षा अग्रवाल का राजस्थान के झालावाड़ में जन्म हुआ। उज्जैन को अपनी कर्मस्थली बताने वाली डॉ.वर्षा अग्रवाल ने संतूर वादिका बनने के लिए शादी नहीं की। उन्होंने सात साल की उम्र में संतूर सीखना शुरू किया। जब 17 साल की थीं तो शादी के लिए पहला रिश्ता आया। लड़के वालों ने शर्त रखी कि शादी के बाद संतूर छोड़ना पड़ेगा। वर्षा ने जवाब दिया पति और ससुराल छोड़ सकती हूं, लेकिन संतूर नहीं। इसके बाद कई रिश्ते आए लेकिन शादी नहीं की।

हाल ही में भारत सरकार ने उन्हें देश की चुनिंदा 112 फर्स्ट लेडी में शामिल किया। वर्षा अब लंदन, सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और यूएस की 40 शिष्याओं को इंटरनेट और वीडियो कॉलिंग के जरिए निशुल्क संतूर वादन सिखाती हैं। हाल ही में डॉ.वर्षा का चयन अगरतला में होने वाले ऑल इंडिया रेडियो के अखिल भारतीय रेडियो संगीत सम्मेलन में संतूर वादन के लिए हुआ है।

26 साल की उम्र में मॉरीशस और साउथ अफ्रीका में पहली अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति देने गईं। अब तक यूएस, यूके, स्विट्जरलैंड, लंदन, दुबई, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर सहित 56 देशों में प्रस्तुति दे चुकी हैं। जनवरी 2018 में उन्हें भारत सरकार द्वारा संतूर वादन के क्षेत्र में फर्स्ट लेडी के रूप में चुना, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ख्याति प्राप्त की है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें फर्स्ट लेडी का पुरस्कार दिया।

खबरें और भी हैं...