सिस्टम पर बिजली गिरी:बत्ती गुल, मीटर चालू ; सूरतगढ़ की 5 यूनिट बंद कीं, रोज 800 मेगावाट की बिजली पड़ रही कम

जयपुर11 दिन पहलेलेखक: डीडी वैष्णव
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रबी की बुवाई शुरू होते ही राजस्थान में बिजली संकट खड़ा हो गया है। - Dainik Bhaskar
रबी की बुवाई शुरू होते ही राजस्थान में बिजली संकट खड़ा हो गया है।

रबी की बुवाई शुरू होते ही राजस्थान में बिजली संकट खड़ा हो गया है। जरूरत की तुलना में रोज 800 मेगावाट बिजली कम पड़ रही है। कारण है बिजली वितरण कंपनियों की अदूरदर्शिता। कंपनियों ने सस्ती बिजली के फेर में सूरतगढ़ थर्मल की 5 यूनिट बंद करा दी, जहां से 4.50 से 5 रुपए यूनिट के भाव बिजली मिल रही थी। फिर 125 लाख यूनिट (800 मेगावाट) अतिरिक्त बिजली खरीदने के लिए मार्केट में बिड लगाई।

लेकिन अब 6.50 रुपए यूनिट से कम के टेंडर नहीं आ रहे। इस रेट पर बिजली खरीदनी पड़ी तो रोज 2.5 करोड़ का घाटा होगा। हालांकि बिड दो बार निरस्त हो चुकी है। अब तीसरी बार खुलनी है। डिस्कॉम चेयरमैन व ऊर्जा विकास निगम के एमडी भास्कर ए सावंत का कहना है कि रबी की बुवाई शुरू होने के कारण 800 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की जरूरत रहेगी।

इसके लिए तीसरी बार बिड खोलने की तैयारी है। बता दें कि पिछले साल दिसंबर से फरवरी तक 700 मेगावाट बिजली खरीदी थी, जिसकी रेट 3.75 से 4 रुपए प्रति यूनिट थी। बिजली कंपनियां इस बार भी इसी रेट पर खरीद के चक्कर में थीं।

राजस्थान में रबी की बुवाई के लिए 800 मेगावाट बिजली एक्स्ट्रा चाहिए; 2 बिड निरस्त, हर साल होती है खरीद फिर भी ऐसी लापरवाही... क्यों?

जानिए बिजली का पूरा गणित
बिजली की मांग :
13,500 मेगावॉट पीक में
उपलब्धता : 10,500 मेगावाट
कमी : करीब 1800 मेगावाट
पूर्ति कैसे : पंजाब से 410 मेगावाट मिलेगी जो पिछले साल दी थी। यूपी से 800 मेगावाट लेंगे जो मई से जून 2022 तक वापस देंगे। सीजीपीएल से 380 मेगावाट खरीदेंगे, रेट 5.40 रुपए प्रति यूनिट।
समस्या : फिर भी 800 मेगावाट कम, जिसके लिए बिड लगाई, लेकिन रेट 6.50 रुपए आ रही।

इधर... छत्तीसगढ़ में 15 साल का कोयला 5 वर्ष में निकाला
छत्तीसगढ़ में कोयला मंत्रालय ने राजस्थान को तीन माइंस आवंटित की। इसमें से एक में ही कोयला मिल पा रहा हैं। दो माइंस में काम शुरू नहीं हो सका है। एक माइंस से राजस्थान ने 15 साल की लीज का कोयला पांच से छह साल में ही निकाल लिया। अब दूसरे फेज के लिए मामला प्रक्रिया में अटका हैं। ये कोयला मिल जाता है तो राजस्थान के प्लांट बंद नहीं होंगे और सस्ती बिजली मिलेगी।

पारसा ईस्ट एंड कांता बेसिन (पीएकेबी) : वार्षिक क्षमता 1.5 करोड़ मीट्रिक टन, रोजाना 14 रैक मिल रहा। दूसरे फेज में माइनिंग के लिए केंद्र सरकार के पास मामला लंबित।

काइंटे एक्सटेंशन : सालाना क्षमता 70 लाख मीट्रिक टन। यहां माइनिंग शुरू नहीं हुई हैं। इसके लिए जनसुवाई नहीं हो सकी हैं। इसके बाद ही माइनिंग की अनुमति मिलेगी।

पारसा : सालाना क्षमता 50 लाख मीट्रिक टन। एनवारमेंटल क्लीयरेंस के लिए प्रोसेस। छत्तीसगढ़ सरकार को राजस्थान सरकार कई बार पत्र भेज चुकी।

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