बदलाव पर सवाल:5 साल में 200 करोड़ खर्च कर लाइनें बदलीं, फिर भी दूषित पानी की सप्लाई

जयपुर14 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
शहर के सोडाला क्षेत्र में दूषित पानी पीने से सप्ताहभर में सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं। - Dainik Bhaskar
शहर के सोडाला क्षेत्र में दूषित पानी पीने से सप्ताहभर में सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं।

शहर के सोडाला क्षेत्र में दूषित पानी पीने से सप्ताहभर में सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं। गंदे पानी की सप्लाई को लेकर भास्कर ने पड़ताल की तो जलदाय विभाग के इंजीनियरों के बड़े गड़बड़झाले का खुलासा हुआ है। विभाग के इंजीनियर मानो इंतजार ही करते हैं कि लोग दूषित पानी आने की शिकायतें करें, ताकि वे तत्काल प्रस्ताव बनाकर ठेकेदारों के जरिए पाइपलाइनें बदलवा सकें। इस काम पर वे पिछले 5 साल में 200 करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं। इसके बावजूद नतीजा सिफर है। पाइप लाइनें ‘बदलती’ जा रही हैं...गंदा पानी आता जा रहा है।

अमृत योजना: चारदीवारी में 44 करोड़ खर्च
शहर के चारदीवारी, सोडाला, हसनपुरा, आदर्शनगर, जवाहरनगर, शास्त्रीनगर सहित अन्य कई इलाकों में गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतें आते ही विभाग के इंजीनियर पाइप लाइन बदलने के प्रस्ताव बना लेते हैं। ताकि टेंडर कर ठेकेदार को काम दे सकें। चारदीवारी में दूषित पानी से राहत व पेयजल सप्लाई में सुधार के लिए विभाग की अमृत योजना में अब तक 44 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यह बजट भी कम पड़ गया तो 6 किलोमीटर लंबी लाइन बदलने के लिए 7.35 करोड़ का अतिरिक्त बजट आवंटित करना पड़ा। अमृत योजना में चौकड़ी मोदीखाना, चौकड़ी विश्वेश्वर, चौकड़ी सरद, चौकड़ी रामचंद्र इलाके में 37 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बदली जा रही है।

नक्शा-रूट तय नहीं, जर्जर सीवरेज से मिक्स हो रहा पानी

पाइप लाइनों का न नक्शा तय है और न रूट। ऐसे में ये लाइनें कई जगह जर्जर व पुरानी लाइन सीवरेज चैंबर से होकर गुजर रही हैं। इससे सीवरेज का पानी इन लाइनों में घुलकर आपूर्ति के दौरान घरों तक पहुंचता है।

ये हैं जिम्मेदार

  • मंगतूराम जैन, सहायक अभियंता
  • नैना शर्मा, कनिष्ठ अभियंता

बड़े सवाल : सैंपलिंग और ऑडिट क्यों नहीं

1. जलदाय मंत्री महेश जोशी और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधांश पंत सख्त निर्देश दे चुके हैं, इसके बावजूद ज्यादातर इलाकों में पेयजल सप्लाई के दौरान सैंपलिंग क्यों नहीं हो रही?

2. पाइप लाइन बदलने की जरूरत है या नहीं, उसकी उपयोगिता क्या है, इसे लेकर विभाग ने तकनीकी व फिजिकल ऑडिट क्यों नहीं कराई?

3. जर्जर सीवरेज लाइनों से बचने के लिए पाइप लाइनों का नक्शा और रूट क्यों नहीं तय किया जा रहा?

स्वच्छ पेयजल की सप्लाई हो, इसके लिए सभी एईएन-जेईएन को पाबंद किया है। जहां पाइप लाइन डाली है, उसकी टेक्निकल ऑडिट कराएंगे। - मनीष बेनीवाल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग

खबरें और भी हैं...