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  • Look At The Tehzeeb... From Whom You Took Training; He Always Used To Sit On The Ground In His House, Used To Say I Am A Slave Of This House.

स्मृति शेष:तहजीब देखिए... जिनसे तालीम ली; उनके घर में हमेशा जमीन पर बैठते थे, कहा करते थे- इस घर का गुलाम हूं

जयपुर12 दिन पहले
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फरीद साबरी, सईद साबरी, अमीन साबरी - Dainik Bhaskar
फरीद साबरी, सईद साबरी, अमीन साबरी
  • तीन मनकों की थी साबरी बंधुओं की माला, दूसरा भी टूट गया...

बॉलीवुड में राजस्थान का नाम रोशन करने वाले मशहूर कव्वाल जोड़ी साबरी ब्रदर्स के सर परस्त उस्ताद सईद साबरी का रविवार सुबह कार्डियक अटैक से निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। दो महीने पहले अप्रैल में ही सईद साबरी के बड़े बेटे उस्ताद फरीद साबरी का भी कार्डियक अटैक से ही निधन हुआ था।

रविवार को उन्हें जयपुर के घाटगेट स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया। साबरी बंधुओं में अकेले रह गए उस्ताद अमीन रुंधे गले से कहते हैं- मेरे बड़े भाई फरीद के बाद पिता सईद साहेब भी इतनी जल्दी साथ छोड़कर चले जाएंगे ये कभी सोचा भी नहीं था।

डागर घराने में ली थी तालीम...जब भी वहां जाते थे, तो वहां के बच्चों से सिर पर हाथ रखवाते, कहते थे- यहां का बच्चा-बच्चा इबादत है, दुआ है

डागर परिवार की 20वीं पीढ़ी की बेटी शबाना डागर कहती हैं, उस्ताद सईद साबरी ने मेरे दादा ध्रुवपद गायक इमामुद्दीन खान डागर से बचपन में ही शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू कर दिया था। मैं उस्ताद सईद को हमेशा ‘भाई’ कहकर पुकारती थी। वे अक्सर कहते थे, मैं इस घर का शागिर्द हूं, नाचीज बंदा हूं। मुझे आज भी याद है हमारे घर आने पर हमेशा जमीन पर बैठा करते थे।

हमारे लाख कहने पर भी ऊपर नहीं बैठते थे। कई बार दहलीज पर ही बैठ जाया करते थे। जब कभी घर आते मुझसे और घर के दूसरे बच्चों का हाथ अपने सिर पर रखवाते और कहते इस घर का बच्चा -बच्चा मेरे लिए एक इबादत है दुआ है। मैं इस घर का गुलाम हूं। मेरी जूतियां भी रगड़ जाएं तो मैं इस घर का एहसान नहीं उतार सकता।

हिना, सिर्फ तुम फिल्मों से शोहरत पाई

हिना में ‘देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए’ से शोहरत मिलनी शुरू हुई। फिर ‘परदेस और ‘सिर्फ तुम’ की कव्वाली ‘एक मुलाकात जरूरी है सनम... के जरिए सूफियाना कव्वाली जगत में बुलंदी छुई।

आखिरी रात भी 4 घंटे गाने सिखाए

उस्ताद सईद साबरी के पोते अमीर साबरी बताते हैं कि निधन की आखिरी रात को भी उन्होंने मुझे चार घंटे तक हर दौर के हिसाब से कव्वाली गाने के सलीके सिखाए। कई कलाम भी सिखाए।

कंटेंट : सर्वेश भट्ट और किरन कुमारी किंडाे

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