साल के आखिरी सावे पर शहर में हुईं 1000 शादियां:दो दिन बाद मलमास: एक माह 11 दिन के लिए थमी बारात व शहनाइयां

जयपुरएक महीने पहले
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इस साल के आखिरी सावे पर सोमवार को शहर में 1000 से अधिक और जिले में लगभग 1500 शादियां हुईं। - Dainik Bhaskar
इस साल के आखिरी सावे पर सोमवार को शहर में 1000 से अधिक और जिले में लगभग 1500 शादियां हुईं।

इस साल के आखिरी सावे पर सोमवार को शहर में 1000 से अधिक और जिले में लगभग 1500 शादियां हुईं। इसके साथ ही एक माह के लिए शहनाइयां थम गईं और विवाह स्थलों की रौनक और बैंडबाजों की धुनों पर विश्राम लग गया है। कारण कि सूर्य 16 दिसंबर की अलसुबह 3:44 बजे धनु राशि में प्रवेश कर जाएगा। इससे 16 दिसंबर से मलमास अथवा खरमास शुरू हो जाएगा और शुभ व मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। सूर्य के नए वर्ष में 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मलमास समाप्त होगा। इसके बाद ही शुभ कार्य शुरू हो सकेंगे। हालांकि, विवाह आदि मांगलिक कार्य तो 22 जनवरी से ही प्रारंभ हो सकेंगे।

शुभ मुहूर्त के लिए होती है ग्रह नक्षत्रों की गणना
जब बात विवाह की होती है तो सबसे पहले शुभ मुहूर्त पर विचार किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश मिश्रा ने बताया कि पंचांग व ज्योतिष में किसी भी मांगलिक कार्य खासतौर पर विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष में शुभ मुहूर्त निकालने के लिए ग्रह नक्षत्रों की गणना की जाती है। इसी गणना के आधार पर कुछ समय ऐसा भी होता है, जिसे विवाह आदि के लिए शुभ नहीं माना जाता है। इस समय विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।

सूर्य के घोड़ों ने विश्राम किया, गधों ने रथ खींचा- कहलाया खरमास
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। सूर्यदेव को कहीं भी रुकने की इजाजत नहीं है, लेकिन रथ में जुड़े घोड़े लगातार चलने से थक जाते हैं। घोड़ों की ये हालत देखकर सूर्यदेव का मन द्रवित हो गया और वे घोड़ों को तालाब के किनारे ले गए, लेकिन तभी उन्हें अहसास हुआ कि अगर रथ रुका तो अनर्थ हो जाएगा। तालाब के पास दो खर मौजूद थे।

सूर्यदेव ने घोड़ों को पानी पीने और विश्राम के लिए वहां छोड़ दिया और खर यानी गधों को रथ में जोत लिया। गधों को सूर्यदेव का रथ खींचने में जद्दोजहद करने से रथ की गति हल्की हो गई और जैसे-तैसे सूर्यदेव इस एक मास का चक्र पूरा किया। घोड़ों के विश्राम करने के बाद सूर्य का रथ फिर अपनी गति में लौट आया। इस तरह हर साल यह क्रम चलता रहता है। यही वजह है कि हर साल खरमास लगता है।

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