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वादे पूरे करने के लिए केंद्र की जरूरत:कांग्रेस घोषणा पत्र के कई वादे केंद्र के बिना पूरे नहीं हो सकते, मंत्री बीडी कल्ला बोले- आठ फीसदी वादे केंद्र से संबंधित, हम चिट्‌ठी लिख रहे

जयपुरएक वर्ष पहले
कांग्रेस घोषणा पत्र पर चर्चा करते हुए।

कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वादों को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और अफसर तक लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। कांग्रेस घोषणा पत्र में कई वादे ऐसे भी कर दिए जो केंद्र सरकार से संबंधित हैं। वादों पर केंद्र की सहमति के बाद ही काम हो सकता है। राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर वादे करने पर अब सवाल उठ रहे हैं। हालांकि मंत्री संघीय ढांचे का हवाला देकर इसे सही ठहरा रहे हैं।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में कृषि यंत्रों पर जीएसटी कम करने सहित कई ऐसे वादे हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए केंद्र ही सक्षम है। अब राज्य सरकार इसके लिए केंद्र को पत्र लिख रही है। गहलोत सरकार ने अब तक कांग्रेस घोषणा पत्र में ​किए गए 64 फीसदी वादे पूरे करने और 28 फीसदी वादों पर काम प्रक्रियाधीन होने का दावा किया है। तीन दिन पहले ही कांग्रेस घोषणा पत्र क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने बैठक लेकर रिव्यू किया था। कांग्रेस घोषणा पत्र पर क्रियान्वयन के लिए जलदाय मंत्री बीडी कल्ला की अध्यक्षता में कैबिनेट सब कमेटी बना रखी थी। कैबिनेट सब कमेटी ने भी पूरा रिव्यू किया है।

मंत्री कल्ला बोले-आठ फीसदी बिंदुओं पर काम नहीं हुआ, उनमें से कई भारत सरकार से संबंधित

कैबिनेट सब कमेटी के संयोजक बीडी कल्ला ने कहा, घोषणा पत्र के 28 फीसदी वादे अंडर प्रोग्रेस हैं। उन्हें 5 साल में पूरा करना है। हम उन्हें पांच साल से पहले ही पूरा कर देंगे। केवल आठ फीसदी बिंदु ऐसे हैं जिन पर काम शुरू नहीं हुआ है। कई बिंदु भारत सरकार से संबंधित हैं। जीएसटी की दरों में बदलाव से जुड़े तीन चार बिंदु हैं। उन पर जीएसटी काउंसिल में फैसला होना है, उनके लिए पत्र लिखे हैं। कुछ बिंदु भारत सरकार से संबंधित हैं। उनके बारे में भारत सरकार को पत्र लिखने को लेकर अफसरों को विस्तार से निर्देश दिए गए हैं।

कांग्रेस का घोषणा पत्र नीतिगत दस्तावेज, इसलिए सभी बिंदुओं को 5 साल में पूरा करना जरूरी
कांग्रेस का चुनाव घोषणा पत्र सरकार का नीतिगत दस्तावेज है। दिसंबर 2018 में सत्ता आते ही गहलोत सरकार ने पहली कैबिनेट की बैठक में ही कांग्रेस के घोषणा पत्र को नीतिगत दस्तावेज का दर्जा दिया था। नीतिगत दस्तावेज का दर्जा देने से अब इसमें किए वादों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

केंद्र और राज्य में अलग-अलग पार्टी की सरकार, इसलिए केंद्र से जुड़े वादों में दिक्कत
कांग्रेस के घोषणा पत्र में कई वादे केंद्र से जुड़े हुए हैं। कई वादे केंद्रीय विभागों के सहयोग से पूरे होने वाले हैं। केंद्र और राज्य में अलग-अलग पार्टी की सरकार होने पर ऐसे मामलों में असर पड़ता है। अब यह राज्य सरकार के मंत्रियों और अफसरों के सामने केंद्र से जुड़े मुद्दों को सुलझाकर उन्हें पूरा करवाने की चुनौती है।

घोषणा पत्र के इन वादों के लिए केंद्र को चिट्ठी

  • सभी जिलों में यूथ हॉस्टल बनाने के लिए जमीन आवंटन करने के बाद भारत सरकार को पत्र लिखकर सूचित करने को कहा है।
  • लघु और सीमांत किसानों के पशुधन बीमा के लिए भारत सरकार से फॉलो अप करने की जरूरत, केंद्र को चिट्ठी लिखी गई है।
  • कृषि यंत्रों पर जीएसटी कम करने के लिए केंद्र सरकार को लिखा जाएगा।
  • रेल परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र को लिखी जाएगी, जबकि डूंगरपुर रतलाम रेल प्राजेक्ट और मेमू कोच फैक्ट्री को केंद्र सरकार रद्द कर चुकी है
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