नतीजा शून्य:12 साल में मेट्रो के सेकंड फेज की 3 बार बदली डीपीआर, 73 पन्नों में उलटफेर पर 16 करोड़ रुपए खर्च

जयपुर10 दिन पहलेलेखक: नरेश वशिष्ठ
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रसूखदारों की जमीन की काॅमर्शियल वैल्यू कम नहीं हाे, इसलिए बदली जा रही है डीपीआर - Dainik Bhaskar
रसूखदारों की जमीन की काॅमर्शियल वैल्यू कम नहीं हाे, इसलिए बदली जा रही है डीपीआर

मेट्रो के सेकंड फेज-सीतापुरा से अंबाबाड़ी की डीपीआर 12 साल में तीन बाद बदली जा चुकी है। अब चौथी बार डीपीआर दिल्ली मेट्रो से तैयार की जा रही है। इस पर अब तक सरकार 16 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। भास्कर ने तीन बार बदली डीपीआर की पड़ताल की तो सामने आया कि किसी डीपीआर में मेट्रो काे अंबाबाड़ी से वीकेआई तक ले गए, मेट्रो का रूट यादगार की जगह महारानी कॉलेज से ले जाने का सुझाव दिया। पहली डीपीआर 343 पन्नों की तैयार की गई।

इसके बाद दूसरी डीपीआर में 53 पन्ने जोड़कर इसे 396 पन्नों की कर दी गई। तीसरी बार बनी डीपीआर में 73 पन्ने कम करके 323 पन्नों की भेज दी। किसी डीपीआर में पन्नों में बढ़ोतरी की है तो किसी में घटा गए। इतनी राशि खर्च होने के बाद भी नतीजा शून्य है। हर बार बदली गई डीपीआर में किसी जगह रूट कम कर दिया, किसी जगह रूट काे बदल कर लागत कम की गई। अब चौथी बार डीपीआर बदली जा रही है। इस पर करीब 4 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। शुरुआती डीपीआर में मेट्रो सीतापुरा से अंबाबाड़ी तक जानी थी। इसके बाद दूसरी कंपनी ने इसे बढ़ाकर वीकेआई तक करने का सुझाव दिया। तीसरी ने रूट में फेरबदल करके लागत आधी से भी कम करके मेट्रो को सौंप दी।

बीटू बाइपास चौराहा के आसपास कुछ मंत्रियाें, विधायकों की जमीन
पड़ताल में सामने आया कि बीटू बाइपास चौराहा के आसपास कुछ मंत्रियाें, विधायकों और रसूखदारों की जमीन है। अगर टाेंक राेड से एलिवेटेड मेट्राे बनती है ताे इन की जमीन की काॅमर्शियल वैल्यू खत्म हाे जाती। इस वजह से बार-बार सेकंड फेज की डीपीआर बदली जा रही है। इसमें एक प्रभावशाली मंत्री की भी जमीन शामिल है। मंत्री ने ही 2020 में बनी डीपीआर काे बाेर्ड से मंजूरी मिलने से पहले ही आपत्ति जता कर रूकवा दी थी।

पहली डीपीआर 2011 में, अब 2023 में बनेगी नई DPR

  • पहली डीपीआर 2011: 23 किमी दूरी में सीतापुरा से अंबाबाड़ी के बीच बनने वाली मेट्रो की पहली डीपीआर 2011 में कांग्रेस सरकार में 343 पन्नों की बनी थी। यह दिल्ली मेट्रो ने बनाई थी। इसमें करीब 6 करोड़ खर्च हुए थे। डीपीआर में 20 मेट्रो स्टेशनों सहित एलिवेटेड की सिफारिश की थी। इसमें कुछ मेट्रो स्टेशन अंडरग्राउंड थे।
  • दूसरी डीपीआर 2017: वर्ष 2014 में बीजेपी सरकार ने फ्रांस की इजिस रेल कंपनी को 2011 में बनी डीपीआर को रिवाइज्ड कर लागत कम का टेंडर दिया। इसमें भी छह करोड़ खर्च हुए। कंपनी ने अंबाबाड़ी से आगे वीकेआई रोड-12 तक ले जाने के लिए 396 पन्नाें की डीपीआर साैंपी। कंपनी ने कई रूट सुझाए, लेकिन ज्यादा ट्रैफिक वाला टोंक रोड को बताया। दूरी 23 से 29 किमी कर दी।
  • तीसरी डीपीआर 2020: दिल्ली मेट्रो ने 2020 में 223 पन्नाें की रिवाइज्ड डीपीआर सौंपी। इसमें स्टेशनों की संख्या तो पहले वाली है, लेकिन कोच की संख्या 6 से घटाकर 3 कर दी है। वहीं अंडरग्राउंड स्टेशनों को एलीवेटेड कर दिए। मेट्रो रूट बदल कर अशोक मार्ग से कर दिया गया है। लागत 10 हजार करोड़ से 4600 करोड़ दी गई। डीपीआर 4 कराेड़ खर्च का अनुमान है।

सरकार अब चौथी बार तैयार कराएगी डीपीआर, चार करोड़ रुपए होंगे खर्च
तीन बार बन चुकी डीपीआर सरकार के लिए उपयोगी साबित नहीं हुई। अब फरवरी में बजट में सरकार ने चौथी बार सेकंड फेज की डीपीआर बनाने का ऐलान किया है। वापस से दिल्ली मेट्रो से डीपीआर तैयार कराई जाएगी। इसमें 4 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।