मंत्रिमंडल फेरबदल को लगी ‘बुरी’ नजर, मंत्री दिखवा रहे कुंडली:कई मंत्रियों ने अफसरों के आगे किया सरेंडर, महिला मंत्री के लिए पायलट के संकेत से सियासी समीकरण बदले

जयपुर9 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर पिछले एक साल से चर्चा चल रही है, लेकिन इस चर्चा के साथ की कोई न कोई बुरी नजर लग जाती है। कभी कोरोना की लहर तो कभी कुछ। इस बार सत्ता के मुखिया बीमार हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ऐसे में मंत्री बनने की कतार में बैठे विधायक शुभचिंतकों को कोस रहे हैं। अपनी कुंडली दोबारा चैक करवा रहे हैं? आखिर कौन से ग्रह ने गड़बड़ कर दी? पंजाब और छत्तीसगढ़ के बाद कांग्रेस हाईकमान के राजस्थान में फेरबदल की सियासी हलकों में चर्चा थीं। सरकार के मुखिया के दिल्ली दौरे के कार्यक्रम भी बने और रद्द हो गए। अब उनकी तबीयत खराब होने से मंत्रिमंडल फेरबदल एक बार फिर लंबा खिंचता ही दिख रहा है। आगे छह जिलों के पंचायत चुनाव और विधानसभा उपचुनाव भी हैं। अब सियासी हलकों का भी क्या करें, जितने मुंह उतनी बातें हैं। फिलहाल पूरा प्रदेश मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य लाभ की कामना कर रहा है।

अफसरों को बुलाया नहीं जा रहा, उनके दफ्तरों में पहुंच रहे मंत्री

पावर कॉरिडोर में सरकार के कुछ मंत्रियों का ब्यूरोक्रेट्स के आगे सरेंडर चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। पिछले दिनों ही खबरों में रहने वाले एक तेजतर्रार मंत्री अपने विभाग के प्रमुख सचिव के चेंबर में पहुंच गए। पश्चिमी राजस्थान से आने वाले एक सीधे माने जाने वाले राज्य मंत्री भी अफसरों के चेंबरों में जाते देखे जाते हैं। ब्यूरोक्रेसी के मुखिया के यहां तो मंत्री मिलते ही रहते हैं। आमतौर पर मंत्री अपने विभाग के हर लेवल के अफसरों को मैसेज करके बुलवा सकते हैं, लेकिन नई परंपरा से लोग ‘उल्टी गंगा’ की बातें कर रहे हैं। मंत्री ही अफसरों के दरवाजों पर जा रहे हैं। स्टेटसमेन रहे नेता कह गए हैं कि अफसरों और अरबी घोड़े में समानता है। नौसिखिया घुड़सवार को अरबी घोड़ा जमीन दिखाते देर नहीं करता, वही हालत अनाड़ी मंत्रियों-नेताओं की अफसर करते हैं। यह नियम कई सत्ताधारियों पर लागू होता है। चर्चा ये है कि मंत्रियों ने कई अफसरों को सरेंडर करवा दिया है।

महिला मंत्री के लिए पायलट का संकेत

सचिन पायलट का इस सप्ताह का दौसा-अलवर दौरा सरकार की एकमात्र महिला मंत्री के लिए सियासी मुश्किलों वाला साबित होता दिख रहा है। सचिन पायलट ने दौसा जिले में पंचायतीराज चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के समय अपने संबोधन में ही समर्थकों को इशारा कर दिया कि आगे क्या करना है? पायलट ने भाषण की शुरुआत में वहां मौजूद नेताओं का नाम लेना शुरू किया, महिला मंत्री के वहां नहीं होने के बावजूद पायलट थोड़ा रुके और फिर कहा- अच्छा, वे नहीं हैं यहां, वह हमारे साथ नहीं है। भीड़ ने इस पर खूब तालियां बजाई और कई समर्थकों ने वहीं नारे भी लगा दिए। अब समझदार को इशारा काफी है। पायलट समर्थक पहले से समझे हुए हैं।

ऑफिस की दीवारें पर महिला अफसर के काम का बखान

सरकार में सृजन और कला को देखने वाली महिला आईएएस का खुद की परफॉर्मेंस बताने का अंदाज निराला है। महिला आईएएस के चेंबर की दीवारों पर उनकी वेबीनार की तस्वीरें और सर्टिफिकेट से ही भरी पड़ी हैं। कोरोना काल में वेबीनार से ही सम्मेलन, कॉन्फ्रेंस हुए उन्हें भी दीवारों पर जगह मिली है। अब जब काम किया है तो खुद के चेंबर में तो प्रचार बनता ही है।

सीएम नहीं, सीएम फेस बनना है

बीजेपी जब से राज्य की सत्ता से बाहर हुई है तब से कांग्रेस की तरह खींचतान और सियासी घमासान के हालात बदल नहीं रहे। 2023 में पार्टी सत्ता में कैसे आए, इससे ज्यादा लड़ाई चेहरे की है। पार्टी में सीएम फेस बनने के लिए नेताओं की संख्या का आंकड़ा अब दहाई तक पहुंच गया है। खेमेबंदी के हालात यह है कि बड़े नेताओं के खास समर्थकों के लिए पार्टी में चिलम शब्द का इस्तेमाल होने लगा है, चिलम शब्द चापलूस के समानार्थी के तौर पर प्रयोग किया जाता है। बीजेपी की इस हालत पर एक वरिष्ठ नेता ने टिप्पणी की- यहां तो लड़ाई सीएम की नहीं, सीएम फेस की हो रही है। जब तक 2023 नहीं आता तब तक हर कोई सीएम फेस बन सकता है।

अपने-अपने छाया मंत्रिमंडल

विपक्षी पार्टी वरिष्ठ नेताओं और पुराने मंत्रियों को उनकी महारत वाले विभागों के हिसाब से उन्हें विभाग की सूचनाएं कलेक्ट करने का जिम्मा देकर छाया मंत्रिमंडल बनाती है। इसे शेडो कैबिनेट भी कहा जाता है। इस बार बीजेपी के छाया मंत्रिमंडल की चर्चा नहीं है, इस बार कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों में नेताओं ने अपने-अपने छाया मंत्रिमंडल बना रखे हैं। बीजेपी में सीएम फेस के दावेदार नेताओं ने अपने हिसाब से अभी से छाया मंत्रिमंडल बना लिए हैं, लेकिन कागजों में। सत्ता के नजदीक एक नेता शाम 8 बजे से रोज छाया मंत्रिमंडल बनाते हैं, राज का सुख लेने के आतुर नेताओं का इनके यहां तांता लगता है, लेकिन इनके दर आने वालों का अनुभव यह रहा है कि जहां समुद्र के सपने दिखाते हैं, वहां तलैया तक नहीं मिलता।

मंत्रीजी की छवि सुधारने वाले को विभाग की इमेज बनाने का जिम्मा

सरकार की छवि सुधारने की जिम्मेदारी वाले मंत्री के पास जनता की सेहत सुधारने का भी जिम्मा हो तो दो मोर्चों पर युद्ध करना पड़ता है। सरकार की छवि सुधारने वालों को कोरोना की दो लहर के बाद अचानक याद आया कि सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य महकमे की इमेज सुधारनी है। सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य महकमे की इमेज सुधारने का काम मंत्री की छवि सुधारने वाले को ही दिया गया, पहले जो छवि 29 लाख से बन रही थी अब मंत्रीजी की छवि सुधारने वाले उसके 4.5 करोड़ वसूलेंगे। यह मामला अब जगजाहिर हो चुका है। जानकार कह रहे हैं यह तो केवल छोटी सी बानगी है, अब छवि सुधारने की कला के किस्से दिल्ली तक भी पहुंचे हैं।

सियासी कंजूसी से सब उल्टा- पुलटा

देश के एक बड़े समाजवादी नेता ने सफल राजनेता के लिए तीन चीजें जरूरी बताते हुए कहा था कि नेतागिरी में चर्चा, पर्चा और खर्चा बंद नहीं होना चाहिए, यह जारी रखना चाहिए, जिसने भी इस मूल मंत्र को भुलाया वह सफल नहीं हुआ। राजनीति में कंजूसी करने वालों का हश्र अच्छा नहीं होता। पिछले दिनों सियासी कंजूसी का नजारा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर दिखा। सत्ताधारी पार्टी के विधायक के समर्थकों और एक अति उत्साही कार्यकर्ता ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर जन्माष्टमी, स्वतंत्रता दिवस के साथ मोहर्रम की शुभकामना के पोस्टर भी लगा दिए। अब उन्हें कौन समझाए कि मोहर्रम मातम का पर्व है, मातम की शुभकामनाएं नहीं दी जातीं, लेकिन कंजूसी ने सब उलटा पुलटा कर दिया। गलती सामने आने के बाद अब अति उत्साही समर्थक सकते में हैं।

(राजनीति और ब्यूरोक्रेसी जुड़े रोचक किस्से/कानाफूसी पढ़ें हर शनिवार को)

इलेस्ट्रेशन : संजय डिमरी, जयपुर

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