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  • Most Of The 1500 Ventilators From The Center Are Packed In Cartons; 230 Bad, Even After 10 Months, The State Government Could Not Get Them Fixed, The Need For 1000 More Ventilators

बड़ी लापरवाही:केंद्र से मिले 1500 वेंटिलेटर में से ज्यादातर डिब्बों में पैक; 230 खराब, 10 माह बाद भी राज्य सरकार इन्हें दुरुस्त नहीं करवा पाई, जरूरत- 1000 और वेंटिलेटर्स की

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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  • कोरोना के साथ राजस्थान एक और बीमारी झेल रहा है- केंद्र और प्रदेश सरकार की एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर लोगों को मरता छोड़ देने की बीमारी... इसी की बानगी हैं पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटर

राजस्थान इन दिनों कोरोना के साथ एक और बीमारी झेल रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार की एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर लोगों को मरता छोड़ देने की बीमारी। इसी की बानगी हैं पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटर्स। प्रदेश को केंद्र से मिले 1500 में से ज्यादातर डिब्बाें में ही बंद पड़े हैं। इनमें भी 230 खराब हैं। कोरोना से लगातार मौतों के बावजूद इनकी सालभर से ना तो रिपेयरिंग हुई है, ना ही इन्हें बदला गया।

जोधपुर में तो पीएम केयर फंड के 100 में से एक वेंटिलेटर को चालू नहीं किया गया। इसके अलावा पहले से खरीद कर प्रदेश के अस्पतालों में लगाए गए 164 वेंटिलेटर भी काम नहीं कर रहे। डॉक्टर्स के अनुसार, मरीजों के हिसाब से अभी प्रदेश में एक हजार और वेंटिलेटर्स की जरूरत है।

जोधपुर में 100 में से एक भी चालू नहीं

मौतों के मामले में जयपुर के बाद जोधपुर दूसरे स्थान पर है। यहां के एसएन मेडिकल कॉलेज को पिछले जून में 100 वेंटिलेटर मिले। सभी खराब हैं। इनमें ऑक्सीजन सेंसर काम नहीं करते। 15 मिनट में खुद बंद हो जाते हैं। इसके बावजूद रिपेयरिंग नहीं हुई। कुछ दिनों से 30 वेंटिलेटर एमडीएम में लगाए हैं।

जयपुर: 33 वेंटिलेटर खराब, एसएमएस में 3 महीने तक शुरू ही नहीं किया 50 वेंटिलेटर वाला आईसीयू

जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में आईसीयू बनाकर 50 वेंटिलेटर लगाए। फरवरी से लगे ये वेंटिलेटर एक दिन पहले ही शुरू किए। यहां 18 अन्य वेंटिलेटर 6 माह से खराब हैं। जयपुरिया में एक साल से 7 वेंटिलेटर, कांवटिया में 2, गणगौरी में 6 वेंटिलेटर खराब हैं।

  • ईएसआई को 5 वेंटिलेटर दान में मिले, पर इन्हें शुरू नहीं किया। अब पता चला कि ये खराब हैं। अस्पताल कोविड सेंटर है, इसलिए मैकेनिक वेंटिलेटर सही करने नहीं आ रहा।
  • काेटा : मेडिकल कॉलेज को 138 वेंटिलेटर मिले। 65 या तो इंस्टाल नहीं किए या इनमें कमी बताकर हटा दिए। कंपनी के इंजीनियर कोटा आए। लेकिन ये फंक्शनल नहीं हो सके।
  • उदयपुर : आरएनटी मेडिकल कॉलेज को 95 वेंटिलेटर मिले। ये सालभर स्टोर में रहे। बाद में 22 को ईएसआईसी हॉस्पिटल में इंस्टॉल किया, लेकिन ये बार-बार बंद हो गए। 5 अप्रैल के बाद 32 वेंटिलेटर्स अपडेट किए हैं।
  • अजमेर में 300 और भरतपुर में 60 वेंटिलेटर हैं। ये भी अस्पताल में इंस्टॉल हो चुके हैं। फंक्शनल हैं।
  • बांसवाड़ा में 22 वेंटिलेटर्स में से 5, नागौर में 52 में से 16 वेंटिलेटर ही इंस्टॉल हैं।

वेंटिलेटर इंस्टॉल करने के लिए कंपनी के संपर्क में हैं

हम सभी उपलब्ध और स्थापित वेंटिलेटर का उपयोग कर रहे हैं। केंद्र से मिले कुछ वेंटिलेटर स्थापित नहीं किए गए हैं, इसके लिए हम स्वास्थ्य मंत्रालय और बीईएल (विनिर्माण कंपनी) के संपर्क में हैं। पिछले सप्ताह ही सीएमडी बीईएल को इसके बारे में लिखा है। बीईएल ने इसके लिए 10 व्यक्तियों की एक टीम तैनात की है। -वैभव गालरिया, मेडिकल हेल्थ सक्रेट्री

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