सूचना नहीं दी, अब जुर्माना देना पड़ेगा:अजमेर नगर निगम के आयुक्त ने नोटिस के बावजूद अतिक्रमण की जानकारी नहीं दी, आयोग ने 20 हजार का जुर्माना लगाया

जयपुर9 महीने पहले
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सड़क पर अतिक्रमण की जानकारी लेने के लिए साल 2019 में मांगी थी सूचना, लेकिन आज दिन तक नहीं दी। - Dainik Bhaskar
सड़क पर अतिक्रमण की जानकारी लेने के लिए साल 2019 में मांगी थी सूचना, लेकिन आज दिन तक नहीं दी।

राज्य सूचना आयोग के बार-बार नोटिस देने के बाद भी समय पर सूचना नहीं देना नगर निगम अजमेर के आयुक्त को महंगा पड़ गया। आयोग ने आयुक्त पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए नाराजगी व्यक्त की और निदेशक स्थानीय निकाय को पत्र जारी कर आयोग के निर्देशों की पालना करवाने के लिए कहा है।

राज्य सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने यह निर्देश अजमेर के तरुण अग्रवाल की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। अग्रवाल ने अपनी अपील में कहा कि निगम आयुक्त ने उनके आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं की। अग्रवाल ने बताया कि 12 जून 2019 को नगर निगम आयुक्त के यहां आवेदन कर सड़क पर अतिक्रमण की जानकारी मांगी थी। अग्रवाल के अलावा स्थानीय नागरिक शैलेन्द्र अग्रवाल ने भी इस बाबत सूचना देने का आवेदन किया था, लेकिन आयुक्त ने इसके बाद भी कोई सूचना उपलब्ध नहीं करवाई।

इस मामले में अजमेर में ही आवेदक ने पहली अपील दायर कर सूचना देने की मांग की। 2 अगस्त 2019 में आयुक्त को उक्त सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, लेकिन निगम आयुक्त ने उस अपील पर भी कोई निर्णय नहीं दिया।

सूचना आयोग ने इस पर आयुक्त से जवाब-तलब किया और दो बार जुर्माना लगाने का नोटिस भी भेजा। लेकिन उसके बाद भी वे न तो आयोग में हाजिर हुए और न ही सूचना उपलब्ध करवाई। इस पर सूचना आयुक्त बारेठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए नगर निगम आयुक्त पर 20 हजार रुपए की जुर्माना राशि वेतन से वसूलने का आदेश दिया। साथ ही आयोग ने आयुक्त ने 15 दिन में आवेदक को निशुल्क सूचना उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।

खनिज अभियंता पर भी 10 हजार रुपए का जुर्माना
नगर निगम आयुक्त के अलावा सूचना आयोग ने कोटा जिले के रामगंजमंडी के खनिज अभियंता पर भी समय पर सूचना नहीं देने और आयोग के निर्देशों की अनदेखी करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। आयोग के समक्ष रामगंजमंडी के महावीर वैष्णव ने शिकायत की कि उसने 5 सितंबर 2019 से सूचना उपलब्ध कराने का आवेदन किया।

अधिकारी ने कोई सूचना उपलब्ध नहीं करवाई। इस पर आयोग ने अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन वे जवाब के लिए हाजिर नहीं हुए। इस पर आयोग ने अभियंता पर आदेशों की अवहेलना करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया साथ ही निर्देश दिए कि वह आवेदक को रिकॉर्ड का अवलोकन करवाएं।

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