शारदीय नवरात्र 7 अक्टूबर से:चतुर्थी का क्षय होने से 8 दिन के होंगे नवरात्र, इस बार डोली पर बैठकर आएंगी माता रानी

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: लता खंडेलवाल
  • कॉपी लिंक
महाष्टमी 13 और महानवमी 14 को मनाएंगे। - Dainik Bhaskar
महाष्टमी 13 और महानवमी 14 को मनाएंगे।

जगत जननी मां भगवती की अराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 7 अक्टूबर से होगा। नवरात्र 14 अक्टूबर तक चलेंगे। इस बार चतुर्थी तिथि का क्षय होने से नवरात्र 9 की बजाय 8 दिन के ही होंगे। महाष्टमी 13 अक्टूबर को और महानवमी 14 अक्टूबर को मनाई जाएगी। वहीं, दशहरा 15 अक्टूबर का रहेगा।

खास बात यह है कि नवरात्र गुरुवार से शुरू होकर गुरुवार को ही संपन्न हो रहे हैं। इस बार माता रानी डोली पर बैठकर हमारे घर आएंगी। ज्योतिषशास्त्री पं दिनेश मिश्रा ने कहा कि नवरात्र में माता का डोली पर बैठकर आना प्राकृतिक आपदा, भूकंप, कहीं आगजनी की घटना अथवा राजनीतिक द्वेष भावना फैलाने की घटना हो सकती है।

एक साल में 4 बार आते हैं नवरात्र

देवी पुराण के अनुसार नौ शक्तियों के मिलन को “नवरात्रि” कहा जाता है जो एक साल में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में 4 बार आती हैं। बसंत ऋतु में आने वाले को चैत्र या वासंती नवरात्र कहा जाता है। जबकि, शरद ऋतु व आश्विन मास में आने वाले नवरात्र को शारदीय कहा जाता है। बाकी दो यानि गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ में आते है, जिस दौरान मां दुर्गा की 10 महाविधाओं की साधना होती है।

कलश स्थापना का मुहूर्त

पं. मिश्रा के अनुसार नवरात्र में घटस्थापना/कलश स्थापना का मुहूर्त इस बार सिर्फ अभिजीत मुहूर्त ही रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 7 अक्टूबर को दोपहर 11:52 से 12:38 तक है। इस बीच घट स्थापना कर देवी की पूजा अर्चना ज्योत,कलश स्थापना करनी चाहिए ।

नवरात्र की प्रमुख तिथियां

  • नवरात्र प्रारंभ व घट स्थापना: 7 अक्टूबर, गुरुवार
  • नवरात्र महाष्टमी: 13 अक्टूबर, बुधवार
  • नवरात्र नवमी तिथि: 14 अक्टूबर, गुरुवार
  • नवरात्र दशमी तिथि: 15 अक्टूबर, शुक्रवार (दशहरा)

घटस्थापना पूजा विधि

एक आसन पर मिट्टी का बर्तन रखकर उसमें सप्त धान्य बोएं। फिर कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते लगाकर कलावा बांधें। इसके बाद कलश के मुंह पर लाल कपड़े में नारियल रख दें और फिर कलावा बांध दें।

सुख-समृद्धि, वैभव का प्रतीक है कलश

मान्यता है कि कलश स्थापना से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर को खुशियों, धन-धान्य व सुख-समृद्धि से भर देती हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार, कलश सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक होता है।

खबरें और भी हैं...