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न्यायिक अधिकारी नन्दिनी व्यास का इंटरव्यू:तीन साल की बच्ची से पड़ोसी ने दरिंदगी की थी, हालत बहुत खराब थी, मैंने खुद स्टेटमेंट रिकाॅर्ड किया, आखिर बच्ची को न्याय मिला

जयपुर2 महीने पहले
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न्यायिक अधिकारी नन्दिनी व्यास। - Dainik Bhaskar
न्यायिक अधिकारी नन्दिनी व्यास।

राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी की पहली महिला निदेशक, न्यायिक अधिकारियों को संस्कारित करने की अहम जिम्मेदारी.....

आप प्रशिक्षक की भूमिका में हैं, एक न्यायिक अधिकारी में प्रमुख तौर पर क्या अपेक्षा रखती हैं?
जवाब:
हमारे पास न्यायिक अधिकारी ट्रैनिंग लेने आते हैं। हम खास तौर पर सिखाते हैं कि कभी यह न सोचें कि केवल फाइल का डिस्पोजल करना है। फैसला तारीफ पाने, शीघ्र न्याय देने जैसे भावों से प्रेरित होकर न किया जाए। दोनों पक्षों को सफाई रखने का उचित समय मिले। न्याय में कभी देर न हो लेकिन ऐसी शीघ्रता भी न हो कि किसी पक्ष के साथ अन्याय हो जाए।

अदालतों में काफी केस पेंडिंग हैं, पेंडेंसी घटने की बजाय बढ़ती जाती है, क्या हल सोचती हैं?
जवाब:
काफी लिटिगेशन तो अनावश्यक होते हैं। पक्षकार तो अधिवक्ता को फाइल दे जाता है और अधिवक्ता की अपनी व्यस्तताएं होती हैं। जबकि हर मामले को ध्यान से देखा जाना चाहिए। न्यायिक ऑफिसर्स को चाहिए कि व्यक्तिगत ध्यान दें। पक्षकारों और अधवक्ताओं को बुलाकर बात करें तो काफी पेंडेंसी आसानी से खत्म हो सकती है।

आप मोटर एक्सीडेंट कोर्ट में भी रहीं, किस तरह का अनुभव रहा?
जवाब:
वहां बहुत से लोग तो ऐसे आते थे, जो अदालत तक पहुंचने में ही अक्षम थे। कभी कोई विधवा आ रही है, कभी कोई फरियादी ऐसा है जो असहाय पड़ा है। ऐसे लोगों की हालत परेशान करती हैं लेकिन न्यायिक अधिकारियों की अपनी सीमाएं हैं। क्योंकि उनके पास न्याय देने का जिम्मा होता है, नीति तय करने का नहीं।

महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को लेकर कानूनों में बदलाव की जरूरत महसूस करती हैं?
जवाब:
जब-जब महिलाओं के साथ अपराध की बात आती है, एक वाकया बरबस याद आता है। बात तब की है, जब पोक्सो एक्ट नहीं आया था। तीन साल की एक बच्ची बहुत बुरी हालत में आई थी। उसके बयान दर्ज करना ही अपने आप में चुनौती थी। पड़ोसी ने ही उसके साथ दरिन्दगी की थी। उसकी हालत के मद्देनजर मैंने खुद स्टेटमेंट रिकॉर्ड किए। हालांकि बाद में मेरा तबादला हो गया था लेकिन बच्ची को आखिर न्याय मिला।

व्यवस्था और समाज, दोनों में खामियों के कारण लोग कोर्ट तक पहंुचते हैं, इन दोनों जगह पारदर्शिता और स्वच्छता कैसे आए?
जवाब:
हम जहां भी हैं और जो भी जिम्मेदारी हमारे पास है, हम उसे पूरी ईमानदारी और मेहनत से निभाएं। हर व्यक्ति अपनी-अपनी जगह प्रतिबद्ध होगा तो समस्याएं स्वत: कम होंगी और लोगों को अदालतों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।