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भंवर लाल शर्मा स्मृति शेष / न राज का सुख भाेगा और न कभी राज जाने का दुख किया-मंत्री रहे लेकिन खुद अपनी गाड़ी चलाते थे

Neither felt the pleasure of the kingdom nor did he ever suffer the loss of going to the Raj - he was a minister but he used to drive his own car, nor ever went to a government bungalow.
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Neither felt the pleasure of the kingdom nor did he ever suffer the loss of going to the Raj - he was a minister but he used to drive his own car, nor ever went to a government bungalow.

  • प्रदेश में आपातकाल के विरोध में आंदोलन तेज होता जा रहा था, भंवर जी ने पुलिस को चुनौती दी कि वे उन्हें पकड़ कर दिखाएं, लेकिन पुलिस कभी उन्हें पकड़ नहीं पाई

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 06:24 AM IST

जयपुर. भंवरजी के साथ मैं तब से रहा जब वे जनसंघ में थे। उनके साथ आपातकाल में जेल भी गया। राजनीति में वे मेरे लिए गुरू थे। किशनपोल विधानसभा से उन्होंने पहला चुनाव श्रीराम गोटेवाले के सामने लड़ा लेकिन वे हार गए। उसके बाद उन्होंने 1977 में हवामहल से चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद वे लगातार 6 बार विधायक रहे। उनकी सादगी मुझे हमेशा हैरान करती थी। न उन्होंने कभी राज का सुख भोगा और न ही कभी राज जाने का दुख किया। 
बात उन दिनों की है जब वे भैरो‌ंसिंह शेखावत की सरकार में स्वायत्त शासन मंत्री थे। मैं उनके साथ सचिवालय से उन्हीं की जिप्सी में घर के लिए रवाना हुआ। मंत्री थे लेकिन वे खुद अपनी गाड़ी चला रहे थे। हम स्टेच्यू सर्किल पहुंचे थे कि इतने में सूचना मिली कि जन्मभूमि आंदोलन के चलते भाजपा की सरकार गिर गई। वे सीधे घर पहुंचे और कुर्ता उतार वकील वाला कोट पहन लिया। इसके बाद वे सीधे कोर्ट गए और वहां साथी वकीलों के साथ केस से जुड़ी फाइलें पढ़ने लगे। ये उनकी सादगी ही थी कि मंत्री रहते हुए उन्होंने कभी सरकारी गाड़ी और बंगला नहीं लिया। 
आपातकाल का भी एक किस्सा उनसे जुड़ा हुआ है। प्रदेश में आपातकाल के विरोध में आंदोलन तेज होता जा रहा था। भंवर जी ने पुलिस को चुनौती दी कि वे उन्हें पकड़ कर दिखाएं। लेकिन पुलिस कभी उन्हें पकड़ नहीं पाई। इसके बाद उन्होंने खुद कहा कि चांदपोल में माधुबाबा पानवाले के पास मैं सत्याग्रह करूंगा, वहीं पुलिस मुझे पकड़ सकेगी और ऐसा ही हुआ। शाम साढ़े पांच बचे वे सत्याग्रह करने पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें मीसा में गिरफ्तार कर लिया।-मोहनलाल गुप्ता, पूर्व विधायक

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