पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इलाज पर कोरोना इम्पैक्ट:न स्ट्रेथोस्कोप से जांच ना ही बीपी का माप मोबाइल बन गया है मरीजों का ‘भगवान’

जयपुर8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
डॉक्टर-मरीज में बढ़ी दूरी, मरीज को देखना कम पूछना ज्यादा। - Dainik Bhaskar
डॉक्टर-मरीज में बढ़ी दूरी, मरीज को देखना कम पूछना ज्यादा।
  • मरीज को क्लीनिक पर देखने की बजाय वीसी को प्राथमिकता

(संदीप शर्मा) काेरोना ने जिंदगी जीने के मायने बदल दिए हैं। एक-दूसरे से दूरी, हर समय मॉस्क की उपस्थिति के अलावा सबसे अधिक अंतर आया है डॉक्टर और मरीज के बीच। डॉक्टर्स के लिए मरीजों को कोरोना से बचाव करते हुए इलाज करना है वहीं खुद को भी बचाना है। हालांकि खुद मरीज भी काफी सतर्कता बरत रहे हैं और वीडियो कॉल के जरिए ही इलाज लेने में रुचि दिखाने लगे हैं। कोरोना ने डॉक्टर्स और मरीजों के बीच की परिस्थितियों को काफी बदला है, जिसका पॉजिटिव और निगेटिव दोनों ही तरह का असर देखने को मिल रहा है।

बदलाव : डॉक्टर्स ने स्ट्रेथोस्कोप से देखना बंद कर दिया है

  1. पहले डॉक्टर हर मरीज से मिलते थे, उसका ब्लड प्रेशर खुद लेते थे, लेकिन अधिकांश डॉक्टर्स ने अब बीपी लेना लगभग बंद कर दिया है। डॉक्टर्स ने बीपी नापने के लिए खुद के कमरे के बाहर ही स्टाफ लगा दिया है और वह ही ब्लड प्रेशर नापते हैं।
  2. डॉक्टर्स ने स्ट्रेथोस्कोप से देखना लगभग बंद कर दिया है। यदि किसी मरीज को देखना भी पड़ता है तो स्ट्रेथोस्कोप लगाने से पहले और बाद में सेनेटाइज होते हैं और स्ट्रेथोस्कोप भी करते हैं। साथ ही कोशिश करते हैं कि दूर से ही देखें।
  3. किसी मरीज को देखने के लिए बुला भी लिया गया और डॉक्टर के पास जाने से पहले उसका टेम्परेचर नापा जाता है। यदि वह अधिक आता है तो उसे डॉक्टर के पास नहीं भेजा जाता और कमरे के बाहर से वीडियो कॉल के जरिए ही उसे देखा जाता है।
  4. मेडिसिन, स्किन या ऐसी बीमारी जिन्हें दूर से नहीं देखा जा सकता उनके लिए मरीजाें को बुलाया जा रहा है। लेकिन न्यूरोलॉजी, आर्थो, गेस्ट्रो या ऐसी बीमारियों के मरीजों की रिपोर्ट देखकर ही इलाज किया जा रहा है।

एक्सपर्ट: पुरानी लिखी दवाएं ही नियमित कर रहे हैं

  • अभी कई मरीज शहर की ओर ही नहीं आ रहे हैं। जिन्हें हर महीने या 15 दिन में डॉक्टर्स को दिखाना होता था। वे अपनी वे पुरानी लिखी दवाएं ही नियमित कर रहे हैं। हां, इस बारे में वे डॉक्टर से बात जरूर कर रहे हैं।
  • पहले आमजन छोटी बीमारियों को लेकर भी अलर्ट मोड पर था और तुरंत डॉक्टर्स को दिखा लेते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। लोग घरों में रहकर दवाएं लेने में विश्वास कर रहे हैं।
  • आदि किसी को डॉक्टर के पास जाना भी पड़ रहा है तो वह एडमिट होने से बच रहा है और गंभीर हालत होने पर ही एडमिट हो रहा है। डॉक्टर्स का कहना है कि भले ही आमजन अभी बीमारियों को इग्नोर कर रहा है और कुछ दिन काम चला भी सकता है।

आने वाले दिनों में गंभीर बीमारियों के मरीज बढ़ना तय है। क्योंकि वे अभी अन्य बीमारियों को दरकिनार कर रहे हैं और घर में ही रह कर, फोन पर परामर्श कर दवाएं ले रहे हैं। ऐसे में बीमारी की गंभीरता का अंदाजा नहीं लग पा रहा है। इसलिए बेहतर है कि समस्या होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
एक्सपर्ट पैनल– डॉ. एसएम शर्मा, डॉ. दीपक माथुर, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. विजय शर्मा।

खबरें और भी हैं...