पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोना के नए स्ट्रेन की जांच:एसएमएस में ‘जीनोम सीक्वेंसिग’ के जरिए नया स्ट्रेन और कितना खतरनाक, अब पता करना आसान होगा

सुरेन्द्र स्वामी |जयपुर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • राज्य की पहली सरकारी लैब जहां वायरस की कुंडली की जानकारी मिल सकेगी

श्रीगंगानगर में सोमवार को ब्रिटेन से आए तीन लोगों ने कोरोना से नए स्ट्रेन का संक्रमण मिला है। अभी इस स्ट्रेन की जांच के लिए एनआईवी पुणे या फिर दिल्ली सैंपल भेजना पड़ता है। हालांकि एसएमएस में भी जल्द ही इसकी जांच शुरू हो जाएगी। इसके अलावा देश की सभी लैब में सैंपलों में 5 फीसदी में जीनोम सर्विलांस होगा।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलोजी विभाग की अध्यक्ष डॉ.नित्या व्यास का कहना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से वायरस की कुंडली होती है। वायरस कैसा है? किस तरह दिखता है? इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसके विशाल समूह को जीनोम और जानने की विधि को ‘जीनोम सीक्वेंसिंग’ कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चल जाएगा।

ऐसा पता कर सकेंगे नए स्ट्रेन का

मानव कोशिकाओं की तरह वायरस में भी आनुवंशिक डी-आक्सीराइबोस न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) और राइबोस न्यूक्लिक एसिड (आरएनए) उपस्थित होता है। इन पदार्थों को सामूहिक रूप से जीनोम कहा जाता है। लेकिन एक बार में ही या तो डीएनए या आरएनए मौजूद होता है, वहीं स्ट्रेन को जेनेटिक वैरिएंट कहते हैं।

इनकी क्षमता अलग-अलग होती है। इनके आकार और स्वभाव में बदलाव भी पूरी तरह से अलग होता है। पहले सैंपल लेकर उसमें से आरएनए निकालते हैं। फिर आरटी-पीसीआर मशीन में रखते हैं। इसके बाद में जीन में बदलाव के लिए नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेसिंग (एनजीएस) के जरिए रंग व अन्य लक्षणों के आधार पर स्ट्रेन का पता लगाते हैं।

^हमारे पास बायो सेफ्टी लेवल-3 की पहले से लैब और जांच की आधुनिक मशीन स्थापित है। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पूरी तैयारी कर ली है। संभवतया इसी माह में जीनोम सीक्वेसिंग प्रारंभ कर देंगे। नए स्ट्रेन का पता करने के लिए जांच में इस्तेमाल होने वाले रिएजेंट का इंतजार है।

डॉ.सुधीर भंडारी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

वर्तमान में यहां होती है जीनोम सीक्वेसिंग जांच
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक कोलकाता, इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंस भुवनेश्वर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलोजी पुणे, नेशनल सेन्टर फॉर सेल साइंस पुणे, सेन्टर फॉर सेलुलर एंड मोलीक्यूलर बायोलोजी हैदराबाद, सेन्टर फॉर डीएनए फिंगर प्रिटिंग डायग्नोस्टिक हैदराबाद, इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल एंड मेडिसन बैंगलुरू, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेन्टल हैल्थ एंड न्यूरो साइंस बैंगलुरू, इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलोजी नई दिल्ली, डिविजन ऑफ बायोटेक्नोलोजी एपीडेमियोलोजी सैन्ट्रल सर्विलांस यूनिट नई दिल्ली।

खबरें और भी हैं...