एनजीटी का आदेश:राजस्थान में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक नाे हाॅन्किंग जाेन रहे, हकीकत- 104 डेसीबल तक शोर

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: अर्पित शर्मा
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अजमेर रोड, शाम 4:34 बजे (व) दो सौ फीट, शाम 4:10 बजे - Dainik Bhaskar
अजमेर रोड, शाम 4:34 बजे (व) दो सौ फीट, शाम 4:10 बजे

जनता चैन से साे सके, इसके लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदेश में आवासीय क्षेत्राें में रात 10 से सुबह 6 बजे तक नाे हाॅन्किंग जाेन रखने के निर्देश दिए हैं। जयपुर की कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट साेसायटी (कट्स) ने नवंबर 2021 में एनजीटी में राज्य सरकार के पर्यावरण संबंधी विभागाें के विरुद्ध याचिका दायर की थी। कट‌्स के दीपक सक्सेना ने बताया कि इसमें राज्य में वाहनाें द्वारा हाेने वाले ध्वनि प्रदूषण विशेषकर ट्रक, बसाें के तेज हाॅर्न के खतरे काे नियंत्रित करने की मांग की गई थी। इसके बाद एनजीटी ने उक्त आदेश दिए।

200 फीट बाइपास के आसपास 4 जगह भास्कर व ट्रैफिक सीआई राेहित चावला की टीम ने मशीन से ध्वनि प्रदूषण जांचा ताे 100 से 104 डेसीबल तक मिला, जाे अत्यधिक हानिकारक है।

मानक से 10 डेसीबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए : NGT

डॉक्टर कहते हैं - 70 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि में लगातार रहने से कान के पर्दे फट सकते हैं।
प्रदूषण मंडल कहता है: काॅमर्शियल जाेन में स्टैंडर्ड 65 डेसीबल निर्धारित कर रखा है।
भास्कर ने राजधानी की सड़कों पर पड़ताल की ताे स्थिति खतरनाक मिली। शहर में चहुंओर हाॅर्न से वाहन 100 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि प्रदूषण फैलाते मिले।एनजीटी ने आदेश में कहा कि तय मानकाें से 10 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि प्रदूषण न हाे।
हालत- साइलेंस जाेन में भी 66 डेसीबल से ज्यादा - राजधानी में बाेर्ड 6 जगह माॅनिटरिंग करता है। इनमें सिविल लाइंस में गवर्नर हाउस के सामने, रामबाग स्थित हाॅस्पिटल के बाहर भी ज्यादा ध्वनि प्रदूषण रहता है। रेजीडेंशियल जाेन में पटेल मार्ग मानसराेवर, साइंस पार्क शास्त्री नगर, काॅमर्शियल जाेन में राजापार्क गली नंबर 3 व काेतवाली पुलिस स्टेशन छाेटी चाैपड़ पर भी पाॅल्यूशन का स्तर 70 डेसीबल से भी ज्यादा रहा है।

बाेर्ड हर साल दिवाली के पास आंकड़े जारी करता है। कट्स की तरफ से एडवाेकेट तरुण अग्रवाल व भास्कर अग्रवाल ने पैरवी की। वहीं एनजीटी ने वर्धमान काैशिक, हरदीप के जजमेंट का हवाला देते हुए यह भी बताया, जिनमें जुर्माना 5 हजार और 10 हजार रुपए लगाने के लिए कहा गया था।

वाहन बेचते समय लोगों को बताएं ध्वनि स्तर, कोर्स में पढ़ाएं
एनजीटी ने यह भी कहा है कि राज्य के ऑटाेमाेबाइल निर्माताओं काे वाहनाें के ध्वनि स्तर के बारे में उपभाेक्ताओं काे बिक्री के समय जानकारी देनी चाहिए। हाॅर्न, साइलेंसर का भी सभी प्रकार से अनुमाेदन ऑटाेमाेबाइल क्रेता काे दिया जाएगा। इसके अलावा किताबाें में चैप्टर शामिल कर बच्चाें, युवाओं काे नाॅइज पाॅल्यूशन, पाॅल्यूशन अंडर कंट्राेल (पीयूसी) प्रमाण पत्र, डेटा रिकाॅर्डिंग व अन्य के बारे में जानकारी देने को भी कहा है।
इधर, साइलेंस जाेन में भी 66 डेसीबल से ज्यादा पाॅल्यूशन
राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण बाेर्ड 6 जगह ध्वनि प्रदूषण की माॅनिटरिंग करता है। इनमें सिविल लाइंस में गवर्नर हाउस के सामने और रामबाग स्थित एक हाॅस्पिटल के बाहर भी तय मानकाें से काफी ज्यादा ध्वनि प्रदूषण रहता है। ऐसे ही रेजीडेंशियल जाेन में पटेल मार्ग मानसराेवर, साइंस पार्क शास्त्री नगर और काॅमर्शिचल जाेन में राजापार्क गली नंबर 3 व काेतवाली पुलिस स्टेशन छाेटी चाैपड़ पर भी नाॅइज पाॅल्यूशन का स्तर 70 डेसीबल से भी ज्यादा रहा है। बाेर्ड हर साल दिवाली के पास आंकड़े जारी करता है। कट्स की तरफ से एडवाेकेट तरुण अग्रवाल व भास्कर अग्रवाल ने पैरवी की।
(जबकि साइलेंस जाेन में स्टैंडर्ड 50 डेसीबल, रेजीडेंशियल जाेन में 55 और काॅमर्शियल जाेन में स्टैंडर्ड 65 डेसीबल निर्धारित है)

मानसिक स्थिति के लिए भी ठीक नहीं- एक्सपर्ट
व्यक्ति के लिए 20 से 50 डेसीबल तक की ध्वनि ठीक है। 50 से ऊपर ध्वनि में लगातार रहने से परेशानी हाे सकती है। 70 से ज्यादा में लगातार रहने से कान के पर्दे फट सकते हैं। यह स्तर मानसिक स्थिति के लिए भी ठीक नहीं है। ध्वनि स्तर 120 तक हाे ताे तुरंत सुनने की शक्ति जा भी सकती है।
- माेहनीश ग्राेवर, प्राेफेसर, ईएनटी, एसएमएस हाॅस्पिटल
शहर में तय मानकाें से तेज हाॅर्न वाले वाहनाें का लगातार चालान किया जा रहा है। कई वाहनाें में ताे 100 डेसीबल से ज्यादा तेज ध्वनि वाले हाॅर्न मिलते हैं। इन्हें नियमानुसार हटवाया भी जाता है।

-राजेंद्र सिंह सिसाेदिया, एडि. डीसीपी, ट्रैफिक