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कोर्ट में सुनवाई:रिश्वत में अस्मत मांगने में बर्खास्त आरपीएस के अभियोजन को मंजूरी नहीं

जयपुर3 महीने पहले
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बोहरा ने अभियोजन मंजूरी पेश नहीं करने के आधार पर कोर्ट से उसे रिहा करने का आग्रह किया था।  - Dainik Bhaskar
बोहरा ने अभियोजन मंजूरी पेश नहीं करने के आधार पर कोर्ट से उसे रिहा करने का आग्रह किया था। 
  • बोहरा ने अभियोजन मंजूरी पेश नहीं करने के आधार पर काेर्ट से मांगी थी रिहाई

एसीबी मामलों की विशेष कोर्ट ने बुधवार को रिश्वत में अस्मत मांगने से जुड़े मामले में बर्खास्त आरपीएस कैलाश बोहरा को रिहाई से इंकार करते हुए उसका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। बोहरा ने अभियोजन मंजूरी पेश नहीं करने के आधार पर कोर्ट से उसे रिहा करने का आग्रह किया था।

बोहरा ने अधिवक्ता संदीप लुहाड़िया के जरिए दायर प्रार्थना पत्र में कहा था कि हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पीडि़ता के बयान दर्ज होने के बाद पुन: जमानत याचिका पेश करने की छूट दी थी। एसीबी की ओर से अभी तक कोर्ट में अभियोजन स्वीकृति पेश नहीं की गई है। ऐसे में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने पर कोर्ट ना तो मामले में प्रसंज्ञान ले सकती है और न ही ट्रायल ही शुरू की जा सकती है।

इसलिए उसे अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने के आधार पर रिहा किया जाए या जमानत दी जाए। कोर्ट ने इन दलीलों को नहीं मानते हुए बोहरा का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। दरअसल दुष्कर्म पीडि़ता के प्रकरण में जांच के दौरान पूर्व डीएसपी बोहरा ने पीडि़ता को अपने ऑफिस बुलाया और प्रभावी कार्रवाई के लिए रिश्वत में अस्मत की मांग की। वहीं पीडि़ता की रिपोर्ट पर एसीबी ने बोहरा को आपत्तिजनक स्थिति में गिरफ्तार किया था। बोहरा 14 मार्च से ही हिरासत में है।

निलंबित आईपीएस मनीष अग्रवाल ने भी अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने पर हाईकोर्ट से मांगी जमानत

वहीं हाइवे निर्माण कंपनी से रिश्वत मामले में गिरफ्तार आईपीएस मनीष अग्रवाल ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने के आधार पर उसे जमानत देने का आग्रह किया है। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को जवाब के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई टाल दी। राज्य सरकार की ओर से एएसजी डॉ. विभूतिभूषण शर्मा ने कहा कि अभियोजन मंजूरी के लिए भारत सरकार को लिखा जा चुका है।

इसलिए उसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट व जवाब के लिए समय दिया जाए। जिस पर अदालत ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय दिया। गौरतलब है कि इससे पहले एसीबी मामलों की कोर्ट ने मनीष अग्रवाल को रिहा करने से इंकार करते हुए उसका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था।

प्रार्थना पत्र में निलंबित आईपीएस ने कहा था कि उसके खिलाफ झूठे तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। उसे बिना साक्ष्यों के 2 फरवरी को गिरफ्तार किया था। वह अखिल भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी है और उसकी अभियोजन मंजूरी देने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ही सक्षम है। सक्षम अधिकारी की मंजूरी बिना कोर्ट भी प्रसंज्ञान नहीं ले सकती,लिहाजा उसे रिहा करें।

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