कोरोना इफेक्ट:सामूहिक नहीं, घर-घर में प्रज्वलित हुई लोहड़ी, बोलियां गाकर दी एक-दूसरे को बधाई

जयपुर6 दिन पहले
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पंजाबी समाज का प्रमुख पर्व लोहड़ी गुरुवार को पारंपरिक रूप से घरों में धूमधाम से मनाया गया। - Dainik Bhaskar
पंजाबी समाज का प्रमुख पर्व लोहड़ी गुरुवार को पारंपरिक रूप से घरों में धूमधाम से मनाया गया।

पंजाबी समाज का प्रमुख पर्व लोहड़ी गुरुवार को पारंपरिक रूप से घरों में धूमधाम से मनाया गया। फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण इस बार भी पिछले साल की तरह सार्वजनिक की बजाए समाज के लोगों ने अपने-अपने घरों में ही लोहड़ी प्रज्वलित की। रेवड़ी, मूंगफली, मक्का के फूले का लोहड़ी माता को भोग लगाया। महिला-पुरुषों और बच्चों व बुजुर्गों के लिए लोहड़ी की बोलियां.. इक कुड़ी दे लम्मेवाल...लम्मेवाल...गुत्तां कर दी फुल्लां नाल...फुल्लां नाल, फुल्लां दी हो गई चोरी...दे माई लोहड़ी...,घर विच्च पोते बाग सजाया...रज्ज-रज्ज लोहड़ियां पाइयां...गाकर एक-दूसरे को बधाई दी।

इसके साथ ही कोरोना से जुड़ी बोलियां बारी बरसी खटन गया सी खट के लियांदा सोना...तीसरी वैक्सीन डोज आ गई ए...हुण भज्जूगा कोरोना जैसी बोलियां भी गाकर बधाइयां दी गईं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए 50 सालों में दूसरी बार राजापार्क चौराहे पर लोहड़ी का मुख्य आयोजन सार्वजनिक रूप से नहीं हुआ। बता दें कि हर साल राजा पार्क में जलने वाली शहर की प्रमुख और सबसे बड़ी लोहड़ी में 25-30 हजार लोग शामिल होते थे।

राजापार्क में प्रज्वलित हुई गोकाष्ठ और हवन सामग्री से लोहड़ी
राजस्थान प्रदेश पंजाबी महासभा और राजापार्क व्यापार मंडल अध्यक्ष रवि नैयर ने बताया कि कोविड-19 के चलते इस बार भी राजापार्क के मुख्य चौराहे पर सामूहिक लोहड़ी नहीं जलाई गई। सिर्फ परंपरा निर्वहन के लिए 10 लोगों की मौजूदगी में चौराहे पर शाम 7:15 बजे शगुन के तौर पर लोहड़ी प्रज्वलित की गई। इसमें प्रदूषण फैलाने वाली लकड़ियों की बजाए गो कास्ठ, देसी गाय का घी, 31 जड़ी बूटियों से बनी हवन सामग्री काम में ली गई। प्रज्वलन के समय सामूहिक रूप से एकत्र नहीं हुए। एक-एक करके श्रद्धालु आते गए और लोहड़ी की परिक्रमा कर निकलते गए।

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