बड़ी लापरवाही:सीबी नेट मशीनों में इस्तेमाल होने वाला किट ही नहीं, टीबी केंद्रों पर नहीं हो पा रही जांच

जयपुर16 दिन पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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  • केंद्र सरकार ने मार्च-2021 में सीबी नेट मशीन में इस्तेमाल होने वाली जांच किट कार्टेज खरीदने के लिए राजस्थान समेत सभी राज्यों को निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक नहीं खरीदे किट

एक तरफ केंद्र सरकार का 2025 तक देश को टीबी मुक्त भारत बनाने का सपना है, दूसरी तरफ राज्य में महज दो घंटे में परिणाम बताने वाली ‘सीबी नेट मशीन’ का जांच किट ही उपलब्ध नहीं है। जिससे जयपुर समेत विभिन्न जिलों के केंद्रों पर करीबन 66 सीबी नेट मशीनों पर टीबी के मरीजों की जांच नहीं होने से निजी सेंटरों पर महंगे दामों में कराने को मजबूर है। निजी सेंटरों पर 2 से 3 हजार रुपए देने पड़ रहे हैं।

सरकार के अफसरों की लापरवाही तो देखिए कि केंद्र सरकार ने फंड देने के लिए मना करने के बाद जांच किट के लिए खरीद प्रक्रिया प्रारंभ नहीं करने पर सवाल उठता है। जांच नहीं होने पर कोरोना के बाद वायरस और टीबी की दवा काम करने का पता नहीं चल पा रहा। जिससे अब संक्रमण का खतरा मंडराता नजर आ रहा है। जयपुर, अलवर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, जोधपुर, सीकर, झुन्झुनू, कोटा जैसे अनेक शहरों के केन्द्रों पर टीबी की जांच नहीं हो रही है।

क्या है सीबी नेट मशीन : यह डीएनए का खोज वाली आधुनिक मशीन है। इससे मरीज में मिलने वाले नमूने में टीबी के कीटाणु के जींस का पता कर सकते है। साथ ही मरीज पर टीबी रोधक दवा काम करती है या नहीं। इसकी जानकारी भी कम समय में मिलती है। कुछ टीबी रोधक दवाओं के काम करना बंद कर देती है। तो इससे मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के नाम से जाना जाता है।

खुद ही खरीदें जांच किट
केंद्र सरकार के टीबी विभाग ने मार्च-2021 में ही सीबी नेट मशीन से टीबी की जांच में इस्तेमाल होने वाले किट के लिए सभी राज्य सरकारों को खुद ही खरीदने के निर्देश दिए है। इस फैसले के बाद ही किट में दिक्कत आ रही है। राज्य में किट खरीदने की फाइल भी इधर-उधर चक्कर काटने से मरीजों की जान को खतरा है क्योंकि समय पर दवाओं के असर का पता नहीं लगने पर मौत हो सकती है।

तीन-चार माह से टीबी की जांच करने वाली सीबी नेट मशीन का किट उपलब्ध नहीं है। पहले तो केन्द्र सरकार देती थी, लेकिन हमारे को खरीदने के लिए कहा है। खरीद प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मौजूदा स्थिति में ट्रू-नेट मशीन से जांच की जा रही है। जल्द जांच सुविधा उपलब्ध होगी। -डॉ. विनोद गर्ग, स्टेट नोडल अधिकारी (टीबी)

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