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वूमन की बात:अब समय आ गया है कि महिलाएं कतार में आगे खड़ी हों; इक्कीसवीं सदी के इक्कीसवें साल में आज बड़ा मुद्दा

जयपुर9 महीने पहले
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  • आज के दौर में महिलाओं को लेकर सोच बदलने की जरूरत पर जोर दे रही हैं मीना शर्मा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बधाइयों की बाढ़ है। महिलाओं की अहमियत बताने के लिए हर जुबान आतुर है। महिला दिवस सोमवार को है और इस दिन लाखों महिलाएं हैं शिव की आराधना में व्रत रखती हैं। अर्धनारीश्वर शिव का ‘नारी’ स्वरूप ‘शक्ति’ का प्रतीक माना जाता है लेकिन शक्ति ‘स्वयं’ जंग के मैदान में है।

इक्कीसवीं सदी के इक्कीसवें साल में आज बड़ा मुद्दा - महिला समानता, सुरक्षा और सम्मान का है। तो क्या आज दिन भर चलने वाले बैनर और नारे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा कर पाएंगे? महिलाओं को यह दिन समर्पित करने की शुरुआत जिस भावना से 8 मार्च 1977 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने की थी, आज 44 साल बाद भी उन स्थितियों में बड़ा बदलाव नहीं आया है। यही कारण है 1725 में जन्मी अहिल्या बाई होल्कर की चुनौतियों पर बना धारावाहिक आज भी हमारी भावनाओं को उद्वेलित करता है, वहीं कोवि-19 के ख़िलाफ ‘पहला’ फ़ैसला लेने वाली महिला का नाम बड़ी ताकत लगा कर ढूंढना पड़ रहा है।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण विभाग की सेवानिवृत्त सचिव प्रीति सूदन वही महिला हैं जिन्होंने देश को कोरोना से बचाने के अनथक कोशिश की है। प्रीति सूदन ने कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 8 जनवरी को पहली बैठक से लेकर जुलाई 2020 तक अतुलनीय योगदान दिया। 8 मार्च 1977 से ‘वुमनहुड’ यानी नारीत्व के सम्मान में महिला दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। परंपरा जब तक आचार विचार का हिस्सा नहीं बनेगी तब सिर्फ दबाव का दर्पण बनी रहेगी। भारत सरकार में इस वक्त सिर्फ छह महिला आइएएस अफसर हैं जो विभिन्न मंत्रालयों में सचिव हैं।

हालांकि यह अब तक का सबसे ज्यादा औसत है फिर भी अनुपात काफी कम। ही है। कपड़ा मंत्रालय के सेवानिवृत्त सचिव रवि कपूर को संसद टीवी का पहला सीईओ बनाया गया है। 1986 बैच के आईएएस अफसर डॉ. पीडी वाघेला की सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले ही ट्राई का चेयरपर्सन बनाने का आदेश कैबिनेट अपांटमेंट कमेटी ने निकाला। झारखंड कैडर के 1978 बैच के आईएएस राम सेवक शर्मा को नेशनल हेल्थ अथोरिटी का सीईओ बनाया गया। राजीव कुमार, 1984 बैच के झारखंड कैडर के आइएएस अफसर हैं जिन्हें पब्लिक एंटरप्राइजेज बोर्ड के चेयरपर्सन रहते हुये चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया।

पेट्रोलियम सेक्रेटरी पद से सेवानिवृत्त हुए 1985 बैच के यूटी कैडर के एमएम कुट्टी को कमिशन फार एयर क्वालिटी मेनेंजमेंट का चेयरपर्सन बनाया गया। ये नियुक्तियां केन्द्रीय कैबिनेट सचिवालय स्तर पर हुई हैं। कोरोना काल में आदेश निकाले गए। पर इस मुश्किल दौर में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली प्रीति सूदन को किसी ज़िम्मेदारी के लिये उपयुक्त नहीं समझा गया। इतना ही नहीं सचिव पद से सेवानिवृत्त होने वाली दो अन्य महिला अधिकारियों हिमाचल कैडर की उपमा चौधरी और 82 बैच की रश्मि वर्मा के नाम तय होने के बाद भी उन्हें बड़े पदों से दूर रखा गया। ये वो महिलाएं हैं जो सफलता के कीर्तिमान दशकों पहले लिख चुकी हैं। लेकिन ये उदाहरण हमारी उस सोच को परिलक्षित करते हैं जो महिलाओं को कतार में पीछे देखना चाहते हैं।
(लेखिका हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर हैं)

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