जिंदगी बचाने की जिद:100 कोरोना पेशेंट्स की सलामती के लिए नर्सिंगकर्मी ने मांगी मदद, बड़े भाई के प्लांट से मंगवाए ऑक्सीजन सिलेंडर, ताकि सांसों को बैकअप मिल सके

जयपुर2 वर्ष पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
सरकारी अस्पताल में ड्यूटी करते हेल्थ वारियर रमाकांत यादव।

प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर ने जिंदगी को बेबस कर दिया है। हर रोज 150 से ज्यादा मौतें और 16 हजार से ज्यादा नए केस। ऐसे में अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड को लेकर मारामारी जारी है। इस संकट की घड़ी में अग्रिम मोर्चे पर डटे हेल्थ वाॅरियर्स की वजह से अब भी काफी हालात काबू में हैं। कोरोनाकाल में प्रदेश के हालात जानने निकले दैनिक भास्कर के संवाददाता को मिले हेल्थ वाॅरियर रमाकांत यादव। जयपुर से 110 किलोमीटर दूरी पर कोटपूतली स्थित BDM जिला अस्पताल में फर्स्ट ग्रेड नर्सिंगकर्मी हैं।

रमाकांत अपनी सरकारी ड्यूटी से एक कदम आगे बढ़कर इंसानियत की मिसाल भी पेश कर रहे हैं। दूसरी लहर के दौरान वे बीडीएम अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट में सुपरवाइजर की ड्यूटी भी निभा रहे हैं। इस अस्पताल में तीन वार्डों में कोरोना पेशेंट का उपचार चल रहा है। इनमें जयपुर, हरियाणा, दिल्ली, सीकर और कोटपूतली के आसपास के इलाकों से आए हुए मरीज भर्ती हैं। इनमें करीब 100 बेड पर मौजूद कोरोना पेशेंट ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। इसके लिए अस्पताल परिसर में लगे ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट से लगातार करीब 35 सिलेंडर भरे जा रहे हैं। इनमें 15 सिलेंडर वे हैं जो रमाकांत ने अपने भाई से मांग कर यहां लगवाएं, ताकि किसी इमरजेंसी में मरीजों के लिए सांस कम ने पड़ जाए।

डर था, कहीं प्लांट बंद हो गया तो मरीजों की जान मुश्किल में पड़ जाएगी, बैकअप के लिए मांगी मदद

नर्सिंगकर्मी रमाकांत यादव से भास्कर संवाददाता ने बातचीत में पूछा कि आखिर क्यों आपने बड़े भाई से मदद मांगी। इसके जवाब में रमाकांत यादव ने कहा कि कोरोना पेशेंट को ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पिछले कई दिनों से प्लांट चालू है। कुछ दिनों पहले नासिक सहित अन्य बड़े शहरों और जयपुर के कुछ अस्पतालों से खबरें सामने आई कि वहां ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने से कई मरीजों की जान चली गई। ऐसे में मन में आशंका हुई कि कहीं लगातार चालू रहने या फिर किसी अन्य तकनीकी खामी से अस्पताल का प्लांट कुछ देर के लिए भी बंद हो गया तो वार्डों में भर्ती कोरोना पेशेंट के जीवन को संकट हो सकता है।

भाई को फोन किया, लॉकडाउन में बंद क्रेशर प्लांट से सिलेंडर भिजवाने के लिए कहा

प्लांट का सुपरवाइजर होने के नाते रमाकांत को महसूस हुआ कि कुछ और अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पताल में होने चाहिए। ताकि प्लांट के बंद होने पर उन सिलेंडरों की मदद से बैकअप के रूप में मरीजों तक ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। ऐसे में स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की। लेकिन कहीं से खाली सिलेंडर मिल नहीं रहे थे। तब एकाएक उनको ध्यान आया कि लॉकडाउन में उनके भाई का क्रेशर बंद पड़ा है। वहां सिलेंडर हो सकते हैं। ऐसे में रमाकांत ने तत्काल मरीजों की जान बचाने के लिए भाई को फोन कर मदद मांगी, उनसे खाली सिलेंडर देने को कहा।

भाई ने कुछ घंटे में ही भेजे सिलेंडर, अब बैकअप के रूप में ऑक्सीजन से भरे रहते हैं सिलेंडर

तब रमाकांत के भाई ने भी सहमति जताते हुए अपने क्रेशर में रखे 15 ऑक्सीजन सिलेंडर कुछ घंटे में कोटपूतली जिला अस्पताल भेज दिए। तब रमाकांत यादव और उनकी टीम ने मिलकर इन सिलेंडरों को ऑक्सीजन प्लांट में भरवाकर पाइप लाइन से जोड़ दिया। इसके बाद वे और खाली सिलेंडरों की तलाश में जुटे हुए है और अपने परिचितों को फोन कर सिलेंडर मांग रहे हैं।

रमाकांत के मुताबिक अब वे संतुष्ट हैं कि आपदा की किसी भी घड़ी में तत्काल कोरोना पेशेंट को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई जा सकेगी। इसके लिए उनकी टीम भी उनका पूरा साथ दे रही है। जानकारी के अनुसार कोरोना महामारी के वक्त 18 दिसंबर 2020 को ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाया गया था।

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