लंबित केसों की संख्या में बढ़ोतरी:अफसरों ने नहीं की पालना, हाईकोर्ट में बढ़ गए अवमानना के 1046 मामले

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: संजीव शर्मा
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

कोविड-19 संक्रमण के चलते जहां हाईकोर्ट में लंबित केसों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है वहीं अफसरों द्वारा अदालती आदेश की पालना नहीं करने पर अवमानना के लंबित केस भी बढ़े हैं। इस एक साल में मार्च- 2020 से मार्च 2021 के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ व जयपुर पीठ में अवमानना के 1046 मामले बढ़े हैं।

मार्च 2020 में जहां हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ व जयपुर पीठ में अवमानना के 7121 मामले लंबित थे वहीं मार्च 2021 में अवमानना के लंबित केसों की यह संख्या बढ़कर 8167 हो गई। वहीं राज्य सरकार व सरकारी अफसरों द्वारा हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं करने के चलते पिछले चार साल के दौरान अवमानना केसों की संख्या दोगुनी हो गई है। अवमानना केसों में मुख्य तौर पर राज्य व केन्द्र सरकार की भर्तियों कर्मचारियों की नियुक्तियों, पेंशन व सेवा नियमों व अन्य सेवा परिलाभ के मामले हैं।

4 साल में करीब दोगुने हो गए अवमानना के मामले
यदि राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित अवमानना केसों की बात करें तो पिछले चार साल के दौरान इनकी संख्या करीब दोगुनी हो गई है। मई 2017 में जयपुर पीठ में अवमानना के 2521 केस व जोधपुर मुख्यपीठ में 1887 केस लंबित थे। दोनों पीठों में कुल 4408 केस लंबित थे। जबकि मार्च 2021 तक जयपुर व जोधपुर मुख्य पीठ में कुल 8167 केस लंबित थे। इनमें से जयपुर पीठ में 4510 और जोधपुर पीठ में 3657 केस लंबित थे।

इसलिए लंबित हैं अवमानना के मामले
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हनुमान चौधरी, प्रहलाद शर्मा, महिपाल खर्रा व विजय पाठक का कहना है कि केसों में नोटिस की तामील में देरी व समय पर ओआईसी की नियुक्ति नहीं होना भी लंबित होने का मुख्य कारण है। वहीं प्रशासनिक अफसरों का आदेशों के पालन में गंभीर नहीं होना और सरकार व अन्य पक्षकारोंं की ओर से आदेशों की पालना के लिए अनावश्यक तारीखें लेना भी केसों के लंबित रहने का कारण है।

ऐसे जल्द निपट सकते हैं केस
अधिवक्ता डीपी शर्मा व रामप्रताप सैनी का कहना है कि संबंधित विभाग के उच्चाधिकारी अदालती आदेशों की पालना के लिए गंभीर रहें। विभाग के अफसर भी संबंधित अफसरों की जिम्मेदारी तय करें।

खबरें और भी हैं...