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रीट में राजस्थानी भाषा मामला:मातृभाषा दिवस पर तत्कालीन जज जीके व्यास ने दी थी हाईकोर्ट में राजस्थानी भाषा में बहस की अनुमति, राजस्थानी में हुए प्रश्न और उत्तर

जयपुर8 दिन पहले
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जस्टिस जी.के. व्यास, राज्य मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष। - Dainik Bhaskar
जस्टिस जी.के. व्यास, राज्य मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष।

राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती के लिए होने वाली REET-2021 में राजस्थानी भाषा को शामिल करने संबंधी एक जनहित याचिका पर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और रीट परीक्षा आयोजक माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि रीट परीक्षा में राजस्थानी भाषा को क्यों शामिल नहीं किया जाता, जबकि अन्य भाषाएं इसमें शामिल हैं। इनके जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी। हाईकोर्ट के इस नोटिस के बाद राजस्थान के निवासियों की अपनी मातृभाषा के प्रोत्साहन को लेकर आस बढ़ गई है।

अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के अंतरराष्ट्रीय संयोजक न्यूयॉर्क निवासी प्रेम भंडारी ने बताया कि करीब कुछ वर्ष पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन जज व वर्तमान में राजस्थान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने एक मामले में राजस्थानी में सुनवाई कर मातृभाषा गौरव बढ़ाने वाला कार्य किया था।

राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका

उस दिन था मातृभाषा दिवस और ये हुआ कोर्ट में

इस संबंध में जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने भास्कर से बातचीत में कहा कि कुछ वर्ष पहले एक मर्डर के केस में मेरे साथ कैलाशचंद्र शर्मा भी जज थे। दोनों के सामने एक इस केस के एडवोकेट कालूराम भाटी जब सुनवाई के दौरान 20 फरवरी 2017 को कोर्ट में आए तो उन्होंने कहा, जज साहब मैं तो राजस्थानी भाषा में बहस करना चाहता हूं। मैंने उन्हें कहा कि ऐसा क्यों करना चाहते हो, तो भाटी ने कहा कि आज मातृभाषा दिवस है और मैं अपनी भाषा में ही बोलना चाहता हूं। फिर पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई तो मैंने उन्हें मातृभाषा में ही बहस की अनुमति दे दी। इस दौरान मैंने कोर्ट में प्रश्न भी मारवाड़ी में पूछे और एडवोकेट भाटी ने उनका जवाब भी मारवाड़ी में दिया।

विधायिका और कार्यपालिका काम नहीं करे तो न्यायपालिका ही आस

राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रेम भंडारी ने कहा कि जब कार्यपालिका और विधायिका कदम नहीं उठाए तो न्यायपालिका ही एकमात्र रास्ता बचता है। राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए बरसों से लड़ाई लड़ी जा रही है। मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से राजस्थानी भाषा के रीट में प्रश्नों को लेकर सरकार को नोटिस दिया जाना बड़ी आस जगाता है। भंडारी ने केंद्र सरकार से अपील की कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करे ताकि अन्य भाषाओं जैसा सम्मान करोड़ों लोगों की मातृभाषा को भी मिल सके।

राजस्थानी भाषा के संघर्ष आंदोलन से जुड़े अमेरिका में न्यूयॉर्क के राजेंद्र बाफना, अशोक संचेती व निशांत गर्ग, कैलिफाेर्निया के ओपी चौधरी, टैक्सास में भारतीय भाषाओं के प्रोफेसर दलपत सिंह राजपुरोहित, कनाड़ा के प्रो. प्रताप पुरोहित व लंदन के हनुवंत सिंह राजपुरोहित ने राजस्थानी भाषा के लिए की जा रही इस तरह की पहल पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार भी राजस्थानी भाषा के लिए कदम उठाएगी।

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