रोडवेज की ग्रामीण बस सेवा विवादों में फंसी:ऑपरेटर्स का भुगतान नहीं, शुरू होने से पहले ही रोडवेज की ग्रामीण बस सेवा विवादों में फंसी

जयपुर2 महीने पहले
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प्राइवेट बस ऑपरेटर्स को पुराना भुगतान नहीं करने की वजह से रोडवेज की ग्रामीण बस सेवा शुरू होने से पहले ही विवादों में आग गई है। बस ऑपरेटर्स का रोडवेज पर करीब 20 करोड़ रुपए का पुराना भुगतान अटका हुआ है। इस वजह से प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने रोडवेज की ग्रामीण बस सेवा से दूरी बना ली है। यही स्थिति रही तो रोडवेज की ग्रामीण बस सेवा आने वाले दिनों में खटाई में पड़ सकती है।

इसकी वजह यह है कि ऑपरेटर्स ने योजना में भाग लेने से इंकार कर दिया है। सरकार ग्रामीण बस सेवा के तहत गांव-ढाणियों तक प्राइवेट बसों का संचालन करने जा रही है। इसके तहत करीब 6 हजार 800 ग्राम पंचायतों को पीपीपी मोड पर जोड़ा जाना है। इसके लिए रोडवेज ने राज्य सरकार के निर्देश के बाद वित्त विभाग को 900 करोड़ के वीजीएफ एवं 1700 करोड़ की संपूर्ण योजना का प्रस्ताव बना कर भेजा है।

इस वजह से खफा हैं प्राइवेट बस ऑपरेटर्स

प्राइवेट बस ऑपरेटर्स के खफा होने का एक नहीं कई कारण हैं। पिछली कांग्रेस सरकार में भी सरकार के निर्देश के बाद रोडवेज ने 2012-13 में ग्रामीण बस सेवा शुरू की थी। रोडवेज ने सरकार को घाटा ₹29 प्रति किलोमीटर बताया तो ऑपरेटर ₹9.32 किलोमीटर में राजी हो गए। परमिट बिना मिले ही रोडवेज अफसरों ने परमिट मिलना बताया। परिवहन से परमिट में देरी हुई तो ऑपरेटर्स को खड़ी बस का 10 गुना टैक्स देना पड़ा। परमिट मिले तो रोडवेज ने 1 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से करीब 4 करोड़ रुपए पेनल्टी लगा दी ,जबकि गलती रोडवेज की थी।

अधिकार नहीं होने के बाद भी रोडवेज ने अनुबंध में उल्लेख किया कि आंशिक और पूर्व मार्गों पर संचालित बसें परमिट न तो रिन्यूवल होगा न ही ग्रांट होगा। शर्त के हिसाब से टेंडर में ली गई राशि बैंक गारंटी मिलने के बाद लौटा दी जाएगी, लेकिन अभी तक नहीं दी। भुगतान में 15 दिन से अधिक देरी होने पर बैंक की किस्त के लिए रोडवेज भुगतान करेगी, लेकिन 15 दिन तो क्या एक साल तक भी भुगतान नहीं किया, जिससे बसें फाइनेंसर उठा ले गए और मेंटीनेंस नहीं होने से कबाड़ हो गई।

रियायती सवारियों का भुगतान नहीं किया
रियायती सवारियों का किराया पुनर्भरण 15 दिन में करना था, जो अभी तक नहीं हुआ। रोडवेज गलती से बस नहीं चलने पर 20 प्रतिशत वाहन की कीमत का मुआवज़ा देगी। बस संचालक नहीं करता है तो 10% मुआवजा रोडवेज वसूलेगी। इसके बाद भी रोडवेज ने 21 अप्रैल 2017 को आदेश जारी करके 31 मार्च के बाद संचालित बसों का भुगतान नहीं करने आदेश जारी कर दिया। 4 महीने बाद सभी ऑपरेटर्स को एक तरफा डिफाॅल्टर घोषित कर करीब 20 करोड़ राशि जब्त कर ली।

बस ऑपरेटर्स को पुराना भुगतान नहीं किया तो नई योजना में भाग नहीं लेंगे। इसके अलावा भी रोडवेज अफसर गलत तरीके से बसों पर पैनल्टी लगा कर परेशान करते हैं, जो ऑपरेटर्स सहन नहीं करेंगे।-अनिल जैन, अध्यक्ष, ऑल राजस्थान प्राइवेट बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन

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