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आमजन की परेशानी तय:बिना पंजीकरण स्वास्थ्य विभाग में काम कर रहे 4200 हैल्थ वर्करों को हटाने के आदेश

जयपुर23 दिन पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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सोमवार से सभी कार्मिक हटते हैं तो न केवल योजनाएं बल्कि आमजन को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित होना तय है। - Dainik Bhaskar
सोमवार से सभी कार्मिक हटते हैं तो न केवल योजनाएं बल्कि आमजन को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित होना तय है।
  • सरकार की अधिकतर योजनाएं जिनके सहारे वही अब बेसहारा

चिकित्सा विभाग के एक आदेश ने उन हजारों युवकों की नौकरी के सामने संकट खड़ा कर दिया है जो करीब आठ सालों से सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अचानक आए इस आदेश के बाद अब इन युवाओं ने कोर्ट का रुख करने का निर्णय किया है।

चिकित्सा विभाग ने भले ही यह आदेश जारी कर दिया हो लेकिन विभिन्न योजनाओं और जांच कार्यों से जुड़े कार्मिकों के हटने से शनिवार से ही कार्य प्रभावित होना शुरू हो गया है। ऐसे में यदि सोमवार से सभी कार्मिक हटते हैं तो न केवल योजनाएं बल्कि आमजन को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित होना तय है। विभाग ने मेडिकल काउंसिल से पंजीयन कराने के लिए मंगलवार तक का समय दिया है। वहीं सरकार 5 साल तक के अनुभव आधार पर ही इन्हें योग्य मान सकती है।

इन कार्मिकों को10 साल बाद हटा रही है सरकार
सीएमएचओ को लिखे पत्र में कहा गया है राजस्थान पैरामेडिकल कौंसिल अधिनियम 2008 के तहत कौंसिल में बिना पंजीकरण कोई भी पैरामेडिकल प्रोफेशनल पैरामेडिकोज सम्बन्धी कार्य नहीं कर सकता। बिना पंजीयन के यह कार्य किया जाना अवैध माना जाएगा।
अब वे सभी कार्मिक हटाए जाएंगे जो कि सरकारी प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी संख्या मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के कार्मिकों की है। योजना शुरू होने के समय सरकार ने इन्हें संविदा पर लगाया था और स्थाई करने का आश्वासन दिया था। 2072 कार्मिक एमएनजेवाई में काम कर रहे हैं। इसके अलावा टीबी प्रोजेक्ट, नाको, डॉटस में भी करीब 2000 लोग काम कर रहे हैं।

कुल 4200 कार्मिक हैं। इनमें लैब टेक्नीशियन और प्रयोगशाला सहायक जैसे पदों पर काम करने वाले इन लोगों को हटाने से मरीजों का प्रभावित होना तय है, वहीं इन कार्मिकों का कहना है सरकार एक ओर तो नई भर्ती नहीं कर रही। सरकार 10 साल बाद हटा रही है। अब जबकि उम्र भी अधिक हो चुकी और वेतन भी बहुत अधिक नहीं है तो ऐसा कर सरकार धोखा दे रही है।
जेके लोन : बच्चों को नींद की दवा दे दी लेकिन जांचें नहीं हुईं
जेके लोन में शनिवार को ईईजी की जांचें नहीं होने से बच्चे काफी परेशान होते रहे। ईईजी के लिए पहले बच्चे को नींद सम्बन्धी दवाएं दी जाती हैं ताकि जांच आसानी से हो सके। बच्चों को नींद की दवाएं तो दे दी गई लेकिन उनकी जांच नहीं हो सकी।

कई माएं तो बच्चों को लेकर सुबह छह बजे से बैठी रहीं लेकिन उनकी जांच नहीं हो सकी। वहीं मामले में अस्पताल प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए और बच्चों की जांच शाम तक नहीं हाे सकी। सभी परिजनों को रविवार को जांच की बोल कर भेज दिया गया। इसके अलावा स्पारोमेट्री, सीबीसी की जांचें भी प्रभावित हुई।

कोविड में बेहतर काम
सरकार ने न केवल योजनाओं के समय बल्कि कोविड में भी इन कार्मिकों ने बेहतर काम भी किया। यहां तक कि कई लोग कोविड पॉजिटिव हुए।

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