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जातिगत जनगणना पर राजस्थान में भी माहौल गर्माने की तैयारी:ओबीसी से जुड़े संगठनों ने जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग उठाई, मुहिम को और तेज करने दिल्ली में सभा होगी,कांग्रेस नेताओं ने भी किया समर्थन

जयपुर5 महीने पहले
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बिहार और दूसरे प्रदेशों के बाद अब राजस्थान में भी जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग उठने लगी है। ओबीसी से जुड़े संगठन और कांग्रेस नेता जातिगत जनगणना का समर्थन कर रहे हैं। बीजेपी के नेता इस मुद्दे पर राजस्थान में बोलने से बच रहे हैं। ओबीसी से जुड़े संगठन जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की मुखर पैरवी कर रहे हैं। ओबीसी संगठन इस मुहिम को और तेज करने के लिए बैठकें कर रहे हैं। जातिगत जनगणना पर सियासत तेज हो गई है। इसका असर आने वाले दिनों में राजस्थान में भी दिखेगा।

जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने के लिए ओबीसी संगठन सबसे ज्यादा मुखर होकर आगे आ रहे हैं। ओबीसी संगठन अक्टूबर में दिल्ली में बड़ी सभा की तैयारियों में जुट गए हैं। 29 अक्टूबर को दिल्ली में सभा रखी गई है। इस मुहिम का कांग्रेस ओबीसी विभाग से जुड़े नेताओं ने भी समर्थन किया है। कांग्रेस ओबीसी विभाग से जुड़े नेता श्रवण तंवर, राजेंद्र सैन सहित सभी पदाधिकारियों ने जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की मुहिम का समर्थन किया है।

ओबीसी सर्व समाज और फुले समता परिषद छेड़ेगी मुहिम, दिल्ली में 29 अक्टूबर को सभा
ओबीसी सर्व समाज और अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद ने जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की मुहिम को तेज करने का फैसला किया है। फुले समता परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बापू भुजबल ने ओबीसी से जुड़े संगठनों को साथ जोड़ रहे हैं। जयपुर में इस मुद्दे पर ओबीसी से जुड़े संगठनों की बैठक करके आगे दिल्ली कूच की रणनीति बनाई गई है। 29 अक्टूबर को दिल्ली में सभा रखी गई है। दिल्ली की सभा में राजस्थान से भी बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे।

ओबीसी के नेताओं ने कहा, जिसकी जितनी संख्या वह सामने आए
ओबीसी वर्ग से जुड़े नेताओं ने एक सुर में कहा कि जब सब कुछ जातिगत आधार पर तय हो रहा है, राजनीतिक दल टिकट से लेकर सत्ता में भागीदारी तक जातिगत आधार पर दे रहे हैं तो जातिगत जनगणना के आंकड़े सामने लाने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। इससे पिछड़े वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में आसानी होगी।

गुर्जर नेता हिम्मत सिंह बोले- जातिगत जनगणना से ही पिछड़ों को हक मिलेगा
गुर्जर नेता हिम्मत सिंह गुर्जर ने जातिगत जनगणना की मांग का समर्थन करते हुए कहा- जब पशु-पक्षियों की गणना हो सकती है तो इंसानों की जातिवार जनगणना क्यों नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री पिछड़े समाज की हकमारी क्यों करना चाहते हैं? सरकार जब तक पिछड़ों की जनगणना जातिवार कॉलम बनाकर नहीं करेगी तब तक पिछड़े समाज की जातियों को उनका हक, हिस्सेदारी नहीं मिल सकेगी। पिछड़े समाज की जातिवार जनगणना कराने से बीजेपी, आरएसएस इतना डर क्यों रहे हैं। जातिगत जनगणना से वे ही डर रहे हैं।

2011 में हुई थी सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना, जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी नहीं किए थे
यूपीए सरकार ने 2011 में सामाजिक-आर्थिक सर्वे के साथ जातिगत जनगणना भी करवाई थी। उस समय भी जातिगत जनगणना पर खूब विवाद हुआ था। बाद में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी करने पर रोक लगा दी। केवल सामाजिक आ​र्थिक जनगणना के आंकड़े ही सार्वजनिक किए गए थे। अब 10 साल बाद फिर से यह मांग जोर पकड़ रही है।

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