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मोदीराज में राजस्थान के हिस्से क्या आया?:7 साल में पहले से घोषित हमारे 2 बड़े प्रोजेक्ट बंद, बीजेपी का दावा- केंद्र ने खुले हाथ से मदद की, कांग्रेस ने कहा- पग-पग पर भेदभाव

जयपुर24 दिन पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली NDA सरकार के कार्यकाल को 7 सात साल पूरे हो गए हैं। इन 7 सालों में एक बार भी ऐसा नहीं हुआ, जब राजस्थान को कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिला हो। हालांकि, केंद्र की योजनाओं का फायदा दूसरे राज्यों की तरह मिलता रहा। इस दौरान यहां मेडिकल कॉलेज 5 से बढ़कर 30 हो गए। राजस्थान में रेल, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में केंद्र ने बड़े प्रोजेक्ट्स हाथ में लेकर पूरे किए हैं। पानी के आधार पर राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा मिलने की मांग अब तक अधूरी है। दूसरी तरह, UPA सरकार में घोषित दो बड़े प्रोजेक्ट NDA सरकार में बंद हो गए।

उधर, मोदी राज के सात साल को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के अपने अपने दावे हैं। बीजेपी ने सात साल में राजस्थान के विकास में केंद्र से खुले हाथ से मदद मिलने का दावा किया है। कांग्रेस ने राज्य का विकास रोकने और भेदभाव के आरोप लगाए हैं।

मेमू कोच फैक्ट्री, रतलाम-डूंगरपुर रेल लाइन प्रोजेक्ट बंद ,ईआरसीपी का वादा भी अधूरा
यूपीए राज में भीलवाड़ा में मेमू कोच फैक्ट्री को घोषणा के सात साल बाद केंद्र सरकार ने बंद करने की घोषणा कर दी। पाली सासंद के सवाल के जवाब में इसी साल रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भीलवाड़ा में मेमू कोच फैक्ट्री बंद करने की बात कही थी। केंद्र ने आधिकारिक तौर से इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए जबकि 2013 में इसकरा शिलान्यास हो चुका था। इसी तरह डूंगरपुर-रतलाम रेल प्रोजेक्ट भी केंद्र ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। चुनाव के वक्त ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का वादा किया था, यह वादा भी अब तक अधूरा है।

पानी की मांग पर राजस्थान को विशेष पैकेज की मांग जस की तस
पानी की कमी के आधार पर राजस्थान को विशेष दर्जे देकर स्पेशन केंद्रीय पैकेज की मांग लंबे समय से चलती आ रही है। इस मांग पर सात साल में कुछ नहीं हुआ, हालांकि यह मांग चार दशक से चली आ रही है। पहले कांग्रेस सरकारों के वक्त भी यह मांग पूरी नहीं हुई।

नया फंडिंग पैटर्न लागू होने से भी राजस्थान को नुकसान
एनडीए सरकार ने केंद्रीय योजनाओं के लिए लागू किए नए फंडिंग पैटर्न से भी राजस्थान को नुकसान हुआ है। केंद्रीय योजनाओं में राज्य को अब 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा हिस्सा राशि देनी पड़ रही है, मैचिंग ग्रांट के तौर पर ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है। हालंाकि यह भार हर राज्य पर पड़ा है।

सात साल में 5 से 30 हुए मेडिकल कॉलेज, रेल, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा काम

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है- सात साल पहले प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज थे और आज 30 से ज्यादा हैं, यह केंद्र की ही देन है। पीएम किसान सम्मान निधि से प्रदेश के 66 लाख किसानों को 7367 करोड़ मिला है। रेल्वे में राजस्थान में बड़ा काम हुआ है। राजस्थान में 22,259 करोड़ रेल्वे के लिए मिले हैं, जिनसे रेलवे लाइनों के इलेक्ट्रिफिकेशन, डबल रेलवे लाइन सहित रेल इफ्रास्ट्रक्चर में काम हुआ है। स्वर्णिम चतुर्भुज, भारतमाला प्रोजेक्ट, एनएचएआई से 15 हजार करोड़ से ज्यादा मिले हैं और 67, 245 किलोमीटर सड़कें बनी हैं। सात साल में 9 लाख पीएम आवास योजना के घर बने, उज्ज्वला योजना में 63 लाख एलपीजी गैस सिलेंडर कनेक्शन दिए गए।

‘सात साल में हर कदम पर राजस्थान के साथ भेदभाव हुआ’
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ‘मोदी राज के 7 सालन राजस्थान पर भारी पड़े हैं। राजस्थन के साथ पग पग पर भेदभाव हुआ है। प्रदेश की जनता ने दोनों बार 25—25 सासंद जितवाकर भेजे, लेकिन किोई भी राजस्थान के लिए नई योजना लेकर नहीं आ सका। नई योजना तो छोड़िए केंद्र सरकार राजस्थान के हिस्से का पैसा ही समय पर नहीं दे रहा। जीएसटी और केंद्रीय करों में हिस्सा राशि का पैसा अटका रखा है। यूपीए राज की योजनाओं को बंद कर दिया। हर घर नल योजना में केंद्र पूरा पैसा नहीं दे रहा, पहले से चल रही केंद्रीय योजनाओं की हिस्सा राशि कम करने से राजस्थान को बड़ा नुकसान हुआ है। कोरोना की दूसरी लहर में राजस्थान को केंद्र ने अपने हाल पर छोड़ दिया’

‘70 साल की कमी 7 साल में पूरी नहीं हो सकती’
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा, ‘70 साल में जो कमियां रही हैं उन्हें 7 साल में दूर नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने राजस्थान के विकास में बिना पक्षपात किए मदद की है। कांग्रेस अपनी नाकामियां छिपाने के लिए केंद्र पर दोषारोपण कर रही है।’

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