90 की उम्र में सिर से बजाया हारमोनियम, VIDEO:हर तरह के म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजाने में हैं माहिर; जयपुरी के गानों पर परफॉर्मेंस

जयपुर11 दिन पहले

ढाई हजार से ज्यादा फिल्मी गाने लिखने वाले हसरत जयपुरी के फैन्स की कमी नहीं है। उनकी कला को सबसे पहले पहचाना लीजेंड ऑफ बॉलीवुड के नाम से पहचाने जाने वाले पृथ्वीराज कपूर ने। अपने बेटे और बॉलीवुड शोमैन रहे राजकपूर को हसरत जयपुरी से मिलने के लिए कहा और इसके बाद शुरू हुआ एक से बढ़कर एक बेहतरीन गानों का सिलसिला। जयपुरी के इन्हीं गानों को आज गुनगुनाया जाता है। उनके फैन्स उन्हें अलग-अलग तरह से याद करते हैं।

कुछ ऐसा ही शनिवार को उनकी 23वीं पुण्यतिथि के मौके पर जयपुर में देखने को मिला। जवाहर कला केन्द्र में हुए कार्यक्रम में उनके एक 90 वर्षीय फैन ने सिर से हारमोनियम बजाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। उस्ताद पप्पी दीवान ने हसरत जयपुरी को अनूठी श्रद्धांजलि दी। दीवाना ने सिर के जरिए हारमोनियम पर ‘जाने कहां गए वो दिन’, पंख होते तो उड़ आती रे रसिया और जालिमा... गीतों की धुन बजाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।

दीवाना की की खासी चर्चा है। उनका हारमोनियम पर ये अंदाज श्रोताओं को काफी पसंद आया।
दीवाना की की खासी चर्चा है। उनका हारमोनियम पर ये अंदाज श्रोताओं को काफी पसंद आया।

दीवाना जयपुर के शास्त्री नगर के रहने वाले हैं। वो करीब 60 सालों से राजस्थानी फिल्मों बतौर सिंगर काम करते आ रहे हैं। इनकी खासियत है कि हर तरह का इंस्ट्रूमेंट बजा लेते है। वो राजस्थानी म्यूजिक और कला को यंग जनरेशन में जिंदा रखने के लिए नव जीवन संस्था भी चलाते है।

पप्पी दीवाना ने 'डिग्गी पुरी का राजा' फिल्म में 8 गाने भी कंपोज किए थे। इसके अलावा गाने ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे, सतरंगी लहरियो, तीस मार खां में भी संगीत दे चुके हैं। दीवाना ने मात्र 10 साल की उम्र से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने मोहम्मद रफी, मुकेश जैसे बड़े दिग्गज संगीतकारों के साथ भी स्टेज पर परफॉर्म किया है।

दादा से सीखा हारमोनियम बजाना

उन्होंने हारमोनियम बजाना अपने दादाजी मोहम्मद खान से सीखा था। उनके दादा जयपुर राजघराने के दीवान खाने में सिखाने जाते थे। राजा ने उन्हें दीवाना का खिताब दिया था। इसके बाद से पीढ़ी दर पीढ़ी इस खिताब को अपने नाम के आगे लगाते हैं।

पप्पी दीवाना का प्रयास है कि राजस्थान युवाओं को असली म्यूजिक की पहचान हो और वे उससे जुड़े रहे।
पप्पी दीवाना का प्रयास है कि राजस्थान युवाओं को असली म्यूजिक की पहचान हो और वे उससे जुड़े रहे।

कृष्णायन ऑडिटोरियम में हुआ कार्यक्रम

दरअसल, शनिवार को जवाहर कला केंद्र के कृष्णायन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में हसरत जयपुरी के सदाबहार गीतों का यादगार गुलदस्ता सजाया। कार्यक्रम की शुरुआत में सूरज फिल्म के चर्चित गीत ‘बहारों फूल बरसाओ’, के जरिए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप शाह, सखावत हुसैन, खादिम हुसैन, सलामत हुसैन, लियाकत अली समेत कई कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। कलाकारों के साथ की-बोर्ड पर रहबर हुसैन, तबले पर मेहराज हुसैन, ऑक्टोपैड पर फरीद दीवाना और गिटार पर बिलाल हुसैन मौजूद रहे।

जयपुर में आज भी ताजा है हसरती की यादें
इस मौके पर हसरत जयपुरी के करीबी अब्दुल मजीद ने उनसे जुड़े किस्से बताएं। अब्दुल मजीद ने कहा- आज भी हसरत जयपुरी की यादें जयपुर में ताजा हैं। उन्होंने कहा कि हसरत जयपुरी अपनी मां फिरदौस आपा से बेहद प्यार किया करते थे, जब वें जयपुर छोड़कर मुंबई गए।

तब उनकी मां जयपुर छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। उन्होंने अपनी मां का ख्याल रखने की जिम्मेदारी मुझको दी थी। उन्होंने कहा कि हसरत जयपुरी जितने उम्दा शायर थे, उतने ही खुशमिजाज इंसान भी थे। हसरत जयपुरी फिदा हुसैन साहब उनके नाना के शिष्य थे।

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