एलिवेटेड रोड बनी सबसे बड़ा डेथ पॉइंट:लोग कूदकर दे रहे जान, तेज रफ्तार भी बरपा रही कहर

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: राकेश गुसाई

6 नवंबर 2020 की सुबह कांस्टेबल भर्ती परीक्षा शुरू होने में कुछ ही घंटे बचे थे। उस दिन जयपुर में परीक्षार्थियों की खासी भीड़ थी। पाली के माड़ाराम ने भीड़ से बचने और सेंटर तक पहुंचने के लिए शॉर्टकट का इस्तेमाल किया। उसने सबसे लंबे एलिवेटेड पुल पर चढ़ना शुरू किया। लेकिन एक घुमावदार मोड पर तेज स्पीड से आ रही BMW ने उसे बुरी तरह कुचल दिया। माड़ाराम का शरीर दो हिस्सों में बंट गया। टक्कर इतनी तेज थी कि एक हिस्सा हवा में 30 फीट उछलते हुए पुल की नीचे बनी दुकानों की छत पर जा गिरा।

हादसे की खौफनाक तस्वीर। एक्सिडेंट के बाद उछलकर इस तरह से दुकानों की छत पर गिरा था माडाराम।
हादसे की खौफनाक तस्वीर। एक्सिडेंट के बाद उछलकर इस तरह से दुकानों की छत पर गिरा था माडाराम।

2014 में इस एलिवेटेड रोड के शुरू होने से लेकर अबतक माड़ाराम जैसे 10 लोग जान गंवा चुके हैं। भारी ट्रैफिक के बीच अजमेर रोड तक बिना रुकावट पहुंचाने वाला यह एलिवेटेड सबसे बड़ा डेथ प्वाइंट बन चुका है। कई लोग यहां से कूदकर सुसाइड तक कर चुके हैं। एक सप्ताह पहले ही 45 साल का एक व्यक्ति इस पुल से कूद गया था। भास्कर ने लगातार हो रहे हादसों की वजह जानने की लिए ग्राउंड रिपोर्ट की। इसके लिए 2.9 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड पुल का सफर कार से तय किया। कई जगह ओवर स्पीड कर चेक किया। लेकिन उससे पहले टेक्निकल खामियों को समझ लिया था, ताकि कोई हादसा न हो। इस दौरान कई हैरान कर देने वाली हकीकत सामने आई...आइए जानते हैं....

2.9 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड भीड़ से निकलने के लिए सबसे आसान रास्ता है।
2.9 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड भीड़ से निकलने के लिए सबसे आसान रास्ता है।

विज्ञापन के लिए दीवार, लेकिन चेतावनी के लिए नहीं
- एलिवेटेड रोड पर बिजली के पोल से लेकर मेट्रो के पिलरों पर निजी विज्ञापनों की भरमार दिखाई दी। लेकिन वाहन चालक की जानकारी में लाने के लिए एक भी साइन बोर्ड दिखाई नहीं दिया।
- इस रोड पर बस, कार और बाइक ही चला सकते हैं, लेकिन कई ओवरलोडिंग वाहन धड़ल्ले से जा रहे थे। पूरे एलिवेटेड रोड पर कहीं भी स्पीड लिमिट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
- कुछ जगहों पर साइन बोर्ड दिखे लेकिन सबसे घुमावदार मोड़ सोडाला (60-65% कर्व) पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र जैसी कोई जानकारी नहीं दी गई।
- एलिवेटेड रोड पर कहीं नहीं लिखा गया कि साइकिल या पैदल व्यक्ति यहां से नहीं निकल सकते।

पूरी रोड पर एक भी CCTV नहीं है। अगर कोई वारदात या हादसा हो तो उसकी तह तक जा पाना मुश्किल हो जाता है। जयपुर का व्यू देखने और मौज-मस्ती करने लोग यहां आते हैं। बीयर की टूटी बोतलें इस बात का सबूत हैं।
पूरी रोड पर एक भी CCTV नहीं है। अगर कोई वारदात या हादसा हो तो उसकी तह तक जा पाना मुश्किल हो जाता है। जयपुर का व्यू देखने और मौज-मस्ती करने लोग यहां आते हैं। बीयर की टूटी बोतलें इस बात का सबूत हैं।

एक भी CCTV नहीं, शराब की बोतलें मिली
- शहर में एक्सीडेंट और क्राईम रोकने के लिए शहर को CCTV की जद में लाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। लेकिन एलिवेटेड रोड पर कहीं पर भी CCTV नहीं लगाए गए हैं।
- शहरभर में ओवर स्पीड के ऑनलाइन चालान काटने के लिए कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन एलिवेटेड रोड पर नहीं। इसी कारण से बेखौफ होकर लोग यहां पर तेज स्पीड से गाड़ी चलाते हैं।
- कैमरों से निगरानी नहीं होने के कारण, शहर के बीचो बीच गुजरने वाली एलिवेटेड रोड पर कई जगहों पर शराब-बीयर की खाली बोतलें दिखीं। जो ये बताती हैं कि यहां किसी पर कोई कंट्रोल नहीं।
- दूसरे शहरों से आने वाले लोग जयपुर को ऊंचाई से देखने और एलिवेटेड पर वाहन दौड़ाने के मकसद से यहां आते हैं। उनको स्पीड लिमिट जैसी कोई जानकारी नहीं मिलती ऐसे में हादसे होते हैं।
- जानकारी के अभाव में जयपुर दर्शन के लिए कई लोग रात को एलिवेटेड रोड पर ही गाड़ियों को रोक देते हैं। जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

2014 से 21 तक 10 की जान गई, 15 बड़े हादसे हो चुके
वर्ष 2014 में तत्कालीन बीजेपी सरकार में एलिवेटेड रोड को शुरू किया गया। जब से वर्ष 2021 तक इस रोड पर हुई दुर्घटना में 10 लोग अपनी जान गवा बैठे हैं। 15 से अधिक बड़े सड़क हादसे एलिवेटेड रोड पर हो चुके हैं। इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण ओवर स्पीडिंग और कंट्रोलिंग नहीं होना है। मौज मस्ती के लिए वाहन चालक यहां पर रफ्तार 100 से भी ऊपर ले जाते हैं। यही वजह है कि आए दिन हादसे होते हैं।

आए दिन लोग एलिवेटेड रोड से कूदकर अपनी जान दे रहे हैं।
आए दिन लोग एलिवेटेड रोड से कूदकर अपनी जान दे रहे हैं।

सुसाइड पॉइंट बन गया एलिवेटेड रोड
सोडाला सर्किल, अजमेर पुलिया, पेट्रोल पंप हनुमान मंदिर के ऊपर से निकल रही एलिवेटेड रोड सुसाइड पॉइंट बन गई है। इसी साल में यहां 3 सुसाइड हो चुके हैं। लोग बाइक कार से यहां पर आते हैं और वाहन खड़ा कर के नीचे कूद जाते हैं। खुदकुशी के शिकार हुए 2 लोग तो अभी SMS अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

प्रशासन चाहे तो क्या नहीं कर सकता
दैनिक भास्कर ने जब सोडाला चौराहे पर एलिवेटेड रोड के नीचे सटे लोगों और दुकानदारों स बातचीत को तो उन्होंने बताया कि प्रशासन चाहे तो क्या नहीं कर सकता। कम से कम सुसाइड वाली जगहों पर रेलिंग या तारबंदी ही कर देनी चाहिए। लेकिन अबतक 10 से ज्यादा मौतें होने के बावजूद किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। जब कोई हादसा होता है तब खामियों पर बात तो होती है लेकिन असल में काम नहीं होता।

जेडीए अफसरों ने मानी ये है खामियां
- जेडीए के एक्शन विवेक शर्मा ने बताया कि एलिवेटेड रोड पर स्पीड लिमिट के साइन बोर्ड नहीं हैं।
- वाहन चलाने की गति 50 KM प्रति घंटा है, लेकिन लोग 130 की स्पीड से वाहन चला रहे हैं।
- सोडाला मोड़ पर एक्सीडेंट अधिक होते हैं। इसका मेन कारण ऊपर से मेट्रो लाइन जा रही है। अधिकांश लोग मेट्रो की लाइन को ही ट्रैक करते हैं। जबकि मोड क्रॉस करते ही मेट्रो लाइन दूसरी तरफ मुड़ जाती है। लेकिन वाहन चलाने वालों का अटैंशन मेट्रो लाइन की तरफ ही रहता है। घुमाव का पता ही नहीं चलता।
- विवेक शर्मा की मानें तो सोडाला मोड़ से पहले दोनों तरफ वाइब्रेट ब्रेकअप लगा दिए जाएं तो वाहन चालक को पता चल जाएगा कि उसे स्पीड कम करनी है।
- घुमाव पर लोगों की नजर पड़े इसके लिए जेडीए इंजीनियर भी काम कर रहे हैं, जल्द ही इस पर एक्शन लिया जाएगा।