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पायलट का गहलोत पर तंज:सचिन बोले- कांग्रेस अपनी सरकार बरकरार नहीं रख पाती, पहली बार 21 और दूसरी बार 50 सीटों पर रह गए थे, सरकार रिपीट हो इसी पर हमने सुझाव दिए

जयपुर3 महीने पहले
मीडिया से बातचीत करते सचिन पायलट।

पूर्व डिप्टी CM सचिन पायलट ने राजस्थान में कांग्रेस सरकार ​रिपीट नहीं होने के मुद्दे पर नाम लिए बिना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तंज कसा है। पंजाब की तर्ज पर राजस्थान में भी समाधान करने के सवाल पर सचिन पायलट ने कहा- 'हम लोगों ने जो मुद्दे उठाए उसे आप सब जानते हो, राजस्थान में जब कांग्रेस की सरकार बनी है तो उसके बाद हम उसे बरकरार नहीं रख पाए। यह नेताओं की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। हम दोबारा चुनाव जीते हैं, पिछली बार हम 20 पर रह गए, उससे पहले 50 पर आ गए थे।'

पायलट ने कहा- 'हम चाहते हैं कि देश के चुनावों में भी हमें और ज्यादा आशीर्वाद मिले। हमने सरकार रिपीट हो सके, दोबारा हम कैसे सरकार बनाए, अपने परफॉर्मेंस से हार्ड वर्क से तो उस सिलसिले में हमने अपने सुझाव रखे थे। यह हमारा अधिकार था कि हम यह बात आलाकमान के सामने रखें और इस संदर्भ में जो हमें कहना था वह कह दिया। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने संज्ञान ले लिया, कमेटी बनी। कमेटी ने मीटिंग की, अब समय रहते निर्णय ले लेंगे।'

कांग्रेस के लिए लाठियां खाने वाले कार्यकर्ताओं को मिले सम्मान
पायलट ने कहा- 'कार्यकर्ताओं की जो उम्मीदें हैं उन्हें पूरा करना चाहिए। जब मैं साढे छह साल अध्यक्ष था तो भी मैंने कहा कि जिन लोगों ने अपना सब कुछ न्यौछावर किया, पार्टी के लिए जिन लोगों ने दिन देखा न- रात देखी, जिन लोगों ने लाठियां खाईं, अपनी जेब से पैसा खर्च किया, केस झेले, उन लोगों को पद-पोस्ट ना भी हो मान सम्मान मिलना चाहिए। यह बात हमारे वर्तमान अध्यक्ष ही बोलते हैं और पार्टी के सब नेता बोलते हैं। हम चाहते हैं कांग्रेस पार्टी का परिवार व्यापक बने, उसमें नए लोग जुड़ें। जो मेहनत करता है उसके अनुपात में उसे पॉलिटिकल रिवॉर्ड मिले यही हमारी शुरू से बात थी।'

राजस्थान पर AICC जल्द जरूरी कदम उठाएगी
सचिन पायलट ने कहा- 'राजस्थान के संदर्भ में जो मुद्दे हमने उठाए थे, विस्तार से गहन विचार-विमर्श किया है। संगठन और सरकार को जो कदम उठाने हैं, वो बहुत जल्द ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) उठाएगी। कांग्रेस में मेरा 20 साल का अनुभव है। कांग्रेस में अध्यक्ष का निर्णय हो जाता है, उसे सबको स्वीकार करना चाहिए। सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। जब निर्णय ले लिया जाता है तो उसका सब सम्मान करते हैं।'

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