सरकार-गुर्जरों में समझौते के लिए आज नहीं हुई वार्ता:REET के 233 MBC अभ्यर्थियों की OBC कैटेगरी में पोस्टिंग पर फंसा पेंच

जयपुर2 महीने पहले
सरकार-गुर्जरों में समझौते के संकेत

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार के बीच आज समझौता और सहमति नहीं हो सकी। आज भी दोनों में वार्ता नहीं हुई। इससे पहले दो दिन चली बैठकों में ज्यादातर मांगों पर सहमति बन चुकी है। आज शाम 5 बजे जयपुर के सहकार मार्ग स्थित RSEB गेस्ट हाउस में फिर से सरकार ने गुर्जर प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था। जो अब गुरुवार को होगी।

जोगेंदर सिंह अवाना, अध्यक्ष, देवनारायण बोर्ड।
जोगेंदर सिंह अवाना, अध्यक्ष, देवनारायण बोर्ड।

''ज्यादातर सभी मांगों पर सहमति बन चुकी है। एक पॉइंट पर मामला लीगल राय लेने की वजह से अटका हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने साफ निर्देश दिए हैं कि पॉजिटिव होकर मांगों का समाधान निकालना है। दो दिन की बातचीत अच्छे माहौल में हुई है। हम चाहते हैं फाइनली आज सभी मांगों पर सहमति बन जाए।''-जोगेंदर सिंह अवाना,अध्यक्ष, देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष

इस पॉइंट पर अटका पेंच ?

पुष्ट सूत्रों के मुताबिक गुर्जर प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच जिस मुद्दे पर पेंच फंसा है। वह REET लेवल-1 परीक्षा 2021 के MBC में आने वाले 233 एप्लीकेंट्स को OBC में मानते हुए पोस्टिंग देने के इंस्ट्रक्शंस जारी करने के बावजूद नौकरी नहीं देने का है। एक पत्र प्रतिनिधिमंडल ने अंग्रेजी में लिखकर सरकार को दिया है। जिसे फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से उजागर नहीं किया जा रहा है। यह मैटर मुख्यमंत्री ऑफिस लेवल पर उठाया जा चुका है। आरोप हैं कि सरकार के आदेश और अमेंडमेंट नोटिफिकेशन के खिलाफ जाकर यह एक्शन लिया गया है। MBC कैंडिडेट्स को OBC सीट्स के अगेंस्ट मेरिट के आधार पर कंसीडर करने की मांग है। जोधपुर हाईकोर्ट में रिट संख्या-CW-12444/ 2019 में सेम प्रोसेस AAG की ओर से रखने की बात कही गई है।

प्रक्रियाधीन,पेंडिंग और बैकलॉग भर्ती के मामले पर सहमति अब तक नहीं बन सकी है। गुर्जर प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में कहा है कि पेंडिंग और प्रक्रियाधीन भर्ती को लेकर अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। कोई एक्शन नहीं लिया गया। ना ही ऐसी भर्तियों की डिटेल दी गई है। चुनाव घोषणा पत्र और पिछले समझौते के मुताबिक सरकार को MBC भर्तियों के लिए बैकलॉग देना था।

सरकार इस पूरे मामले पर लीगल राय ले रही है। लीगली और संविधानिक तौर पर किस तरह इसे अमलीजामा पहनाया जाए। जिससे अन्य वर्गों का हित प्रभावित नहीं हो या टकराव की स्थिति पैदा नहीं हो, इस पर सरकार परामर्श कर रही है।

गुर्जर प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच दो दिन में पॉजिटिव बातचीत हुई है। आज तीसरे दिन शाम 5 बजे फिर से बैठक बुलाई गई है। आज सहमति बनने के संकेत हैं।
गुर्जर प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच दो दिन में पॉजिटिव बातचीत हुई है। आज तीसरे दिन शाम 5 बजे फिर से बैठक बुलाई गई है। आज सहमति बनने के संकेत हैं।

किन मांगों पर अब तक सहमति ?

2019 और 2020 की ज्यादा मांगों पर सहमति के अलावा देवनारायण गुरूकुल योजना को फंक्शनिंग में लाने, योजना की अनियमितताएं दूर करने, स्टूडेंट्स को सुविधाएं उपलब्ध कराने, जिन स्कूलों में देवनारायण योजना के तहत बच्चे नहीं पढ़ रहे हैं, उन स्कूलों को भी योजना के तहत भुगतान होने, देवनारायण योजना की 2019-2020, 2020-2021 और 2021-2022 की 13548 स्कॉलरशिप पेंडिंग होने, देवनारायण रेसीजेंशियल स्कूलों में महिला वार्डन की कमी, स्कूलों में यूनिफॉर्म, बैग, जूते केवल शुरुआती 3 महीने के लिए बच्चों को देने और बाद में पैरेंट्स के अकाउंट पर सीधा उसका भार डालने की समस्याओं पर समाधान निकालने पर सहमति बन गई है।

अब तक कहां तक पहुंची बातचीत ?

गुर्जर प्रतिनिधि मंडल और सरकार के बीच सोमवार को दो घंटे और मंगलवार को करीब 7 घंटे बातचीत हुई। दूसरे दिन बातचीत का माहौ पॉजिटिव रहा। साथ चाय-नाश्ते और भोजन का दौर भी चला। लेकिन दूसरे दिन भी सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। वार्ता अधूरी ही रही।

बैठक के बाद सरकार की ओर से मंत्री अशोक चांदना और देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह अवाना मीडिया से रूबरू हुए। दोनों ने कहा कि ज्यादातर मांगों पर सरकार सहमत है, लेकिन एक बिंदु पर सहमति नहीं बन सकी है। उसको लेकर परीक्षण करवाया जा रहा है। मंत्री अशोक चांदना ने कहा कि किन बिंदुओं पर सहमति बनी है और किन पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है,उनका अभी खुलासा नहीं किया जा सकता है। बुधवार शाम 5 बजे गुर्जर प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद ही उस बारे में कुछ कहा जा सकता है।

मांगें नहीं मानी तो राहुल गांधी का विरोध जारी रहेगा

गुर्जर नेता विजय बैंसला ने कहा-राहुल गांधी का विरोध अभी भी जारी रहेगा। जब तक हमें लिखित में कोई सहमति नहीं मिल जाती तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। लेकिन मांगें मान ली जाती हैं तो हम क्यों विरोध करेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि मंगलवार को हुई बातचीत में पॉजिटिव रेस्पांस रहा है। लेकिन सहमति नहीं बन पाई है । अगर सरकार मांगें मान लेगी तो हमें खुशी होगी। हम आमेर से हाथी बुलाकर सरकार को उस पर बैठाएंगे।

2019 और 2020 का समझौता लागू करने की हैं मुख्य मांग

गुर्जर नेता साल 2019 और 2020 में हुए समझौते के बिंदू लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसमें भर्तियों में एमबीसी आरक्षण के लंबित केस, पुरानी भर्तियों में आरक्षण का फायदा दिलाने, बैकलॉग पोस्ट में आरक्षण देकर गुर्जर समाज के युवाओं की भर्ती करने, शैडो पोस्ट क्रिएट करने, गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान समाज के लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, एससी-एसटी की तर्ज पर एमबीसी के स्टूडेंट्स को मेडिकल में फीस में छूट देने, देवनारायण योजना जैसे मुद्दे शामिल हैं।

बैठक में विजय बैंसला समेत करीब 20 गुर्जर प्रतिनिधि शामिल रहे। सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री डॉ बीडी कल्ला, गृह राज्यमंत्री राजेंद्र यादव, खेल राज्यमंत्री अशोक चांदना, देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष जोगिंदर सिंह अवाना और ब्यूरोक्रेट्स गुर्जर नेताओं से बातचीत में मौजूद रहे।

ये है 11 नवंबर 2020 का समझौता पत्र

11 नवंबर 2020 को कैबिनेट सब कमेटी और गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के बीच मांगों पर जयपुर के विद्युत भवन गेस्ट हाउस में 6 पॉइंट्स पर सहमति बनी थी।

1.गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान घायल और बाद में मरे 3 व्यक्तियों कैलाश गुर्जर, मानसिंह गुर्जर और बद्री गुर्जर के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 5-5 लाख रुपए की सहायता राशि और परिवार के आश्रित सदस्य को योग्यता के अनुसार नौकरी देने का फैसला राज्य सरकार ने लिया और नियुक्ति पत्र जारी किए।

2.एमबीसी कैटेगरी के 1252 अभ्यर्थियों को रेग्युलर वेतन श्रृंखला के बराबर फायदा देने के आदेश कार्मिक विभाग ने जारी कर दिए। इसके तहत उन सभी कर्मचारियों को परिलाभ का फायदा मिलेगा। इनके बारे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर बाकी के परिलाभ दिए जाने पर सहमति बनी।

3.गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान 11 नवंबर 2020 तक दर्ज मुकदमों की वापसी पर डिस्पोजल की प्रोग्रेस पर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति को बताया गया। बाकी मुकदमे सीरीयल वाइज वापस करने की मॉनिटरिंग के लिए त्रैमासिक बैठक करने पर सहमति बनी। साथ ही कहा गया कि दुर्भावना पूर्वक कोई नई गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।

4.प्रोसेस में चल रही भर्तियों के संबंध में एक कमेटी गठित की जाएगी। वह समिति भर्ती के प्रोसेस में माने जाने के सब्जेक्ट का लीगल राइट्स सहित अन्य राज्यों में रूल्स को लेकर परीक्षण करेगी। समिति इस संबंध में आरक्षण संघर्ष समिति का पक्ष भी सुनेगी।

5.15 फरवरी 2019 को मलारना डूंगर में हुए समझौते के पॉइंट नम्बर 5 के अनुसार भी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

6.देवनारायण योजना के तहत जयपुर में एमबीसी कैटेगरी के लिए गर्ल्स होस्टल के लिए 50 बेड स्वीकृत किए गए, 50 नए बेड और स्वीकृत करने पर सहमति बनी।

2019 का मलारना डूंगर समझौता का पॉइंट-5

15 फरवरी 2019 को मलारना डूंगर में हुए समझौते के पॉइंट 5 (समय-समय पर SBC/MBC के बकाया रिजर्व व बैकलॉग पदों को भरना) के अनुसार भी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। नवंबर 2020 के फैसले से गुर्जर समाज को उम्मीद जागी थी कि इन प्रक्रियाधीन भर्तियों में करीब 4000 पदों पर नियुक्तियां मिल सकती हैं। गुर्जर समाज के नेताओं और एडवोकेट्स का तर्क रहा कि ज्यादातर राज्यों में प्रोसेस में चल रही भर्तियों में अगर एक पद भी बाकी रह जाता है, तो उन्हें प्रक्रियाधीन भर्तियों की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे में सरकार उन राज्यों से लीगल ऑपिनियन लेती है, तो 13 भर्तियां प्रक्रियाधीन भर्तियों की श्रेणी में मानी जाएंगी। एसबीसी आरक्षण सुप्रीम कोर्ट की ओर से खत्म करने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश से राजस्थान में 2015 में ऑनगोइंग पाइपलाइन प्रक्रियाधीन अलग-अलग भर्तियों में 1252 बेरोजगारों को नियुक्ति दी गई थी।

गुर्जर समाज का यह भी आरोप रहा है कि सरकार चाहती तो चुनावी मेनिफेस्टो के सीरियल नम्बर 4 के वादे के मुताबिक प्रक्रियाधीन और बैकलॉग भर्तियों के कुल मिलाकर 25 हजार पदों पर बेरोजगार अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे सकती थी। गुर्जर समाज की आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार के बीच इन भर्तियों को लेकर लगातार पिछले 3 साल से रुक-रुककर संघर्ष जारी है। इन प्रक्रियाधीन भर्तियों को लेकर कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है। आरोप है कि सरकार शैडो पोस्ट क्रिएट कर भर्तियां नहीं दे रही है।

गुर्जर समाज इन भर्तियों में आरक्षण की मांग कर रहा है-

1. रीट भर्ती परीक्षा

2. राजस्थान पुलिस भर्ती परीक्षा

3. पंचायती राज एलडीसी भर्ती

4. कॉमर्शियल असिस्टेंट भर्ती परीक्षा

5. द्वितीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा

6. टेक्निकल हेल्पर भर्ती परीक्षा

7. नर्सिंग भर्ती परीक्षा

8. महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा

9. जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा

10. कनिष्ठ लेखाकार भर्ती परीक्षा

11. पैरामेडिकल भर्ती परीक्षा

12. कनिष्ठ अभियंता विद्युत विभाग भर्ती परीक्षा

13. ड्रग्स कंट्रोलर ऑफिसर भर्ती परीक्षा

गुर्जर नेताओं और सरकार के बीच नहीं बनी सहमति:चांदना-अवाना बोले- ज्यादातर मांगों पर सरकार सहमत, एक बिंदु पर नहीं बन सकी सहमति

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