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PCC की वर्किंग पर उठ रहे सवाल:कांग्रेस में संगठन कमजोर, इसलिए गहलोत ने खुद संभाली उपचुनाव की कमान, कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने में डोटासरा पीछे

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: आलोक खण्डेलवाल
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा। - Dainik Bhaskar
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा।

प्रदेश की चार विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर भले ही हलचल तेज हो गई हो, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी बहुत ज्यादा सक्रिय दिखाई नहीं दे रही है। तैयारी सिर्फ सरकार और सीएम की ओर से की जाती दिखाई दे रही है। जबकि, दूसरी ओर भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे के बाद भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा फिलहाल ज्यादा गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं।

असल में दो दिन पहले ही कांग्रेस की ओर से किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदेशभर में पैदल मार्च निकाले गए। पूर्व में राहुल गांधी की सभाओं में अपेक्षा के अनुरूप भीड़ नहीं आना और फिर जयपुर में निकाले गए मार्च में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का बिखरा रूप संगठन की स्थिति को डांवाडोल करता नजर आया। जयपुर में रहते हुए भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा इस मार्च में नहीं पहुंचे।

बताया जा रहा है कि डोटासरा को यह आभास हो गया था कि उनके तय कार्यक्रम के बावजूद इस मार्च में भीड़ नहीं आने का ठीकरा उनके सिर ही फोड़ा जा सकता है। ऐसे में उन्होंने इससे दूरी बना ली। हालांकि, उन्होंने अपने नहीं आने के पीछे तर्क यह दिया कि वे बीमार हैं। यह बात अलग है कि अगले ही दिन वे पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करने पहुंच गए।

सरकार का प्रयास, कांग्रेस जीत जाए
राज्य के राजसमंद, उदयपुर के वल्लभगढ़, चूरू के सुजानगढ़ और भीलवाड़ा के सहाड़ा में विधायकों के निधन के कारण उपचुनाव होने हैं। चार में से तीन सीटें कांग्रेस विधायकों और एक भाजपा विधायक के निधन से खाली हुई थी। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है। एक-सत्ताधारी पार्टी है कांग्रेस, ऐसे में कांग्रेस यदि एक सीट भी हारती है तो निश्चित ही सरकार के कामकाज की खामी पर मुहर के रूप में देखा जाएगा। दो- चार में से तीन सीटें कांग्रेस के पास ही थीं, यदि एक भी चली गई तो न केवल संख्याबल का नुकसान होगा, बल्कि यह सत्ताधारी पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा। क्योंकि, भाजपा को यदि एक के बदले एक भी मिल जाएगी तो वह उसके लिए नो प्रॉफिट- नो लॉस की स्थिति रहेगी।

संगठन सरकार पर निर्भर
राजस्थान में कांग्रेस संगठन फिलहाल सीएम अशोक गहलोत को फॉलो करता दिखाई रहा है। PCC चीफ खुद बात-बात पर गहलोत से मिलते हैं और क्या करना है, क्या नहीं, हर तरह का दिशा निर्देश लेते रहते हैं। रविवार को भी ऐसी ही मुलाकात के लिए समय निर्धारित किया गया था। जबकि उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए पिछले दिनों गहलोत सरकार ने चारों विधानसभा क्षेत्रों के लिए घोषणाओं की झड़ी लगा दी। सीएम गहलोत ने इनके लिए 158 करोड़ की 178 योजनाओं की घोषणाएं कीं। इससे पहले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भी राजसमंद के लिए करोड़ों रुपए के चुनावी वादे किए थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ये घोषणाएं तब की गईं, जबकि बजट आने में सिर्फ 5 दिन शेष थे। डोटासरा को पूरा भरोसा है कि सरकार की ये घोषणाएं इन चारों सीटों पर बेड़ा पार लगाने के काफी हैं।

कार्यकर्ताओं के निशाने पर

वास्तविकता यह है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद से ज्यादातर सीनियर और निचले स्तर के कार्यकर्ता डोटासरा की इस शैली से नाखुश ही दिखाई दे रहे हैं। ऐसे नेता व कार्यकर्ताओं का कहना है कि ने तो अभी तक राजनीतिक नियुक्तियां की गईं और न ही प्रदेश कांग्रेस की ओर से जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हुई। पैदल मार्च को भी निवर्तमान जिलाध्यक्षों के जिम्मे कर दिया गया। ऐसे में गफलत बनी रही। नेतृत्व के अभाव में राजधानी तक का मार्च पूरी तरह बिखरा हुआ नजर आया। सभी विधायक व स्थानीय नेता अपने-अपने गुटों में दिखाई दिए। ऐसी स्थिति में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं में निराशा है, बल्कि जब भी मौका मिलता है, वे उन्हें निशाने पर लेने से नहीं चूकते।

इसके विपरीत भाजपा की ओर से न केवल उपचुनाव को लेकर गंभीरता से रणनीति बना ली गई है और पार्टी के सभी संगठनों के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, बल्कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी संगठनों के पदाधिकारियों को प्रभारी के रूप में नियुक्ति दी जा रही है। यही नहीं, खुद प्रदेश के नेता व अध्यक्ष सतीश पूनिया लगातार जिलों के दौरों पर हैं। इधर, कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि उन्होंने पूर्व में सभी जिलों में दौरे कर पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया है। वे काफी समय पहले ही दौरे कर चुके हैं।

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