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हमारा सिस्टम भी कबाड़ के भरोसे:पहले ऑक्सीजन नहीं थी, अब लाने को टैंकर और सिलेंडर नहीं, कबाड़ियों को टटोल रहीं टीमें

जयपुर5 दिन पहले
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राजस्थान में ऑक्सीजन के बिगड़े मैनेजमेंट के कारण प्रशासन कुछ बड़े अस्पतालों को अपने हिसाब और सिफारिशों से सिलेंडर बांट रहा है। -सिम्बॉलिक इमेज - Dainik Bhaskar
राजस्थान में ऑक्सीजन के बिगड़े मैनेजमेंट के कारण प्रशासन कुछ बड़े अस्पतालों को अपने हिसाब और सिफारिशों से सिलेंडर बांट रहा है। -सिम्बॉलिक इमेज

राजस्थान में कोरोना से हालात कितने नाजुक हो चुके हैं इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पहले ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे थे। जैसे-तैसे केंद्र ने दूसरे राज्यों के प्लांटों से ऑक्सीजन कोटा बढ़ाया, लेकिन वहां से लाने के लिए क्रायोजेनिक टैंकर नहीं हैं। वहीं, प्लांट से मरीज तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सिलेंडर भी नहीं हैं।

देशभर के कबाड़ियों के पास पुराने ऑक्सीजन सिलेंडर ढूंढे जा रहे हैं। प्रदेश में ऑक्सीजन लाने के लिए अभी केवल 23 टैंकर हैं। चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने बर्नपुर, कलिंगनगर और जामनगर जैसे सुदूर स्थानों से ऑक्सीजन लाने के लिए 54 अतिरिक्त टैंकर मांगे हैं। वहीं, प्रदेश सरकार ने चीन और रूस से ऑक्सीजन कांसन्ट्रेटर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 15 मई से मिलने शुरू होंगे। रविवार को गहलोत की अध्यक्षता में हुई कोविड रिव्यू बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने यह जानकारी दी।

चीन से 10,000 और रूस से 1100 ऑक्सीजन कांसन्ट्रेटर लेगी राज्य सरकार
चीन से दो चरणों में पांच-पांच हजार और रूस से 1100 ऑक्सीजन कांसन्ट्रेटर की खरीद के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों ने इन देशों में स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित कंपनियों से संपर्क किया है। वहीं, सीएम गहलोत ने केंद्र से आयात किए जा रहे आॅक्सीजन परिवहन के टैंकरों में राजस्थान को जरूरत के मुताबिक टैंकर उपलब्ध कराने के लिए भी अधिकारियों से पैरवी करने को कहा।

किस अस्पताल को कितने सिलेंडर देने हैं इसका कोई सिस्टम नहीं है
प्रदेश में ऑक्सीजन के बिगड़े मैनेजमेंट के कारण प्रशासन कुछ बड़े अस्पतालों को अपने हिसाब और सिफारिशों से सिलेंडर बांट रहा है। जयपुर में ही कई अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए भी ऑक्सीजन नहीं दी जा रही है। एडीएम (प्रशासन) इकबाल खान का कहना है कि किस अस्पतालों को कितने ऑक्सीजन सिलेंडर देने हैं। इसके लिए कोई सिस्टम नहीं है। आईएएस रवि जैन की सिफारिश के अनुसार सिलेंडर दिए जाते हैं।

राजस्थान में रिकॉर्डतोड़ संक्रमण; 18,298 केस और 159 मौतें, वीकेंड कर्फ्यू के बावजूद संक्रमण की रफ्तार थम नहीं रही
राजस्थान में जन अनुशासन पखवाड़ा और वीकेंड कर्फ्यू के बावजूद कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम नहीं हो रही है। प्रदेश में रविवार को अब तक के सबसे ज्यादा 18 हजार 298 केस आए हैं। 159 मौतें भी हुईं। प्रदेश में अब एक लाख 89 हजार 178 एक्टिव मरीज हो चुके हैं। सोमवार ये आंकड़ा दो लाख के करीब पहुंचने की आशंका है। एक्टिव मरीजों के ज्यादा होने के कारण अस्पतालों में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऑक्सीजन और रेमडेसिविर नहीं मिल रही है।

प्रदेश में सबसे ज्यादा संक्रमण के केस जयपुर और जोधपुर में आ रहे हैं। यहां पर पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल नहीं होने के कारण जन अनुशासन पखवाड़ा में सख्ती नहीं हो पा रही। रविवार को भी वाहनों की आवाजाही रहती है तथा बाहरी इलाकों में थड़ी-ठेले धड़ल्ले से खोले जा रहे हैं। जयपुर में 4456 केस और 34 मौतें हुईं। वहीं जोधपुर में 2212 केस और 32 मौतें हुई हैं। वहीं, उदयपुर में 1212 संक्रमित मिले और 12 ने दम तोड़ दिया।

कोरोना: तीसरे चरण में अब तक 11 राज्यों के 86,023 लोगों ने वैक्सीन लगवाई, सबसे ज्यादा गुजरात में
नई दिल्ली, देश में कोरोना टीकाकरण के तीसरे चरण में अब तक 18 से 45 साल के 86,023 लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इनमें 11 राज्यों के लोग हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि तीसरे चरण में गुजरात में सबसे ज्यादा 51,622 लोगों को वैक्सीन दी गई। महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा। यहां 12,525 लोगों ने वैक्सीन लगवाई। देश में तीन चरणों में अब तक कुल 15,68,16,031 करोड़ डोज दी गई है।

गौरतलब है कि देश में कोरोना टीकाकरण का पहला चरण 16 जनवरी को शुरू हुआ था। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे लोगों वैक्सीन लगाई गई थी। दूसरा चरण एक मार्च और तीसरा एक मई से शुरू हुआ था। इनमें क्रमश: 45 साल से अधिक और फिर 18 से 45 साल वालों को टीका लगाया जा रहा है।

निजी केंद्रों में पहला डोज लेने वालों को सरकारी केेंद्रों में दूसरी डोज मुफ्त
स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को घोषणा की कि निजी टीकाकरण केंद्रों में वैक्सीन की पहली डोज लेने वालों को सरकारी केंद्रों में दूसरी डोज मुफ्त दी जाएगी। अभी हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 45 साल से अधिक उम्र के लोग इसका फायदा उठा सकेंगेे। यह सुविधा 30 अप्रैल या उससे पहले टीका लगवाने वालों को दी जाएगी।

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