आदर्श सोसायटी के अकाउंट में 5 लाख रुपए भी नहीं:प्रॉपर्टी नीलाम कराकर निवेशकों को दिलाएंगे डूबा हुआ पैसा, 1 साल लग सकता है

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

देश के सबसे बड़े आदर्श को-ऑपरेटिव स्कैम के 20 लाख निवेशकों को डूबा हुआ पैसा मिलने की उम्मीद बंधी है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के को-ऑपरेटिव सोसायटी के सेंट्रल रजिस्ट्रार ने रिटायर्ड आईएएस एसएस पटेल का कार्यकाल लिक्विडेटर के तौर पर एक साल के लिए बढ़ाया है। 28 नवम्बर 2022 तक उनका कार्यकाल रहेगा। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश मेहता ने भी 1732 निवेशकों के दावे पर 90 दिन में मामले के निपटारे के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद से बड़ी संख्या में भास्कर के पास निवेशकों के फोन आ रहे हैं। सबका एक ही सवाल है- हमारे रुपए हमें कब तक मिल जाएंगे। निवेशकों का डूबा धन वापस लौटाने का जिम्मा लिक्विडेटर एसएस पटेल को सौंपा गया है। भास्कर से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि आखिर कैसे और कब तक निवेशकों को रुपए वापस मिल सकेंगे।

सवाल : निवेशकों को रुपए कैसे मिलेंगे?
लिक्विडेटर : आदर्श को-ऑपरेटिव सोसायटी में निवेशकों ने कैसे और कितने रुपए जमा कराएं हैं, इसका पूरा रिकॉर्ड लिया जाएगा। एफडी के रुपए में जमा हैं या फिर सीधे ब्याज पर जमा कराए हैं। सोसायटी की प्रॉपटी बेच कर निवेशकों के रुपए लौटाए जाएंगे।

सवाल : कब तक रुपए मिलने की उम्मीद है ?
लिक्विडेटर : हम पर काफी दबाव है। रोजाना निवेशकों के फोन आ रहे हैं। ट्रिब्यूनल में सबमिशन कर दिया है। अभी पूरा प्रोसेस करने में एक साल का समय लग सकता है।

सवाल : सोसायटी के पास अकाउंट में कितने रुपए हैं ?
लिक्विडेटर : सोसायटी के अकाउंट में 5 लाख रुपए भी नहीं हैं। वैसे 24 करोड़ रुपए मिले थे, जिसे ईडी ने अटैचमेंट कर दिया था।

सवाल : प्रॉपर्टी को कैसे बेचा जाएगा ?
लिक्विडेटर : मोदी बंधुओं की पूरी प्रॉपर्टी का वैल्यूएशन कराया जाएगा। कहां पर कितनी प्रॉपर्टी है। इसकी लिस्टिंग कर रहे है। प्रॉपर्टी की वैल्यूएशन के आधार पर ऑक्शन कराया जाएगा।

सवाल : पूरी प्रक्रिया में कितना समय लग सकता है?
लिक्विडेटर : हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द निवेशकों के रुपए वापस मिल जाएं। ट्रिब्यूनल में सुनवाई में अपना पक्ष रखा है। प्रॉपर्टी वैल्यूएशन का काम जल्द ही शुरू कर देंगे।

सवाल : ट्रिब्यूनल में 4 दिसम्बर को सुनवाई में क्या रहा ?
लिक्विडेटर : ट्रिब्यूनल में 4 दिसम्बर को पेश हुए थे। ज्यूडीशियल को पूरे मामले के बारे में बताया है। उनसे रिक्वेस्ट की है।

सवाल : निवेशकों को रुपए मिलने में क्या परेशानी आ सकती है?
लिक्विडेटर : आदर्श के संचालकों ने निवेशकों के रुपए बहुत सी कंपनियां बनाकर निवेश कर दिए थे। उसमें से बहुत सी कंपनियां इन्हीं के ऑफिस बायर्स पर बनाई गई। कई संपत्तियों को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने अटैच कर लिया है। जब तक संपत्ति लिक्विडेटर के पास न हो तब तक बेचने में परेशानी रहेगी।

सवाल : जांच कर रही एजेंसियों के बीच में कोर्डिनेशन नहीं ?
लिक्विडेटर : आदर्श स्कैम की जांच ईडी, एसओजी, एसएफआईओ सहित कई एजेंसी कर रही हैं। सभी एजेंसी अपने स्तर पर मामले की जांच में लगी हैं। हमने सुनवाई में पक्ष रखते हुए हाई पॉवर अथॉरिटी का गठन कर पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कहा है।

सवाल : सोसायटी ने जिन्हें लोन दिया, उनसे कैसे वसूली होगी ?
लिक्विडेटर : सोसायटी ने फर्जी तरीके से लोन बांट दिए थे। जिन्हें लोन दिया गया। उनसे वसूली नहीं हो पाई है। जिन्हें लोन दिया गया, उनका अधिकतर मामलों में मोडगेज नहीं किया गया। उन लोगों से वसूली में काफी परेशानी हो रही है।

सवाल : सरकारी कर्मचारी से लेकर किसानों के रुपए जमा है?
लिक्विडेटर : रिटायर सरकारी कर्मचारियों ने जीवनभर की बचत निवेश कर दी थी। किसानों ने भी फसलें बेच मिले रुपए निवेश किए थे। इन्होंने निवेशकों को ज्यादा ब्याज देने का झांसा दिया। लोगों ने रुपए देने से पहले देखा नहीं वो क्या करता है और रुपयों को कहां निवेश करेगा।

20 साल पहले भी शिकायत, तब जांच होती तो नहीं डूबते हजारों करोड़
20 साल पहले यदि सरकार गंभीरता से जांच करा लेती तो शायद आज देश के 20 लाख निवेशकों के हजारों करोड़ रुपए लूटने से बच सकते थे। सोसायटी बनने के महज दो साल बाद ही 2001 में सहकारिता विभाग को शिकायत मिली थी। लेकिन विस्तृत जांच नहीं करवाई। जबकि बैंकिंग रजिस्ट्रार ने विभागीय जांच कराई। उस समय बैंकिंग रजिस्ट्रार की ओर से अंतरिम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कई खातों में क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के लिए संदिग्ध लेन-देन हुआ।

14 खाताधारकों को नियम तोड़कर लोन दिए
रिद्धि-सिद्धि वाइन्स की मालकिन इंदु टांक के खाते में 23 मार्च 2001 के दिन 2.10 करोड़ जमा करवाए। फिर उस रकम से उदयपुर के आबकारी विभाग के नाम 11 अलग-अलग रकम के ड्राफ्ट बनवाए गए। इसके तीन दिन बाद इन ड्राफ्ट को कैंसिल करवा लिया व नकद रकम खाते से निकाल ली गई। ऋण लेने के लिए जमीन के फर्जी कागजात जमा करवाए गए। रिपोर्ट में 14 ऐसे खाताधारकों के नाम लिखे, जिन्हें बैंकिंग के नियमों को ताक पर रखकर ऋण दिया। इन सब लोगों को 8.60 करोड़ से ज्यादा का ऋण दिया गया था। जिसमें क्रेडिट लिमिट को समय-समय पर बढ़ाया था।

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