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कानून के खिलाफ कानून:पंजाब ने किसानों को समर्थन मूल्य की गारंटी दी; गहलोत बोले- राजस्थान भी ऐसा करेगा, अचानक कैबिनेट बैठक बुलाकर की चर्चा

जयपुर/चंडीगढ़एक महीने पहले
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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध बिल पारित किए हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा
  • केंद्रीय कृषि कानूनों को खारिज करने के लिए पंजाब सरकार लाई प्रस्ताव, ऐसा करने वाला पहला राज्य
  • पंजाब सरकार ने 4 विधेयक पेश किए; एमएसपी से कम कीमत पर धान या गेहूं की खरीदी-बिक्री पर 3 साल की सजा और जुर्माना लगेगा

पंजाब सरकार ने मंगलवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्रीय कृषि कानूनों को खारिज करने के लिए तीन विधेयक पारित किए। इसमें किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने का प्रस्ताव है। वहीं, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने शाम को अचानक कैबिनेट की बैठक बुलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध बिल पारित किए हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा। बैठक में केंद्र के 3 नए कृषि कानूनों से प्रदेश के किसानों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा हुई। नए कृषि कानूनों से जरूरी वस्तु अधिनियम के तहत सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न कृषि जिन्सों के स्टाॅक की अधिकतम सीमा हटाने से कालाबाजारी बढ़ने, अनाधिकृत भंडारण व कीमतें बढ़ने की आशंका है।
प्रदेश में 7 लाख किसान, एमएसपी पर सिर्फ 25% पैदावार ही बिकती है
प्रदेश में करीब 7 लाख किसान हैं। कुल पैदावार में सिर्फ 25% ही एमएसपी पर बिकती है, बाकी बाजार मूल्य पर बेची जाती है। बैठक में चर्चा हुई कि व्यापारियों द्वारा किसानों की फसल खरीद के प्रकरण में विवाद की स्थिति में निपटारे के लिए सिविल कोर्ट के हक बहाल हों। राजस्थान में ऐसे प्रकरणों में फसल खरीद के विवादों के मंडी समिति या सिविल कोर्ट से निपटारे की व्यवस्था पूर्ववत रहे।

पंजाब सरकार ने 4 विधेयक पेश किए; एमएसपी से कम कीमत पर धान या गेहूं की खरीदी-बिक्री पर 3 साल की सजा और जुर्माना लगेगा

पंजाब विधानसभा में बुलाए गए विशेष सत्र के दूसरे दिन सदन ने एकराय से केंद्र के कृषि कानून और प्रस्तावित बिजली विधेयकों को खारिज कर दिया। ऐसा करने वाला पंजाब पहला राज्य बन गया है। इसको लेकर लाए गए प्रस्ताव में नए सिरे से अध्यादेश लाने की मांग की गई है, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने का वैधानिक अधिकार मिल सके।

समर्थन मूल्य की गारंटी देते हुए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को 4 विधेयक पेश किए, जो पास हो गए। इनमें यह प्रावधान भी है कि एमएसपी से नीचे कीमत पर धान या गेहूं की खरीदी या बिक्री करने पर कम से कम 3 साल की सजा व जुर्माना हो सकता है। सीएम अमरिंदर बोले- सरकार गिरने का डर नहीं, इस्तीफा भी दे सकता हूं।

ऐसे समझें, क्या बदलाव हुए विवाद निपटारे को कोर्ट तक जा सकते हैं किसान

पहला बिल - एमएसपी से कम पर सजा का प्रावधान
इस बिल के तहत एमएसपी से कम कीमत पर उपज की बिक्री /खरीद नहीं की जा सकेगी और उल्लंघन पर 3 साल की सजा और जुर्माना होगा। यह केंद्र के (सशक्तिकरण और सुरक्षा) एक्ट में संशोधन करता है।

दूसरा बिल - खरीद को यकीनी बनाने का प्रावधान
इस बिल में राज्य में गेहूं या धान की फ़सल की बिक्री या खरीद एमएसपी से कम कीमत न होने को यकीनी बनाया जा सके। किसानों को तंग करने या कम कीमत देने पर सज़ा देने का भी प्रावधान किया गया है।
तीसरा बिल - जमाखोरी और काला बाजारी रोकेगा
उपभोक्ताओं को कृषि उपज की जमाखोरी और काला-बाज़ारी से बचाने के लिए और किसानों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा जरूरी वस्तुएं (संशोधन) बिल भी सदन में पारित किया गया।
चौथा बिल - छोटे किसानों की जमीन कुर्क नहीं होगी
इस बिल में किसानों को 2.5 एकड़ से कम ज़मीन की कुर्की से राहत दी गई है। सरकार ने छोटे किसानों और अन्यों को 2.5 एकड़ तक की ज़मीन की कुर्की या फरमान से पूरी छूट देने की व्यवस्था की है।

सुगबुगाहट: छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष सत्र का प्रस्ताव भेजा लेकिन राज्यपाल ने लौटा दिया

छत्तीसगढ़ सरकार ने भी विशेष सत्र बुलाने के लिए नोटिफिकेशन के लिए राज्यपाल अनुसुइया उइके के पास प्रस्ताव भेजा। राज्यपाल ने इसे लौटाते हुए पूछा- 56 दिन पहले ही मानसून सत्र बुलाया गया था, अब क्या ऐसी परिस्थिति आई कि विशेष सत्र बुलाना पड़ रहा है। इसके जवाब में सरकार ने कहा- केंद्रीय कानून से किसानों का हित प्रभावित होगा, इसलिए राज्य सरकार प्रभावी कानून बनाना चाहती है।

सर्वे: 50% किसान कृषि कानूनों के खिलाफ, उनमें से एक तिहाई इसके बारे में जानते नहीं हैं

कृषि कानूनों पर सियासत के बीच एक सर्वे के निष्कर्षों में दावा किया गया है कि देश में 50% से ज्यादा किसान इन कानूनों के खिलाफ हैं। इनमें से एक तिहाई को इसके प्रावधानों की जानकारी नहीं है। 35% ने कानूनों का समर्थन किया है, इनमें से 18% को भी इसका पता नहीं है। यह सर्वे गांव कनेक्शन ने 3 से 9 अक्टूबर के बीच 16 राज्यों के 53 जिलों में किया। इस दौरान 5,022 किसानों की राय ली गई।

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