गोवंश लंपी की चपेट में:लम्पी पर पशुपालन मंत्री कटारिया से सवाल-जवाब, भाजपा नेता 10 गाय भी नहीं पालते, हल्ला ज्यादा करते हैं

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: सौरभ भट्‌ट
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विशेष संवाददाता सौरभ भट्ट ने पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया से लंपी प्रकोप संबंध में सीधी बात की। - Dainik Bhaskar
विशेष संवाददाता सौरभ भट्ट ने पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया से लंपी प्रकोप संबंध में सीधी बात की।

लंपी का प्रकोप अब महामारी का रूप ले चुका है। देश के 13 राज्यों का गोवंश लंपी की चपेट में आ चुका है, जिनमें केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला का गृह राज्य गुजरात भी शामिल है। राजस्थान में भाजपा ही नहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी लंपी काे लेकर सरकार को लेकर निशाना साध रहे हैं। भास्कर के विशेष संवाददाता सौरभ भट्ट ने पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया से इस संबंध में सीधी बात की-

प्रदेश में लंपी से हजारों गायें मर चुकी। भाजपा का आराेप है कि कांग्रेस सरकार गायों को लेकर संवेदनशील नहीं है?
भाजपा का एक नेता भी ऐसा नहीं है जो 10 गायें भी पालता हो। लेकिन ये लोग गायों को लेकर सबसे ज्यादा हो-हल्ला करते हैं। मेरे विधानसभा क्षेत्र में तीन बड़ी गौशालाएं हैं। मैं हर रोज जाकर जानकारी लेता हूं। भाजपा ये बताए कि गुजरात में लंपी के प्रकोप की क्या स्थिति है। वहां जीरो इंफ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन वहां गायों की मौत पर भाजपा का कोई नेता नहीं बोलता।

रघु शर्मा ने कहा था कि उनके यहां गायें मर रही हैं और आपने सारा स्टाफ जोधपुर लगा दिया?
पहले फेज में लंपी का प्रकोप बाड़मेर, जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान में था। इसलिए पशु चिकित्सकों के स्टाफ को हमने वहां भेजा। लेकिन जब पूर्वी राजस्थान में यह प्रकोप बढ़ने लगा तो हमने स्टाफ वापस उन जिलों में भेज दिया। रघु शर्मा को मैंने यह बता दिया था। इसके अलावा हमने पशुपालन विभाग में 1436 नई भर्ती निकाली जिनमें से तुरंत 700 को नियुक्ति दे भी दी।

लंपी रोकने के लिए नई वैक्सीन लाए जाने की बात की गई थी। कब आएगी?
ये प्राेपेगेंडा ज्यादा करते हैं। वैक्सीन का प्रचार करने के लिए इन्हाेंने यहां आकर फोटो खिंचवा ली। कहा कि लंपी प्रो वैक्सीन 96% तक असरदार रहेगी। लेकिन वैक्सीन बनाने काे अभी लाइसेंस ही नहीं मिला। उत्पादन तो बाद की बात है। भारत सरकार ने तो दवा की गाइडलाइन तक नहीं बनाई।

लंपी से मरने वाले गोवंश का निस्तारण भी नियमानुसार नहीं किया जा रहा?
डिस्पोजल का काम नगर पालिका का होता है। या फिर बीडीओ और पंचायत समिति का। ठेके भी पंचायत समितियां देती हैं। सरकार ने कलेक्टरों को इसके लिए फंड भी दिया है। पशुपालन विभाग के अलावा आरसीडीएफ, गोपालन विभाग भी गायों से जुड़ा है।