राजस्थान:विदेशी सरजमीं पर राजस्थानी कला–संस्कृति का डंका बजा रहे है धोद बैंड के रहीस भारती, दिला रहे है स्थानीय कलाकारों को विशेष पहचान

जयपुरएक वर्ष पहले
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110 से ज्यादा देशों में 2500 से अधिक म्यूजिक कंसर्ट कर राजस्थानी संस्कृति की पहचान बना चुका है धोद बैंड। अपने कलाकारों के साथ रईस भारती - Dainik Bhaskar
110 से ज्यादा देशों में 2500 से अधिक म्यूजिक कंसर्ट कर राजस्थानी संस्कृति की पहचान बना चुका है धोद बैंड। अपने कलाकारों के साथ रईस भारती
  • 110 से ज्यादा देशों में 2500 से अधिक म्यूजिक कंसर्ट कर पहचान बना चुका है धोद बैंड

कोरोना महामारी से दुनिया परेशान है। एक ओर जहां लोगों के रोजगार जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर जयपुर के रहीस भारती मिसाल पेश कर रहे हैं। वे कोरोना काल में भी सीकर, मलिकपुर, जयपुर, जोधपुर और शेखावटी जैसे क्षेत्रों के स्थानीय कलाकारों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। इन दिनों वह प्रदेश की यात्रा पर है जो राजस्थान के स्थानीय कलाकारों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वह अपने साथ फ्रांस से 50 कलाकारों के लिए निमंत्रण भी लाए हैं।

इन स्थानीय कलाकारों के सामने फ्रांस में ढोल, तबला घूमर, लोक नृत्य, नगाड़ा और भवई की शानदार प्रस्तुति देने का मौका है। बता दें कि धोद बैंड जयपुर का है और दुनिया भर में इसकी अपनी अलग पहचान है और इस विपरीत परिस्थितियों में ऑनलाइन कॉन्सर्ट कर रहे है जिससे राजस्थान के छोटे-छोटे गांवों के कलाकारों को रोजगार मिल सके।

अपने साथी कलाकारों के साथ रईस भारती (लाल कुर्ते में)
अपने साथी कलाकारों के साथ रईस भारती (लाल कुर्ते में)

प्रदेश में शादी विवाह टलने से बेरोजगार हुए, अब विदेश में बजाएंगे

कोरोना काल में विवाह शादी और कार्यक्रम टल रहे हैं ऐसे में शादी-विवाह में गाने बजाने वाले देसी कलाकारों को धोद बैंड हर साल की तरह इस साल भी फ्रांस ले गया है। बैंड की इन दिनों ऑस्ट्रिया, स्वीट्जरलैंड और फ्रांस जैसे देशों में लाइव कन्सर्ट की तैयारी चल रही है और जैसे ही कोरोना से कुछ निजाद मिलती है वैसे ही अपनी प्रस्तुति देने वाले है।

बैंड के कलाकार जहां पुर्तगाल के इंटरनेशनल फैस्टिम फेस्टिवल, हंगरी बुडापेस्ट के सिगेट फेस्टिवल, बेल्जियम के कुलर कैफे फेस्टिवल और कोस्टिन फोक जैसे लोकप्रिय उत्सवों में प्रस्तुति देंगे। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में अगर कोरोना से निजाद मिलती है तो यूरोपीय देशों के भिन्न-भिन्न फेस्टिवल में कार्यक्रम करने वाले है।

रोचक हैं धोद बैंड की उपलब्धियां

धोद बैंड की शोहरत का बिगुल पूरी दुनिया में बज चुका है। रहीस भारती ने बताया कि डिज्नीलैंड में लगातार चार महीने तक प्रस्तुति देने वाला धोद बैंड भारत का पहला बैंड है। साल 2019 में मई से सितंबर महीने तक बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी। जिसमें 50 लाख से ज्यादा दर्शकों ने इसका लुत्फ उठाया। जबकि बैंड अपने छोटे से सफर में अब तक 700 से अधिक कलाकारों को मंच तथा एक अलग पहचान दे चुका है।

20 साल पहले वर्ष 2000 में सीकर जिले के छोटे से गांव धोद से शुरू हुआ सफर आज दुनिया के विराट मंचों तक पहुंच चुका है। भारती और धोद बैंड की यह यात्रा बिना रुके अभी जारी है। यह बैंड यूरोप के पॉप रॉक स्टार्स के साथ म्यूजिकल मीटिंग्स भी कर चुका है। वहीं 110 से ज्यादा देशों में 2500 से अधिक म्यूजिक कंसर्ट में अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन कर चुका है। आपको बता दें कि फ्रांस के जाने माने लेखक मार्टिन ले कोज भारती के जीवन पर आधारित किताब ‘राजस्थान की दिल की धड़कन रहीस भारती' लिख रहे है जो संभवतः सितम्बर महीने में प्रकाशित होगी।

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