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अनोखे टेंडर पर हाईकोर्ट की रोक:रेलवे -जो फर्म लोडिंग का काम करेगी उसे सालाना 17 लाख देंगे, फर्म- हमें 1 पैसा दिया जाए फिर काम करेंगे

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: ​​​​​​​शिवांग चतुर्वेदी
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हाईकोर्ट का स्टे, कहा- ये इतने कम में मजदूरों को क्या वेतन देगा। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट का स्टे, कहा- ये इतने कम में मजदूरों को क्या वेतन देगा।

रेलवे ने कोरोना में स्टेशनों पर खानपान, साफ सफाई, पार्किंग जैसे काम संभाल रही निजी फर्मों/कॉन्ट्रैक्टर को सालाना ली जाने वाली लाइसेंस फीस में राहत दी है। इससे स्टेशनों पर काम कर रहीं निजी फर्मों को बड़ी राहत मिली है। लेकिन इस बार ये राहत रेलवे को आगे से एक निजी फर्म ने दी, जो कि एक महकमे में एक बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। आखिर बने भी क्यूं नहीं क्योंकि रेलवे जिस काम को करवाने के लिए 17 लाख जितना न्यूनतम भुगतान कर रही थी।

वहीं एक निजी फर्म ने उसे सालाना सिर्फ एक पैसे का भुगतान लेकर करने की पेशकश कर दी। ऐसे में रेलवे आश्चर्यचकित तो रह गया, लेकिन इतने कम भुगतान में काम करने वाली फर्म को काम की जिम्मेदारी भी सौंप दी। इधर हाईकोर्ट ने रेलवे और निजी फर्म की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए रेलवे के इस निर्णय पर रोक लगा दी।

हाईकोर्ट ने कहा- श्रमिकों को भुगतान कैसे होगा
रेलवे के इस निर्णय को अन्य फर्मों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिसके बाद 14 सितंबर को हाईकोर्ट ने रेलवे के इस निर्णय पर स्टे दे दिया। साथ ही सवाल किया गया कि रेलवे को तो इससे फायदा होगा। लेकिन इस कार्य को करने वाले श्रमिकों को फर्म कहां से भुगतान करेगी ? रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि इससे पूर्व में भी कई मंडलों में इस तरह मिनिमम रेट डालकर ठेके लिए गए हैं।

जो बाद में असफल हो जाते हैं। दरअसल ये निजी फर्म कई काम की जिम्मेदारी ले लेती हैं। ताकि उनकी फर्म उस क्षेत्र में प्रवेश कर सकें और उनकी क्रिडेंशनल बढ़ सकें। वहीं इस तरह कम दरों पर काम लेने के बाद फार्मों द्वारा भ्रष्टाचार बढ़ाया जाता है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट की रोक के बावजूद भी फर्म अभी तक काम कर रही है।

ये है पूरा मामला

रेलवे ने हाल ही में ट्रेनों से आने और जाने वाले पार्सल (माल) को चढ़ाने और उतारने (लोडिंग/अन-लोडिंग) के लिए टेंडर जारी किया। तीन साल के इस काम के लिए रेलवे फर्म को 52 लाख रुपए का भुगतान करेगा। यानी हर साल करीब 17.33 लाख रुपए भुगतान किया जाएगा। इस टेंडर में 4 फर्मों ने आवेदन किया।

एक फर्म ने 30 लाख रुपए सालाना, वहीं दूसरी ने 25 लाख सालाना भुगतान की मांग की। लेकिन जयपुर की ही एक फर्म के आवेदन ने अन्य प्रतिभागियों और रेलवे को आश्चर्यचकित कर दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि इस फर्म ने महज एक पैसा भुगतान किए जाने पर काम करने के लिए आवेदन किया। ऐसे में रेलवे ने अपना मुनाफा देखते हुए, बिना बातचीत के ही फर्म को टेंडर जारी कर दिया।