10 तस्वीरों में खूबसूरत राजस्थान:यहां है 200 फीट गहराई और 1800 सीढ़ियों वाला अद्भुत आकार का कुंड, रहस्यमयी कहानियों वाला किला; जंगलों में बसती खूबसूरती

जयपुरएक वर्ष पहलेलेखक: स्मित पालीवाल

राजस्थान का नाम आते ही लोगों के जहन में रेगिस्तान की परिकल्पना उभरने लगती है। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर आज हम राजस्थान के ऐसे स्थानों के बारे में बताएंगे, जो अब तक लोगों की नजरों से दूर थे। पिछले कुछ वक्त में हुए विकास के चलते न सिर्फ राजस्थान बल्कि भारत की पहचान बन चुके हैं। इन्हें देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में विदेशी सैलानी भी भारत आते हैं। आज वर्ल्ड टूरिज्म डे के मौके पर राजस्थान की कुछ अनोखी जगह तस्वीरों के जरिए देखिए..

सलमान खान और सोनाक्षी सिन्हा फिल्म दबंग के दौरान पन्ना मीना कुंड के किनारे कर चुके हैं डांस।
सलमान खान और सोनाक्षी सिन्हा फिल्म दबंग के दौरान पन्ना मीना कुंड के किनारे कर चुके हैं डांस।

जयपुर के आमेर में बना पन्ना मीणा कुंड अद्भुत आकार की सीढ़ियों और अष्टभुजा के किनारों की वजह से पर्यटकों की पहली पसंद बन चुका है। कुंड के चारों तरफ किनारों पर बनी छोटी छतरियां और मंदिर जहां इसे अनोखा स्वरूप देते हैं। वहीं 200 फीट गहराई और 1800 सीढ़ियों की वजह से यह कुंड पर्यटकों को रोमांचित भी कर देता है। इस कुंड को देखने के लिए अब हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक जयपुर आने लगे हैं। पन्ना मीणा कुंड न सिर्फ पर्यटकों बल्कि के बॉलीवुड कलाकारों की भी पहली पसंद बन चुका है। कई फिल्मों की शूटिंग भी कुंड के किनारे हो चुकी है।

प्री वेडिंग शूट के लिए कपल्स की पहली पसंद बन चुकी है बाहुबली हिल्स।
प्री वेडिंग शूट के लिए कपल्स की पहली पसंद बन चुकी है बाहुबली हिल्स।

लेकसिटी उदयपुर अपनी खूबसूरत झीलों के लिए दुनियाभर में काफी मशहूर है। पिछले कुछ वक्त से बड़ी तालाब के किनारे बनी बाहुबली हिल्स झीलों के शहर उदयपुर की पहचान बन चुकी है। उदयपुर से महज 15 किलोमीटर दूर बड़ी तालाब के किनारे कछुए के आकार में बनी अरावली पर्वत श्रंखला देश-दुनिया के पर्यटकों को काफी लुभाती है। यहां हर वक्त सैकड़ों की संख्या में सैलानियों की भीड़ देखने को मिलती है। अब से कुछ वक्त पहले तक बाहुबली हिल्स भी बड़ी तालाब के पहाड़ के नाम से पहचानी जाती थी, लेकिन बाहुबली फिल्म में दिखाई गई पहाड़ियों जैसी दिखने की वजह से अब इसे बाहुबली हिल्स के नाम से पहचाना जाने लगा है।

कोटा की मुकुंदरा हिल्स दुनियाभर में राजस्थान की पर्वत शृंखला की पहचान बन चुकी है।
कोटा की मुकुंदरा हिल्स दुनियाभर में राजस्थान की पर्वत शृंखला की पहचान बन चुकी है।

कोटा के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक मुकुंदरा हिल्स नेशनल पार्क कोटा शहर से 56 किलोमीटर दूर बूंदी के पास स्थित है। इसे दर्रा वन्यजीव अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है। यहां विदेशी जानवरों के साथ ही विभिन्न पौधों की प्रजातियों, सांभर हिरण, एशियाई हाथी और एल्क निवास करते हैं। पहले यह जगह राजा महाराजाओं के शिकार के लिए पहचानी जाती थी। अब मुकुंदरा हिल्स की अनोखी बनावट न सिर्फ कोटा बल्कि देशभर में राजस्थान की पहचान बन चुकी है। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में सैलानी पहुंचते हैं।

राजस्थान के रेगिस्तान की परिकल्पना को साकार करते हैं जैसलमेर के सम।
राजस्थान के रेगिस्तान की परिकल्पना को साकार करते हैं जैसलमेर के सम।

राजस्थान के जैसलमेर में रेतीले धोरे रेगिस्तान का अहसास कराते हैं। पिछले कुछ वक्त में जैसलमेर सम का रेगिस्तान राजस्थान के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक बन गया है। यह 40 से 60 मीटर लंबे रेतीले टीलों पर आप कैमल सफारी के साथ ही दुबई की तर्ज पर एडवेंचर मोटर राइड का आनंद भी उठा सकते हैं। यहां बड़ी संख्या में देश ही नहीं बल्कि विदेशी सैलानी भी जैसलमेर का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं।

मानसून के दौरान स्वर्ग सा सुंदर दिखता है बांसवाड़ा का चाचाकोटा।
मानसून के दौरान स्वर्ग सा सुंदर दिखता है बांसवाड़ा का चाचाकोटा।

हरियाली से लथपथ बांसवाड़ा राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में बसा हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ माही नदी का लगभग 40 किलोमीटर का क्षेत्र बांसवाड़ा की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। माही के बैकवाटर में 107 से ज्यादा छोटे-बड़े टापू बांसवाड़ा की पहचान बन चुके हैं। यहां आज भी आदिवासी अंचल के लोग प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

पाली में लेपर्ड इंसानों पर हमला नहीं करते, माना जाता है कि यहां के लेपर्ड मानव प्रेमी हैं।
पाली में लेपर्ड इंसानों पर हमला नहीं करते, माना जाता है कि यहां के लेपर्ड मानव प्रेमी हैं।

राजस्थान का पाली अब लेपर्ड कंजर्वेशन क्षेत्र की वजह से देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। पाली के जवाई बांध क्षेत्र में 50 से ज्यादा लेपर्ड के साथ ही मगरमच्छ और 150 से अधिक प्रजाति के पक्षी निवास करते हैं। इन्हें देखने के लिए अब देशी के साथ विदेशी सैलानियों के साथ बड़ी संख्या में बॉलीवुड के कलाकार भी पाली पहुंचते हैं। बॉलीवुड कलाकारों की चहलकदमी के बाद अब पाली में फिल्म सिटी बनाने की कवायद भी तेज हो गई है। इसके लिए धरातल पर भी काम शुरू कर दिया गया है।

देशभर में भूतों के किले के नाम से मशहूर है भानगढ़।
देशभर में भूतों के किले के नाम से मशहूर है भानगढ़।

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ किला। यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर में भूत-प्रेत का साया है। दूरदराज से बड़े पैमाने पर लोग यहां घूमने के लिए आते हैं, लेकिन रात रुकने की साहस आज तक किसी व्यक्ति ने नहीं किया है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यहां पर रात को पायल और घुंघरू की आवाज सुनाई देती है। भानगढ़ का नाम सुनते ही लोगों के दिल में दहशत की घंटी बजने लगती है। इस किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था।

करौली में 160 फीट ऊंचाई से गिरता है झरना।
करौली में 160 फीट ऊंचाई से गिरता है झरना।

करौली से 50 किमी दूरी पर करणपुर क्षेत्र का प्रसिद्ध महेश्वरा धाम आस्था का केन्द्र होने के साथ पर्यटन का केन्द्र बिंदु भी बना हुआ है। राजस्थान में 160 फीट ऊंचाई से गिरने वाला यह तीसरे नंबर का झरना है। यहां पहुंचने के लिए खिजूरा गांव से कच्चा रास्ता बना हुआ है। अब से कुछ वक्त पहले तक यह इलाका डाकुओं के लिए काफी प्रसिद्ध था, लेकिन अब यहां पर्यटन व्यवसाय के पंख लगने लगे हैं।

चूरू के छापर गांव में रूस और कजाकिस्तान से पहुंचते हैं पक्षी।
चूरू के छापर गांव में रूस और कजाकिस्तान से पहुंचते हैं पक्षी।

राजस्थान के चुरू जिले के सुजानगढ़ में बना छापर गांव अब देशभर में काले हिरणों के लिए पहचाना जाने लगा है। हर साल जैव विविधता और भोजन की तलाश में कजाकिस्तान, रूस, साइबेरिया और मंगोलिया से प्रवासी पक्षी भी ताल छापर सेंचुरी पहुंचते हैं। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी भी छापर गांव पहुंचने लगे हैं। वन्यजीव प्रेमियों की माने तो छापर गांव में एक विशेष तरह की घास पाई जाती है। इसे देसी भाषा में मोथिया कहा जाता है, जो काले हिरणों के साथ पक्षियों को काफी पसंद होती है।

भारत में 9% नमक उत्पादन जयपुर की सांभर झील से किया जाता है।
भारत में 9% नमक उत्पादन जयपुर की सांभर झील से किया जाता है।

राजस्थान के सांभर में भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। यहां पर बड़ी मात्रा में नमक उत्पादन किया जाता है। सांभर झील पर्यटन में भी देश में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बनी इस झील को निहारने के लिए हर साल लाखों की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं। झील की अनोखी बनावट और प्राकृतिक सौंदर्य की वजह से यहां दर्जनों बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी होती है।

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