भास्कर एक्सक्लूसिव: 2022 तक मिलेगा 1668 क्यूसेक पानी:राज्यों के जल विवाद सुलझते ही नहीं, हमने दो दशक पुराना सुलझाया; पंजाब से 3.5 करोड़ लोगों को डेढ़ गुना पानी मिलेगा, सिंचाई क्षमता भी दोगुनी

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: डीडी वैष्णव
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मई 2022 तक सरहिंद फीडर की मरम्मत होते ही मिलेगा 200 की जगह 1668 क्यूसेक पानी। - Dainik Bhaskar
मई 2022 तक सरहिंद फीडर की मरम्मत होते ही मिलेगा 200 की जगह 1668 क्यूसेक पानी।

देशों के हों या राज्यों के बीच, पानी के विवाद नहीं सुलझते। लेकिन राजस्थान व पंजाब ने ऐसा विवाद सुलझाकर अलग ही मिसाल पेश की है। दोनों राज्यों के बीच पानी ले जाने वाले कॉमन कैरियर सरहिंद फीडर की मरम्मत के लिए दो दशक बाद न सिर्फ सहमति बन गई, बल्कि 100 किमी में से 45 किमी की मरम्मत भी कर दी गई है। अब 55 किमी के टेंडर निकाले गए हैं। दरअसल यह फीडर 60 साल से लगातार चलने के कारण पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था।

2022 मई तक मरम्मत होने के बाद इस लाइन से राजस्थान को रोजाना 1668 क्यूसेक पानी मिलेगा मिलेगा जबकि 25 साल से मात्र 200 से 300 क्यूसेक पानी ही मिल रहा था। यानी 1368 क्यूसेक अतिरिक्त पानी पंजाब ही उपयोग कर रहा था। इंदिरा गांधी नहर से अभी पेयजल के लिए दस जिलों की 3.5 करोड़ आबादी को अधिकारिक तौर पर 2200 क्यूसेक पानी आवंटित है। सरहिंद फीडर से अतिरिक्त पानी मिल जाएगा तो आबादी को करीब 3400 क्यूसेक पानी मिलने लगेगा। वहीं हनुमानगढ़ व गंगानगर में अभी 34,548 हेक्टेयर खेतो में संचाई हो पानी है जो बढ़कर 69,096 हेक्टेयर की हो सकेगी।

1. अशोक गहलोत, (राजस्थान सीएम)- कैप्टन को छोटे क्लोजर के लिए मनाने में सफल रहे
तीसरा कार्यकाल संभालते ही सरहिंद फीडर की मरम्मत का काम हाथ में लिया। सीधे पंजाब के सीएम कैप्टन से बात की और बताया कि ज्यादा दिन तक क्लोजर लेने से पश्चिमी राजस्थान में जल संकट हो जाएगा। खुद जाकर कैप्टन से चंडीगढ़ में मिले। इसी में एमओयू भी कर लिया।

2. कैप्टन अमरिंदर सिंह (पंजाब सीएम)- राजस्थान के नहर क्लोजर जैसा मॉडल पंजाब में भी अपनाया
सीएम गहलोत के बताने के बाद मुद्दे को गंभीरता से लिया। बैठक में दोनों राज्यों के अफसरों को आमने-सामने बिठाकर कई सालों से बने हुए गतिरोध को दूर कराया। 90 दिन के क्लोजर को 70 दिन में करने की सहमति दी। राजस्थान मॉडल पर पंजाब ने अपने यहां भी काम शुरू कराया।

3. नवीन महाजन (राजस्थान के प्रमुख सचिव)- सहमति के लिए जमीन तैयारी की, दोनों राज्यों के सीएम को एक टेबल पर लाए
इन्होंने ही दोनों राज्यों के बीच सहमति की जमीन तैयार की। दो साल पूर्व राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत व पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को एक ही टेबल तक ले जाने में सफल रहे। इस दौरान दोनों तरफ के अफसरों की भी मीटिंग कराई, ताकि किसी भी स्तर पर नकारात्मकता न रहे। इससे राज्य सरकारें मरम्मत के लिए तैयार हो गईं।

4. सरवजीत सिंह (पंजाब के प्रमुख सचिव)- मरम्मत को पंजाब के लिए जरूरी माना, फंड जुटाने का खाका बनाया
इन्होंने राजस्थान के अफसरों से पूरा मामला समझा। पंजाब के कुछ जिलों में पानी का संकट नहीं हो, इसके लिए प्रमुखता से मरम्मत और इसके लिए फंड जुटाने का पूरा खाका तैयार किया। इसके बाद ही दोनों राज्यों के सीएम स्तर की मीटिंग करवाने का निर्णय किया जा सका।

5. जेएस मान (पंजाब के पूर्व इंजीनियर)- अपनी सरकार व अफसरों को मरम्मत की जरूरत बताई
पंजाब में नहर की मरम्मत के लिए पहले ये 90 दिन के क्लोजर पर अड़े थे। लेकिन चार साल की राजस्थान से बातचीत के बाद इन्होंने अपनी सरकार के टॉप ब्यूरोक्रेट्स से लेकर मुख्यमंत्री तक से बात की। इन्होंने बताया नहर टूटी होने से पंजाब के पानी की भी बर्बादी हो रही है।

6. विनोद मित्तल (राजस्थान के इंजीनियर)- पंजाब-राजस्थान दोनों को जल बचाने का गणित समझाया
दोनों राज्यों को पानी की बर्बादी रोकने को मनाया। 70 दिन के क्लोजर में काम करके साबित किया कि कम दिन में काम संभव है जबकि पंजाब 90 दिन से कम के लिए तैयार नहीं था। पंजाब के इंजीनियर्स को भी ग्राउंड पर काम दिखाया।

ये 7 कभी नहीं सुलझे
1. रावी-ब्यास नदी विवाद, पंजाब-हरियाणा-राजस्थान के मध्य है यह विवाद
2. नर्मदा नदी विवाद, मध्यप्रदेश-गुजरात-राजस्थान-महाराष्ट्र के मध्य
3. गोदावरी नदी विवाद, आन्ध्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़-ओड़िशा के मध्य
4. कृष्णा नदी विवाद, आन्ध्र-कर्नाटक-महाराष्ट्र के मध्य
5. कावेरी नदी विवाद, कर्नाटक-तमिलनाडु-पांडिचेरी-केरल के मध्य
6. महादाई नदी विवाद, गोवा-कर्नाटक-महाराष्ट्र के मध्य
7. वंशधारा नदी विवाद, आंध्र प्रदेश-ओड़िशा के मध्य

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