नमक कारोबारी पर तीसरी बार हुआ था हमला:जानें- भाजपा-कांग्रेस नेता की 15 साल पुरानी दोस्ती कैसे दुश्मनी में बदल गई

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी/रणवीर चौधरी

नमक कारोबारी व भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष जयपाल पूनिया और कांग्रेस विधायक महेंद्र चौधरी के भाई मोती सिंह किसी जमाने में दोस्त हुआ करते थे, लेकिन ये दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। दुश्मनी भी ऐसी कि पूनिया पर 3 हमले हुए। दो हमलों में तो बच गया लेकिन तीसरी बार किस्मत ने साथ नहीं दिया। आखिर क्या वजह थी कि जयपाल और मोती सिंह की 15 साल दोस्ती दुश्मनी में बदल गई? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए भास्कर टीम के 2 रिपोर्टर 6 दिन से नावां में हैं।

तहसील से लेकर बाजार तक 60 से ज्यादा लोगों से बात की। किसी ने जयपाल और मोती सिंह का जिक्र छेड़ते ही बात करने से इनकार कर दिया तो किसी ने पूरी घटना से खुद को अनजान बताया। इसी बीच कुछ लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने दबी जबान पर दोनों के बीच कुछ बातें बताई, लेकिन इस शर्त पर कि हमारा कहीं भी नाम नहीं आना चाहिए।

भास्कर टीम ने जयपाल के ताऊ विजय सिंह से बात भी की। जयपाल के परिचित राधेश्याम के पास पहुंचे तो उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। पूनिया पर पहली बार हमला घर के बाहर हुआ। दूसरी बार जेल में और तीसरी बार में पूनिया की डिस्कॉम के बाहर हत्या कर दी गई।

पढ़िए पूनिया के नमक कारोबारी बनने से हत्या तक की पूरी कहानी …

मोती सिंह और जयपाल पार्टनरशिप में काम करते थे।
मोती सिंह और जयपाल पार्टनरशिप में काम करते थे।

एक फौजी कैसे बना नमक कारोबारी
इस कहानी की शुरुआत आज से 15 साल पहले हुई थी। जयपाल पूनिया ने दसवीं करने के बाद लाइसेंस बनवा लिया था। फौज में नौकरी करने लगा था। फौज से रिटायर होकर व्यापार करना चाहता था। किसी ने उसे नावां में नमक के कारोबार के बारे में बताया। वह हरियाणा के महेंद्रगढ़ से बड़े-बड़े सपने लेकर राजस्थान के नागौर आ गया। यहां नावां आकर पहले जेसीबी किराए पर ली थी। वह नमक के ट्रॉले भरने में लग गया। फिर दो ट्रॉले भी ले लिए।

2012 से शुरू हुई तनातनी
नावां से नमक लेकर जयपाल हरियाणा, पंजाब सप्लाई करने लग गया था। उस समय मोती सिंह का नावां में काफी दबदबा था। दोनों के बीच दोस्ती हो गई। मोती सिंह और जयपाल पार्टनरशिप में काम करने लगे। पहले लीज पर खारड़े (जहां से नमक निकाला जाता है) लिए, फिर रजिस्ट्री करवा ली। राजास में प्लांट लगा लिया था। जयपाल जेसीबी से नमक के ढेर हटाने और लगाने का काम खारड़े में करने लगा। 2012 में जयपाल और मोती सिंह के बीच रुपयों के लेनदेन को लेकर अनबन हो गई। प्लांट भी बंद कर दिया।

अनबन के बाद जयपाल पर कई केस दर्ज हुए
जयपाल को राजस्थान नमक उत्पादक संघ का अध्यक्ष बना दिया गया। जयपाल और मोती सिंह के बीच में आए दिन कहासुनी होने लगी। 2015 में मोती सिंह ने जयपाल के खिलाफ पहला मामला पर्यावरण और राजकार्य में मुकदमा दर्ज हुआ। फिर दूसरा मामला पुलिस के साथ मारपीट का दर्ज हुआ। 4 दिन के बाद हाईकोर्ट से उसकी जमानत हो गई थी। दोनों के बीच में ऐसी ही खेल चलता रहा। 2018 में मोती सिंह का भाई महेंद्र चुनाव जीत गया। फिर लगातार विवाद बढ़ने लगे। मुकदमे भी दर्ज होने लगे।

सिक्योरिटी ऑफिसर बना तो बढ़ा विवाद
जयपाल फौज से रिटायर था। ऐसे में उसने सांभर लेक में सिक्योरिटी इंजार्च की नौकरी ज्वॉइन कर ली। यही बात मोतीसिंह के लिए परेशानी का कारण बन गई, क्योंकि मोतीसिंह ने झील में कई अवैध बोरिंग कर रखे थे, जिन्हें जयपाल ने तुड़वाना शुरू कर दिया। मोतीसिंह ने वहां कई अवैध कुएं भी खोद रखे थे। जयपाल ने वो भी बंद करा दिए। लगातार हो रहे नुकसान से मोतीसिंह बौखला गया। उसने जयपाल का बिजली कनेक्शन कटवा दिया। जिसकी 12 लाख की वीसी भरवा दी। नुकसान होने पर जयपाल ने मोहनपुरा का प्लांट बंद कर दिया।

जेल में भी पूनिया को मारने का प्लान
मोती सिंह व जयपाल के बीच में घर के बाहर गाड़ी में तोड़फोड़ करने का मामला भी दर्ज हुआ। पुलिस ने जयपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परबतसर जेल में पूनिया की हत्या करने का प्लान बनाया गया। जेल में दो पहलवानों को भेजा गया था। दोनों पहलवानों ने पूनिया को कुश्ती लड़ने के लिए ललकारा था। पहले तो पूनिया तैयार हो गया, लेकिन जैसे उसने एक पहलवान के पास बड़ा डंडा देखा तो वह पूरा माजरा समझ गया और लड़ने से मना कर दिया। इसके बाद दोनों पहलवानों ने पोर्च से बाहर आकर पूनिया पर हमला किया।

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