राजनीतिक नियुक्तियां शुरू होते ही कांग्रेस में बवाल:टोंक में बागियों को बना दिया मनोनीत पार्षद, पायलट समर्थकों ने प्रदेश प्रभारी और प्रदेशाध्यक्ष से की शिकायत,भरतपुर में बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष को राजनीतिक नियुक्ति

जयपुरएक वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर

गहलोत सरकार ने सरकार का आधा कार्यकाल बीतने के बाद जिला और ब्लॉक स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां शुरू की हैं, ग्रासरूट स्तर की राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर कई जिलों से अब कांग्रेस में विरोध के सुर उठने लगे हैं। टोंक में कांग्रेस को हराने वाले बागियों को पार्षद मनोनीत करने पर विरोध हो रहा है। भरतपुर में भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष हंसिका सिंह ​को राशन दुकान आवंटन समिति का सदस्य बनाने और डीग में भाजपा नेता को पार्षद मनोनीत करने पर नेताओं ने नाराजगी जताई है।

टोंक में सचिन पायलट समर्थक निवर्तमान जिलाध्यक्ष लक्ष्मण गाता ने प्रदेश प्रभारी अजय माकन और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को चिट्ठी लिखकर बागियों को पार्षद मनोनीत करने केा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ धोखा बताते हुए उनकी नियुक्तियां रद्द करने की मांग की है।
माकन को भेजी गई चिट्ठी में लिखा है- टोडारायसिंह में नौरतमल और ललीता जैन को पार्षद मनोनीत किया। नौरतमल की पत्नी ने मैना देवी ने बागी चुनाव लड़ा। ललिता जैन के देवर कांग्रेस के बागी थे। मालपुरा में रवि माहेश्वरी और मरगूब अहमद को पार्षद मनोनीत किया। मरगूब अहमद ने बागी होकर चुनाव लड़ा, रवि मोहश्वरी पर पार्टी विरो​धी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।
नाराजगी दूर करने राजनीतिक नियुक्तियां शुरू की, लेकिन नया विवाद शुरू
गहलोत सरकार ने पार्टी में जारी खेमेबंदी और विवाद को शांत करने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां शुरू की है लेकिन बहुत सी जगहों पर नया विवाद शुरू हो गया है। बागियों और भाजपा कार्यकर्ताओं को नियुक्तियां मिलने पर कांग्रस नेता और कार्यकर्ताओं में असंतोष के सुर उठने लगे हैं। प्रदेश कांग्रेस के पास ढेरों शिकायतें आई हैं। 12 जिलों में पंचायत चुनावों से पहले हो रही ​राजनीतिक नियुक्तियों पर उठ रहे विवाद ने कांग्रेस की चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं।

पार्षद मनोनयन में एआईसीसी के निर्देशों के उल्लंघन पर पहले से नाराजगी
पार्षद मनोनय में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने निर्देश दिए थे कि जिन्हें पहले टिकट मिल चुके या जिनके परिवार से कोई जनप्रतिनिधि हैं उन्हें मौका नहीं मिलेगा। इस प्रावधान की बहुत से निकायों में जमकर उल्लंघन करने की शिकायतेें प्रदेश कांग्रेस को मिली हैंं। पिछले दिनों हुई बैठक में भी पार्टी पदाधिकारियों ने यह मुद्दा उठाया था।

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